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This Article is From Mar 26, 2020

लॉकडाउन की मार गरीब तबके पर, एक प्लेट खिचड़ी के लिए लगी एक किलोमीटर लंबी कतार

कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के चलते सबसे ज़्यादा मार ग़रीब तबके के लोगों पर पड़ रही है. सबकुछ बंद होने के चलते न तो इनके पास रहने के लिए छत है न खाने के लिए खाना.

लॉकडाउन की मार गरीब तबके पर, एक प्लेट खिचड़ी के लिए लगी एक किलोमीटर लंबी कतार
कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के चलते सबसे ज़्यादा मार ग़रीब तबके के लोगों पर
नई दिल्ली:

कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के चलते सबसे ज़्यादा मार ग़रीब तबके के लोगों पर पड़ रही है. सबकुछ बंद होने के चलते न तो इनके पास रहने के लिए छत है न खाने के लिए खाना, दिल्ली सरकार अपने आश्रय गृहों में ऐसे लोगों को खाना खिला रही है, लेकिन लोग इतने ज़्यादा हैं कि खाना भी कम पड़ जा रहा है, एक प्लेट खिचड़ी के लिए एक किलोमीटर से लंबी क़तार है. दो मीटर की दूरी रखना तो दूर की बात मज़दूर खाने के लिए एक के ऊपर एक भी कूदे जा रहे हैं. यमुना पुश्ता के आश्रय गृह से हमारे सहयोगी सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट है.

फिलहाल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कारोना वायरस (Coronavirus) और उसके आर्थिक प्रभाव से निपटने एवं देशव्यापी लॉकडाउन को लेकर गुरुवार को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की. यह राशि जरूरतमंदों की सहायता के लिये दी जा रही है. वित्त मंत्री ने कहा कि सभी श्रेणी के लोगों की सहायता को ध्यान में रखकर यह राहत पैकेज दिया जा रहा है. उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिये जुटे डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिये 50 लाख रुपये के बीमा कवर की घोषणा भी की है. वहीं, राशन की दुकानों से 80 करोड़ परिवारों को अतिरिक्त 5 किलो गेहूं या चावल के साथ एक किलो दाल तीन महीने के लिये मुफ्त दी जाएगी.

वित्त मंत्री ने कहा कि हमने मजदूरों को राहत देते हुए उनकी दैनिक मजदूरी बढ़ाने का फैसला किया है. मनरेगा के तहत मजदूरी को बढ़ाकर 182 रुपये से 202 रुपये कर दिया गया है. सीतारमण ने कहा कि 20 करोड़ महिला जनधन खातों में अगले तीन महीने तक 500 रुपये हर महीने डाले जाएंगे ताकि वे घर की जरूरतें पूरी कर सकें.

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