किसानों की बात सुनते मनोहर पर्रिकर और राज्यवर्धन राठौड़
जयपुर:
मोदी सरकार अपना बजट तैयार कर रही है लेकिन इसके पहले एक अनोखी पहल की गयी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों से कहा है कि जगह-जगह जा कर वो लोगों से पूछें कि आम आदमी बजट में क्या चाहता है।
जयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर बिछोली गांव में एक आयोजन में किसानों से सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बातचीत की। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया, 'चाहे किसान हों, मज़दूर हों, व्यापर मंडल हो इन सबको बुला कर इनसे आइडियाज लिए गए और ये 124 लोकसभा क्षेत्रों में जनवरी के महीने में हो तो बजट से पहले बहुत बेहतरीन आइडियाज होंगे जो ग्रास रूट लेवल से आएंगे।'
124 लोकसभा क्षेत्रों में मोदी सरकार के अलग-अलग मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गयी है कि वो जा कर लोगों से मिलें और पूछें कि वो क्या चाहते हैं बजट से। इसके लिए मंत्रियों को जनवरी का समय दिया गया है। राजीव प्रताप रूडी भीलवाड़ा और हरसिमरत कौर गंगानगर का दौरा जनवरी के शुरुआत में ही कर चुके हैं।
राज्यवर्धन राठौड़ और मनोहर पर्रिकर से रूबरू हुए किसानों के सुझाव गौर करने लायक थे। किसानों में बढ़ती आत्महत्या से लेकर फसल बीमा तक, उन्होंने कई महत्पूर्ण बातें मंत्रियों के सामने रखीं। और खास बात ये थी कि यहां सुझाव लोगों ने दिए और मंत्रियों ने सुना।
62 साल के किसान रंजीत सुलेथ का कहना था, 'चार साढ़े चार लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। आत्मा हत्या कौन करता है? जब सब तरफ से गला भर जाता है, वो आत्महत्या करता है और इसका कारण है हमारी उपज का सही मुल्य नहीं मिलना।'
60 साल के छोगा लाल ने फसल बीमा को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'फसल बीमा को सुधारना है, इन्होंने तहसील को इकाई माना है, इन्होंने ये नीति अपना रखी है कि पूरे तहसील में फसल ख़राब होगी तब हम बीमा देंगे। तो अगर कोई आदमी अपने लिए कोई एक्सीडेंट का बीमा करवाता है तो क्या जब तक पूरे परिवार का एक्सीडेंट नहीं हो जाता तब तक अब बीमा नहीं देते हो क्या, अभी फसल बीमा वैसे ही है।'
किसानों के सुझाव सुनने के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि जिन पर राज्य सरकार फैसला ले सकती है वो सुझाव राज्य सरकार को भेजेंगे और जिस पर केंद्र नीति बना सकता है वो केंद्र को बताएंगे। लेकिन उनका मानना था कि फसल बीमा का मसला जल्द ही सुलझ सकता है क्योंकि कैबिनेट ने भी इस मुद्दे को उठाया है। बजट से पहले जनता तक पहुंचने का ये एक नया प्रयोग था। लेकिन जनता की अपेक्षाओं पर ये कितना खरा उतरेगा ये बाद में ही पता चलेगा।
जयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर बिछोली गांव में एक आयोजन में किसानों से सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बातचीत की। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया, 'चाहे किसान हों, मज़दूर हों, व्यापर मंडल हो इन सबको बुला कर इनसे आइडियाज लिए गए और ये 124 लोकसभा क्षेत्रों में जनवरी के महीने में हो तो बजट से पहले बहुत बेहतरीन आइडियाज होंगे जो ग्रास रूट लेवल से आएंगे।'
124 लोकसभा क्षेत्रों में मोदी सरकार के अलग-अलग मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गयी है कि वो जा कर लोगों से मिलें और पूछें कि वो क्या चाहते हैं बजट से। इसके लिए मंत्रियों को जनवरी का समय दिया गया है। राजीव प्रताप रूडी भीलवाड़ा और हरसिमरत कौर गंगानगर का दौरा जनवरी के शुरुआत में ही कर चुके हैं।
राज्यवर्धन राठौड़ और मनोहर पर्रिकर से रूबरू हुए किसानों के सुझाव गौर करने लायक थे। किसानों में बढ़ती आत्महत्या से लेकर फसल बीमा तक, उन्होंने कई महत्पूर्ण बातें मंत्रियों के सामने रखीं। और खास बात ये थी कि यहां सुझाव लोगों ने दिए और मंत्रियों ने सुना।
62 साल के किसान रंजीत सुलेथ का कहना था, 'चार साढ़े चार लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। आत्मा हत्या कौन करता है? जब सब तरफ से गला भर जाता है, वो आत्महत्या करता है और इसका कारण है हमारी उपज का सही मुल्य नहीं मिलना।'
60 साल के छोगा लाल ने फसल बीमा को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'फसल बीमा को सुधारना है, इन्होंने तहसील को इकाई माना है, इन्होंने ये नीति अपना रखी है कि पूरे तहसील में फसल ख़राब होगी तब हम बीमा देंगे। तो अगर कोई आदमी अपने लिए कोई एक्सीडेंट का बीमा करवाता है तो क्या जब तक पूरे परिवार का एक्सीडेंट नहीं हो जाता तब तक अब बीमा नहीं देते हो क्या, अभी फसल बीमा वैसे ही है।'
किसानों के सुझाव सुनने के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि जिन पर राज्य सरकार फैसला ले सकती है वो सुझाव राज्य सरकार को भेजेंगे और जिस पर केंद्र नीति बना सकता है वो केंद्र को बताएंगे। लेकिन उनका मानना था कि फसल बीमा का मसला जल्द ही सुलझ सकता है क्योंकि कैबिनेट ने भी इस मुद्दे को उठाया है। बजट से पहले जनता तक पहुंचने का ये एक नया प्रयोग था। लेकिन जनता की अपेक्षाओं पर ये कितना खरा उतरेगा ये बाद में ही पता चलेगा।
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