
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)
नई दिल्ली/मुंबई:
शुक्रवार को बीजेपी नेताओं राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडू ने राष्ट्रपति चुनाव के मसले पर सोनिया गांधी से मुलाकात की. इसके पहले वेंकैया नायडू ने कई नेताओं से बात की. लेकिन आम राय की चाहे जितनी बात हो रही हो, अभी तक नाम एक भी नहीं आया है. राष्ट्रपति चुनाव पर आम राय बनाने सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे वेंकैया और राजनाथ ने कोई नाम नहीं बताया जिस पर आम राय बनाई जा सके. कांग्रेस ने यही सवाल उठाते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि बीजेपी लीडर राष्ट्रपति चुनाव के लिए नाम लेकर आएंगे जिनपर विपक्ष विचार कर पाए. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. सरकार की तरफ से कोई नाम नहीं आया. उल्टे उन्होंने हमसे ही नाम पूछ लिया."
बैठक में मौजूद कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "जब नाम ही सरकार नहीं रखेगी तो सहमति कैसे बनेगी...बात किस पर होगी? ये सच है कि एनडीए के भीतर भी तरह-तरह के नाम आ-जा रहे हैं. शिवसेना ने पहले मोहन भागवत का नाम लिया और फिर कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का. इस बीच शुक्रवार को मोहन भागवत ने राष्ट्रपति से शिष्टाचार मुलाकात की तो ये भी ख़बर बन गई.
सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह और वैंकेया नायडू ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी से भी मुलाकात की. बैठक के बाद येचुरी ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रपति बनना चाहिये जिसकी धर्मनिरपेक्ष छवि हो और संविधान की उसे अच्छी जानकारी हो. राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले दौर की बातचीत में ना सरकार ने अपने पत्ते खोले और ना ही विपक्ष ने. साफ है, राष्ट्रपति चुनावों से पहले राजनीतिक जोर-आज़माइश का ये खेल अभी कुछ दिन और जारी रहेगा.
बैठक में मौजूद कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "जब नाम ही सरकार नहीं रखेगी तो सहमति कैसे बनेगी...बात किस पर होगी? ये सच है कि एनडीए के भीतर भी तरह-तरह के नाम आ-जा रहे हैं. शिवसेना ने पहले मोहन भागवत का नाम लिया और फिर कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का. इस बीच शुक्रवार को मोहन भागवत ने राष्ट्रपति से शिष्टाचार मुलाकात की तो ये भी ख़बर बन गई.
सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह और वैंकेया नायडू ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी से भी मुलाकात की. बैठक के बाद येचुरी ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रपति बनना चाहिये जिसकी धर्मनिरपेक्ष छवि हो और संविधान की उसे अच्छी जानकारी हो. राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले दौर की बातचीत में ना सरकार ने अपने पत्ते खोले और ना ही विपक्ष ने. साफ है, राष्ट्रपति चुनावों से पहले राजनीतिक जोर-आज़माइश का ये खेल अभी कुछ दिन और जारी रहेगा.
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