
फाइल फोटो
नई दिल्ली:
कश्मीर घाटी में मोबाइल टावर्स पर हो रहे हमलों को लेकर चारों तरफ चिंता का माहौल है। गृहमंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि अभी तक जांच में सामने आया है कि इन सभी हमलों के पीछे हिजबुल मुजाहिदीन का हाथ है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि अभी तक यह लग रहा था कि लश्कर इस्लाम नाम का संगठन इन हमलों के पीछे है। दरअसल, इस नाम का कोई संगठन नहीं है। जानबुझकर यह भ्रम फैलाया जा रहा था, लेकिन अब साफ हो गया है। हमने उन लोगों को जीरो डाउन भी कर लिया है।
घाटी में फिलहाल 250 के आसपास आतंकवादी सक्रीय हैं। उनमें से 30-40 फीसदी हिजबुल के हैं और माना जा रहा है कि हमलों के पीछे इनका हाथ है।
दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक शक्स अपना रिचार्ज करवाने सोपोर में एक दुकान में गया और उसने मोबाइल टावर के साथ एक लटकी हुई तार देखी। खींचने पर देखा कि वह एक वायरलेस सेट जैसी चीज से जुडी थी। वह उस वायरलेस सेट को घर ले गया और बाद में उसे पुलिस ने जब्त कर लिया।
तफ्तीश में पता चला कि ये डिवाइस "रिपीटर" है। इसके जरिये हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना अपने कैडर से रेडियो फ्रीक्वेंसी के ज़रिये बात कर रहे थे।
आईबी के एक अफसर ने एनडीटीवी इंडिया को बताया कि क्योंकि पिछले कुछ दिनों में मोबाइल से बात करने पर उनके कई साथी सुरक्षाबलों की गिरफ्त में आ गए थे। इसलिए उन्होंने यह नया तरीका इजाद किया, लेकिन जब वह पकड़ा गया तो वे बौखला गए इसीलिए ये हमले हो रहे हैं।
गृह मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, पिछले साल 110 और अभी पहले पांच महीनों में 67 आतंकवादी मारे गए हैं। ये ऑपरेशंस कामयाब कम्युनिकेशंस की मदद से ही हुए। सोपोर और बंदीपोर में सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है इसीलिए राज्य पुलिस सभी मोबाइल टावर्स की स्क्रूटिनी कर रही है। वे टावर्स आइडैंटिफाई किए जा रहे हैं, जो सबसे ज्यादा खतरे में आ सकते हैं। राज्य पुलिस उन्हें सुरक्षा देने के लिए भी तैयार है।
राज्य पुलिस का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो पुलिस इन स्वंवेदनशील टावर्स को कब्जे में लेकर उन्हें चलाने को भी तैयार है। घाटी में कम्युनिकेशन लाइन्स को ठप नहीं होने दिया जाएगा।
वैसे, सीओएआई ( Cellular Operators Association of India)और एयूटीएसपीआई (Association of Unified Telecom Service Providers of India)ने गृह मंत्रालय को चिठ्ठी लिख कर जल्द इस मामले का हल ढूंढने को कहा है। चिठ्ठी में लिखा है की कई कर्मचारी रिटेलर्स और दुकानें डर से बंद हो गई हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि अभी तक यह लग रहा था कि लश्कर इस्लाम नाम का संगठन इन हमलों के पीछे है। दरअसल, इस नाम का कोई संगठन नहीं है। जानबुझकर यह भ्रम फैलाया जा रहा था, लेकिन अब साफ हो गया है। हमने उन लोगों को जीरो डाउन भी कर लिया है।
घाटी में फिलहाल 250 के आसपास आतंकवादी सक्रीय हैं। उनमें से 30-40 फीसदी हिजबुल के हैं और माना जा रहा है कि हमलों के पीछे इनका हाथ है।
दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक शक्स अपना रिचार्ज करवाने सोपोर में एक दुकान में गया और उसने मोबाइल टावर के साथ एक लटकी हुई तार देखी। खींचने पर देखा कि वह एक वायरलेस सेट जैसी चीज से जुडी थी। वह उस वायरलेस सेट को घर ले गया और बाद में उसे पुलिस ने जब्त कर लिया।
तफ्तीश में पता चला कि ये डिवाइस "रिपीटर" है। इसके जरिये हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना अपने कैडर से रेडियो फ्रीक्वेंसी के ज़रिये बात कर रहे थे।
आईबी के एक अफसर ने एनडीटीवी इंडिया को बताया कि क्योंकि पिछले कुछ दिनों में मोबाइल से बात करने पर उनके कई साथी सुरक्षाबलों की गिरफ्त में आ गए थे। इसलिए उन्होंने यह नया तरीका इजाद किया, लेकिन जब वह पकड़ा गया तो वे बौखला गए इसीलिए ये हमले हो रहे हैं।
गृह मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, पिछले साल 110 और अभी पहले पांच महीनों में 67 आतंकवादी मारे गए हैं। ये ऑपरेशंस कामयाब कम्युनिकेशंस की मदद से ही हुए। सोपोर और बंदीपोर में सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है इसीलिए राज्य पुलिस सभी मोबाइल टावर्स की स्क्रूटिनी कर रही है। वे टावर्स आइडैंटिफाई किए जा रहे हैं, जो सबसे ज्यादा खतरे में आ सकते हैं। राज्य पुलिस उन्हें सुरक्षा देने के लिए भी तैयार है।
राज्य पुलिस का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो पुलिस इन स्वंवेदनशील टावर्स को कब्जे में लेकर उन्हें चलाने को भी तैयार है। घाटी में कम्युनिकेशन लाइन्स को ठप नहीं होने दिया जाएगा।
वैसे, सीओएआई ( Cellular Operators Association of India)और एयूटीएसपीआई (Association of Unified Telecom Service Providers of India)ने गृह मंत्रालय को चिठ्ठी लिख कर जल्द इस मामले का हल ढूंढने को कहा है। चिठ्ठी में लिखा है की कई कर्मचारी रिटेलर्स और दुकानें डर से बंद हो गई हैं।
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जम्मू-कश्मीर, मोबाइल टावर्स पर हमला, हिजबुल मुजाहिदीन, Jammu-Kashmir, Hizbul Mujahideen, Attack On Mobile Towers