
नई दिल्ली:
कश्मीर के बांदीपुरा में हुए फिदायीन हमले को नाकाम करने में सीआरपीएफ कैंप के गेट पर तैनात दो संतरियों और दो कुत्तों का बहुत बड़ा हाथ रहा. अगर ये चारों अलर्ट नहीं होते तो यहां भी आतंकी उड़ी जैसा हमला करने में कामयाब हो जाते. पिछले साल सितंबर मे उड़ी के सेना के कैंप पर भी आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें करीब 19 जवान शहीद हुए थे, लेकिन यहां पर तो इन चारों की वजह से न सिर्फ हमला नाकाम हुआ, बल्कि चारों आतंकी भी मार गिराए गए. आतंकियों के नापाक मंसूबे भी धरे के धरे रह गए.
जब सोमवार को तड़के पौने चार बजे आतंकी हमला हुआ, तो कैंप के गेट पर प्रफुल्ल कुमार और दिनेश कुमार राजा तैनात थे. जैसे ही इन्हें पता लगा कि कैंप के बाहर कुछ संदिग्ध हरकत हो रही है, ये अपने हथियार के साथ चौकस हो गए. पहले आतंकियों ने इन पर ग्रेनेड से हमला किया और फिर भारी गोलीबारी.. लेकिन इन दोनों ने मोर्चा नहीं छोड़ा और उनका डटकर मुकाबला किया. नतीजा ये रहा कि कैंप के बाहर ही चारों आतंकी मार गिराए गए.
कॉन्स्टेबल प्रफुल कुमार बिहार के मुंगेर के रहने वाले हैं. प्रफुल्ल अगस्त 2011 में सीआरपीएफ मे भर्ती हुए थे. वे 45 बटालियन में दिसंबर 2012 से हैं. इसी तरह कॉन्स्टेबल दिनेश कुमार राजा तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के निवासी हैं. दिनेश सीआरपीएफ में अक्टूबर 2014 में भर्ती हुए इस बटालियन में अक्टूबर 2015 से हैं.
इन दिनों के अलावा कैंप पर हुए आतंकी हमले को नाकाम करने में दो कुत्तों की भी अहम भूमिका रही. ये स्थानीय कुत्ते हैं, जिनका नाम टाइगर और लूसी है. इनको अक्सर सीआरपीएफ के जवान खिलाते-पिलाते रहते थे. हमले से ठीक पहले ये दोनों कुत्ते लगातार भौंक रहे थे. सीआरपीएफ जवानों को इस वजह से आतंकियों की मौजूदगी की आशंका पहले ही हो गई. सीआरपीएफ की मानें तो इन दोनों कुत्तों ने अपने वफादारी से कइयों की जान बचा ली और आतंकियों के अरमान पूरे नहीं होने दिए.
चेतन चीता के इस बटालियन ने एक बार फिर बहादुरी की मिसाल पेश की है. मंगलवार को कश्मीर में सीआरपीएफ के डीजी राजीव भटनागर ने इन दोनों जवानों सहित 15 लोगों को डीजी प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया. वहीं डीजी ने इस ऑपेरशन मे शामिल जम्मू-कश्मीर पुलिस के तीन लोगों को भी सम्मानित किया. इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजी ने छह सीआरपीएफ के जवानों को सम्मानित किया. बाद में अपने कैंप को आतंकियों के हमले से नाकाम करने वाले दोनों जवानों को बहादुरी के सम्मान से सम्मानित किया जाएगा.
जब सोमवार को तड़के पौने चार बजे आतंकी हमला हुआ, तो कैंप के गेट पर प्रफुल्ल कुमार और दिनेश कुमार राजा तैनात थे. जैसे ही इन्हें पता लगा कि कैंप के बाहर कुछ संदिग्ध हरकत हो रही है, ये अपने हथियार के साथ चौकस हो गए. पहले आतंकियों ने इन पर ग्रेनेड से हमला किया और फिर भारी गोलीबारी.. लेकिन इन दोनों ने मोर्चा नहीं छोड़ा और उनका डटकर मुकाबला किया. नतीजा ये रहा कि कैंप के बाहर ही चारों आतंकी मार गिराए गए.
कॉन्स्टेबल प्रफुल कुमार बिहार के मुंगेर के रहने वाले हैं. प्रफुल्ल अगस्त 2011 में सीआरपीएफ मे भर्ती हुए थे. वे 45 बटालियन में दिसंबर 2012 से हैं. इसी तरह कॉन्स्टेबल दिनेश कुमार राजा तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के निवासी हैं. दिनेश सीआरपीएफ में अक्टूबर 2014 में भर्ती हुए इस बटालियन में अक्टूबर 2015 से हैं.
इन दिनों के अलावा कैंप पर हुए आतंकी हमले को नाकाम करने में दो कुत्तों की भी अहम भूमिका रही. ये स्थानीय कुत्ते हैं, जिनका नाम टाइगर और लूसी है. इनको अक्सर सीआरपीएफ के जवान खिलाते-पिलाते रहते थे. हमले से ठीक पहले ये दोनों कुत्ते लगातार भौंक रहे थे. सीआरपीएफ जवानों को इस वजह से आतंकियों की मौजूदगी की आशंका पहले ही हो गई. सीआरपीएफ की मानें तो इन दोनों कुत्तों ने अपने वफादारी से कइयों की जान बचा ली और आतंकियों के अरमान पूरे नहीं होने दिए.
चेतन चीता के इस बटालियन ने एक बार फिर बहादुरी की मिसाल पेश की है. मंगलवार को कश्मीर में सीआरपीएफ के डीजी राजीव भटनागर ने इन दोनों जवानों सहित 15 लोगों को डीजी प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया. वहीं डीजी ने इस ऑपेरशन मे शामिल जम्मू-कश्मीर पुलिस के तीन लोगों को भी सम्मानित किया. इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजी ने छह सीआरपीएफ के जवानों को सम्मानित किया. बाद में अपने कैंप को आतंकियों के हमले से नाकाम करने वाले दोनों जवानों को बहादुरी के सम्मान से सम्मानित किया जाएगा.
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