
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू करने की विचार किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में वकीलों और पक्षकारों से लिखित सहमति मांगी है, साथ ही कहा है कि लिखित सहमति की प्राप्ति के बाद ही विचार किया जाएगा. कोरोना वायरस की महामारी के चलते फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई हो रही है. सुप्रीम कोर्ट के अतिरिक्त रजिस्ट्रार द्वारा जारी सरकुलर में कहा गया है कि अदालत में सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का पालन करते हुए वकीलों की शारीरिक उपस्थिति की व्यवहारिकता का पता लगाने के लिए सभी वकीलों व पक्षकारों को अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित होने और बहस करने के लिए संयुक्त सहमति देनी होगी. सभी पक्षों की सहमति मिलने पर ही मामले को माननीय न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध करने पर विचार किया जाएगा, जो कि पीठ की उपलब्धता के अधीन है. आगे स्पष्ट किया गया है कि भौतिक अदालत की सुनवाई शुरू करने का आदेश केवल सक्षम प्राधिकारी के आदेश और अपेक्षित सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) के मानदंडों के अधीन होगा.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट, वर्चुअल कोर्ट के तौर पर काम कर रहा है. वकीलों के संगठनों ने भी देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे से अपील की है कि खुली अदालत में सुनवाई शुरू की जाए.इससे पहले CJI भी कह चुके हैं कि वर्चुअल कोर्ट, खुली अदालतों की जगह नहीं ले सकतीं. सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ( SCORA) ने भी मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखी है, इसमें कहा गया है कि जुलाई से नियमित कोर्ट में सुनवाई शुरू की जाए. साथ ही कहा है वर्चुअल कोर्ट में वकील प्रभावी ढंग से अपनी बात नहीं रख पाते. बहुत वकील कंप्यूटर व तकनीक को नहीं समझते और संसाधनों की भी कमी है. पत्र में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जरूरी एहतियात अपनाने पर भी जोर दिया गया है.
SCORA ने अपने लेटर में कहा है कि ओपन कोर्ट की सुनवाई भारतीय कानूनी प्रणाली की "रीढ़" है और वर्चुअल कोर्ट भौतिक पीठों का विकल्प नहीं हैं. पत्र में कहा गया है कि लगभग 95% वकील वर्चुअल कोर्ट की सुनवाई के साथ सहज नहीं हैं क्योंकि वे कंप्यूटर के उपयोग पर ज्ञान से अच्छी तरह से सुसज्जित नहीं हैं. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट 25 मार्च से ही वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए सुनवाई कर रहा है.
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