
गिरफ़्तार आतंकी नावेद की तस्वीर
उधमपुर:
जम्मू कश्मीर के उधमपुर में कल गिरफ़्तार किया गया आतंकी नावेद डेढ़ महीने पहले रमज़ान के महीने में कश्मीर घाटी में घुसा था, सुरक्षा बल नावेद से लगातार पूछताछ करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।
नावेद ने इससे पहले जम्मू कश्मीर में घुसपैठ से संबंधित समय और तरीके के कई विरोधाभासी बयान दिए हैं।
काफी कठोर पूछताछ के बाद ये पता चला है कि नावेद की कश्मीर घाटी के लाइन ऑफ कंट्रोल वाले इलाके से भारत में घुसा था ना कि जम्मू स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा से। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए नावेद की मदद पाकिस्तानी गाइड ने की थी।
तब से नावेद और उसके अन्य साथी कश्मीर घाटी में छुपे हुए थे। खुफिया सूत्रों के अनुसार नावेद काफी समय जम्मू के लोकप्रिय पर्यटक स्थल गुलमर्ग में भी रुका था। गुलमर्ग में ही उसने आतंकी हमले के लिए हथियार और गोलाबारूद इकट्ठा किया था।
इससे ये संभावना भी जग गई है कि नावेद को गुलमर्ग में स्थानीय मदद भी मिली है।
तीन ट्रकों में की यात्रा
आतंकी हमले से ठीक पहले नावेद और उसके दोस्त को राष्ट्रीय राजमार्ग को निशाना बनाने का ऑर्डर दिया गया था। ये राजमार्ग बनिहाल टनल का दक्षिणी हिस्सा है। पूछताछ में ये भी पता चला है कि नावेद और मारा गया उसका साथी नोमान ने कश्मीर घाटी से उधमपुर तक आने के लिए तीन ट्रकों में बदल-बदल कर यात्रा की।
इन दोनों ने मंगलवार को घाटी से रामबाण के लिए एक ट्रक ली थी और फिर उसके बाद दूसरी तमातर मोह हाईवे से जहां उन्होंने रात गुज़ारी। बुधवार सुबह वे नारसू नलाह पर हमला करने के लिए तीसरी बार ट्रक पर चढ़े।
इन दोनों आतंकियों को हाईवे पर सेना, सीआरपीएफ़ और बीएएसएफ़ के काफ़िले पर हमला करने का ऑर्डर दिया गया था। इस बीच जब पूछताछ करने वाले अधिकारी नावेद से सही जानकारी पता करने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे ये कि नावेद के साथ उसके दो साथी भी भारत आए थे वो कहां हैं?
हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले हफ़्ते गुरदासपुर में हुए आतंकी हमले और नावेद द्वारा किए गए हमले के बीच कोई कड़ी नहीं है लेकिन दोनों हमलों की ट्रेनिंग पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने दिया है।
सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिन ट्रकों में इन आतंकियों ने कश्मीर से उधमपुर की यात्रा की, उनके ड्राइवर कौन थे। एक बाद जिसपर नावेद अडिग रहा है वो ये कि वो पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद का रहने वाला है।
नावेद ने इससे पहले जम्मू कश्मीर में घुसपैठ से संबंधित समय और तरीके के कई विरोधाभासी बयान दिए हैं।
काफी कठोर पूछताछ के बाद ये पता चला है कि नावेद की कश्मीर घाटी के लाइन ऑफ कंट्रोल वाले इलाके से भारत में घुसा था ना कि जम्मू स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा से। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए नावेद की मदद पाकिस्तानी गाइड ने की थी।
तब से नावेद और उसके अन्य साथी कश्मीर घाटी में छुपे हुए थे। खुफिया सूत्रों के अनुसार नावेद काफी समय जम्मू के लोकप्रिय पर्यटक स्थल गुलमर्ग में भी रुका था। गुलमर्ग में ही उसने आतंकी हमले के लिए हथियार और गोलाबारूद इकट्ठा किया था।
इससे ये संभावना भी जग गई है कि नावेद को गुलमर्ग में स्थानीय मदद भी मिली है।
तीन ट्रकों में की यात्रा
आतंकी हमले से ठीक पहले नावेद और उसके दोस्त को राष्ट्रीय राजमार्ग को निशाना बनाने का ऑर्डर दिया गया था। ये राजमार्ग बनिहाल टनल का दक्षिणी हिस्सा है। पूछताछ में ये भी पता चला है कि नावेद और मारा गया उसका साथी नोमान ने कश्मीर घाटी से उधमपुर तक आने के लिए तीन ट्रकों में बदल-बदल कर यात्रा की।
इन दोनों ने मंगलवार को घाटी से रामबाण के लिए एक ट्रक ली थी और फिर उसके बाद दूसरी तमातर मोह हाईवे से जहां उन्होंने रात गुज़ारी। बुधवार सुबह वे नारसू नलाह पर हमला करने के लिए तीसरी बार ट्रक पर चढ़े।
इन दोनों आतंकियों को हाईवे पर सेना, सीआरपीएफ़ और बीएएसएफ़ के काफ़िले पर हमला करने का ऑर्डर दिया गया था। इस बीच जब पूछताछ करने वाले अधिकारी नावेद से सही जानकारी पता करने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे ये कि नावेद के साथ उसके दो साथी भी भारत आए थे वो कहां हैं?
हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले हफ़्ते गुरदासपुर में हुए आतंकी हमले और नावेद द्वारा किए गए हमले के बीच कोई कड़ी नहीं है लेकिन दोनों हमलों की ट्रेनिंग पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने दिया है।
सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिन ट्रकों में इन आतंकियों ने कश्मीर से उधमपुर की यात्रा की, उनके ड्राइवर कौन थे। एक बाद जिसपर नावेद अडिग रहा है वो ये कि वो पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद का रहने वाला है।
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