
महाराष्ट्र में NDA गठबंधन सहयोगी शिवसेना के नई सरकार में बराबर की हिस्सेदारी मांगने से भगवा दल के लिये संतुलन साधना बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है. शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने ठाकरे ने गुरुवार को भाजपा को लोकसभा चुनावों से पहले शाह के साथ बैठक में तय फॉर्मूले की याद दिलाई और कहा कि उन्होंने राज्य में गठबंधन के लिये 50-50 के फॉर्मूले का फैसला लिया था. शिवसेना की इस मांग तो देखते हुए यहां कांग्रेस और एनसीपी भाजपा का काम बिगाड़ती हुई दिख रही हैं. न्यूज एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र कांग्रेस ने शुक्रवार को संकेत दिया कि वह शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दे सकती है. वहीं, इससे एक दिन पहले इसी प्रकार का प्रस्ताव राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता व पूर्व उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल व कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद हुसैन दलवी द्वारा दिया गया था, ऐसा शिवसेना के सहयोगी व सत्तारूढ़ भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए आया है.
महाराष्ट्र विधानसभा की 288 में से 161 सीटें जीतने के साथ भगवा गठबंधन ने बहुमत के लिये जरूरी आंकड़ा आसानी से पार कर लिया है लेकिन इस बार भाजपा की अपनी गठबंधन सहयोगी शिवसेना पर निर्भरता कुछ ज्यादा है क्योंकि पिछली बार जहां भाजपा की 122 सीटें थी वहीं इस बार उसके खाते में सिर्फ 105 सीटें आई हैं. शिवसेना की सीटों का आंकड़ा भी पिछली बार के मुकाबले 63 से घटकर 56 हुआ है लेकिन राजग सरकार की स्थिरता के लिये उसकी भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है. वहीं, कांग्रेस की बात करें इसे 44 सीटें मिली हैं. शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को इस बार 54 सीटें मिली हैं, जो 2014 के मुकाबले 13 सीटें अधिक है. अगर भाजपा के साथ शिवसेना की बात नहीं बनती है और कांग्रेस-एनसीपी उसे समर्थन दे देती है तो सीटों का आंकड़ा 154 पहुंच जाता है. यह आंकड़ा बहुमत से 9 ज्यादा होगा. हालांकि, शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी का एक साथ आना मुश्किल है.
महाराष्ट्र से बड़ी खबर, शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार को समर्थन दे सकती है कांग्रेस
आईएएनएस ने अपनी रिपोर्ट में महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोराट ने मीडिया से कहा, 'हम से इस पर अब तक शिवसेना से कोई बातचीत नहीं हुई है. हालांकि, अगर ऐसा होता है तो हम इस मामले पर निर्णय के लिए पार्टी आलाकमान के समक्ष रखेंगे.'
शिवसेना अध्यक्ष ठाकरे ने कहा, 'हम कम सीटों (भाजपा के मुकाबले) पर लड़ने को सहमत हुए, लेकिन मैं हर बार भाजपा के लिये ऐसा नहीं कर सकता. मुझे अपनी पार्टी को भी आगे बढ़ाना है.' अपनी वरिष्ठ सहयोगी पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना' में कहा कि नतीजों की घोषणा से पहले जैसा भाजपा ने दावा किया था, वैसा कोई 'महा जनादेश” नहीं है और नतीजे वास्तव में “सत्ता के अहंकार” में डूबे लोगों पर एक चोट हैं.
AAP नेता संजय सिंह ने बताई वजह- महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनाव में पार्टी को क्यों मिली हार?
अब महाराष्ट्र में भाजपा का काम अपनी सहयोगी शिवसेना को मनाने का है. सूत्रों ने कहा कि महाराष्ट्र में भगवा गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले चीजों को अंतिम रूप देने के लिये भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ बातचीत कर सकते हैं. भाजपा संसदीय बोर्ड ने गुरुवार को शाह को दोनों राज्यों में नई सरकार के गठन के लिये सभी जरूरी फैसले लेने के लिये अधिकृत किया था.
वहीं, पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिये शिवसेना से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को मिला जनादेश एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने के लिये है. उन्होंने शुक्रवार को मीडिया से कहा कि शिवसेना नीत सरकार का समर्थन करने की कांग्रेस की कोई रणनीति या प्रस्ताव नहीं है. थोराट ने कहा, ‘‘इसलिए उद्धव ठाकरे नीत पार्टी को समर्थन देने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. यदि शिवसेना हमसे संपर्क करती है तो हम अपने केंद्रीय नेतृत्व से सलाह मांगेंगे और उसका फैसला अंतिम होगा.'
Election Results: कांग्रेस नेता सचिन पायलट बोले- 'थोड़ी कसर रह गई नहीं तो...'
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने भी शिवसेना के साथ किसी गठजोड़ से इनकार किया. उन्होंने कहा, ‘हम शिवसेना के साथ नहीं जाएंगे. राकांपा-कांग्रेस और अन्य सहयोगी दल भविष्य की रणनीति के बारे में साथ बैठ कर फैसला करेंगे.' पवार ने कहा, ‘लोगों ने हमसे विपक्ष में बैठने को कहा है. सत्ता में बैठने की कोशिश करने का विचार हमारे मन में भी नहीं आ सकता.'
VIDEO: मुकाबला: क्या वाकई बीजेपी को बड़ी जीत मिली है?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं