
नई दिल्ली:
करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान की हिरासत में बेरहमी से मारे गए कैप्टन सौरभ कालिया के मामले में पीछे हटने की खबर को लेकर हुई फजीहत के बाद अब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी इजाज़त देता है सरकार इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले जाएगी।
दरअसल इससे पहले सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में इसकी जानकारी दी, जिसके बाद ये मामला तूल पकड़ने लगा है। हालांकि इस मामले में विवाद बढ़ता देख विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मामले पर सफाई दी है।
साल 1999 में शहीद हुए कैप्टन सौरभ कालिया के परिवार ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर करके इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ले जाने की मांग की थी, क्योंकि युद्ध बंदियों के साथ इस तरह का अमानवीय बर्ताव जीनिवा कन्वेंशन का उल्लंघन है।
साल 2012 में उस समय विपक्ष में बैठी बीजेपी ने यूपीए सरकार को ऐसे ही फ़ैसले पर जमकर घेरा था, लेकिन मोदी सरकार के रुख़ पर दुख जताते हुए कैप्टन सौरभ कालिया के पिता एन.के. कालिया ने कहा है कि उन्हें लगा था कि बीजेपी सरकार ज़्यादा देशभक्त है, लेकिन वो भी पुरानी सरकार के ही स्टैंड पर कायम है।
हालांकि पाकिस्तान की सरकार कैप्टन सौरभ कालिया पर दरिंदगी की बात से इनकार करती रही है, लेकिन पाकिस्तानी सैनिकों ने इसे स्वीकर किया था और इसका वीडियो भी पिछले साल यूट्यूब पर वायरल हुआ है।
राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर के सवाल के जवाब में विदेश मामलों के राज्यमंत्री जनरल वी.के. सिंह ने कहा कि इस मसले से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को 22 सितंबर 1999 को UN महासभा और 6 अप्रैल 2000 को मानवाधिकार आयोग में बयानों के ज़रिए अवगत करा दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के ज़रिए क़ानूनी कार्रवाई के बारे में भी सारे पहलुओं पर गौर किया गया, लेकिन ये संभव नहीं लगता।
क्या हुआ था कैप्टन कालिया के साथ?
दरअसल इससे पहले सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में इसकी जानकारी दी, जिसके बाद ये मामला तूल पकड़ने लगा है। हालांकि इस मामले में विवाद बढ़ता देख विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मामले पर सफाई दी है।
साल 1999 में शहीद हुए कैप्टन सौरभ कालिया के परिवार ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर करके इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ले जाने की मांग की थी, क्योंकि युद्ध बंदियों के साथ इस तरह का अमानवीय बर्ताव जीनिवा कन्वेंशन का उल्लंघन है।
साल 2012 में उस समय विपक्ष में बैठी बीजेपी ने यूपीए सरकार को ऐसे ही फ़ैसले पर जमकर घेरा था, लेकिन मोदी सरकार के रुख़ पर दुख जताते हुए कैप्टन सौरभ कालिया के पिता एन.के. कालिया ने कहा है कि उन्हें लगा था कि बीजेपी सरकार ज़्यादा देशभक्त है, लेकिन वो भी पुरानी सरकार के ही स्टैंड पर कायम है।
हालांकि पाकिस्तान की सरकार कैप्टन सौरभ कालिया पर दरिंदगी की बात से इनकार करती रही है, लेकिन पाकिस्तानी सैनिकों ने इसे स्वीकर किया था और इसका वीडियो भी पिछले साल यूट्यूब पर वायरल हुआ है।
राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर के सवाल के जवाब में विदेश मामलों के राज्यमंत्री जनरल वी.के. सिंह ने कहा कि इस मसले से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को 22 सितंबर 1999 को UN महासभा और 6 अप्रैल 2000 को मानवाधिकार आयोग में बयानों के ज़रिए अवगत करा दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के ज़रिए क़ानूनी कार्रवाई के बारे में भी सारे पहलुओं पर गौर किया गया, लेकिन ये संभव नहीं लगता।
क्या हुआ था कैप्टन कालिया के साथ?
- 15 मई 1999 को पाकिस्तान ने 5 जवानों के साथ कैप्टन कालिया को बंदी बनाया।
- 6 जून 1999 को पाकिस्तानी सेना ने कैप्टन कालिया का शव भारत को सौंपा।
- कैप्टन कालिया को बुरी तरह टॉर्चर किया गया था।
- कैप्टन कालिया के शरीर पर टॉर्चर किए जाने के निशान साफ देखे जा सकते थे। पाकिस्तान ने दावा किया कि कैप्टन कालिया और अन्य जवानों के शव गड्ढे में मिले थे।
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