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This Article is From Feb 24, 2016

वेमुला और जेएनयू का मुद्दा कांग्रेस ने गरम किया पर सदन में रही पीछे

वेमुला और जेएनयू का मुद्दा कांग्रेस ने गरम किया पर सदन में रही पीछे
संसद में कहस के दौरान स्‍मृति ईरानी और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया
नई दिल्ली: कांग्रेस ने बेशक रोहित वेमुला और जेएनयू मामले को एक बड़े मुद्दे में बदलने की कोशिश की हो लेकिन संसद में वो दोनों मुद्दों पर पिछड़ती नज़र आ रही है। रोहित मामले को जहां मायावती ने पकड़ लिया है वहीं जेएनयू के मुद्दे पर लेफ़्ट हावी नज़र आ रही है।

राज्यसभा में मायावती ने रोहित वेमुला मामले पर शंखनाद कर दिया तो जेएनयू मामले को लेकर लेफ़्ट ने आगे बढ़ने की कोशिश की। इन दोनों मामलों को आगे बढ़ कर हाथ में लेने वाली कांग्रेस सदन में कहीं पीछे खड़ी नज़र आयी। यहां तक कि कांग्रेस ने दोनों मुद्दों के बीच पहले फर्क नहीं किया और फिर राज्यसभा में मायावती की मांग के साथ खड़ी नज़र आयी।

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने राज्यसभा में मायावती की मांग से मांग मिलाते हुए कहा कि दोनों मुद्दों को अलग कर दीजिए। जेएनयू पर आज और वेमुला पर कल बहस करा लीजिए। इस पर चेयर ने कहा कि नोटिस अलग-अलग देना होगा। फिर प्रकाश जावड़ेकर ने याद दिलाया कि दोनों मुद्दों पर साथ बहस की मांग का नोटिस देने वालों में ख़ुद आज़ाद भी शामिल हैं। मतलब कांग्रेस ने ही दोनों मुद्दों का घालमेल कर दिया।

मायावती को पहले मौक़ा ले उड़ने के मुद्दे पर बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि संसद में सबको साथ लेकर चलना है इसलिए कांग्रेस थोड़ी लचीली हुई है।

हैदराबाद यूनिवर्सिटी हो या जेएनयू सबसे पहले पहुंचने वालों में राहुल गांधी रहे। सदन में मामले उठाने की बात भी उन्होंने की। लेकिन जब मौक़ा आया तो पार्टी क्यों पीछे रह गई?

माना जा रहा है कि यूपी चुनाव में कांग्रेस मायावती के साथ हाथ मिलाने की कोशिश में जुटी है इसलिए दलित मुद्दे पर उन्हें आगे बढ़ने दिया। कांग्रेस सांसद हनुमंत राव का कहना है कि मायावती महिला हैं, चीफ़ मिनिस्टर थीं इसलिए ये मुद्दा पहले उन्हें उठाने दिया। जबकि कांग्रेस के ही पीएल पूनिया सफाई देते हैं कि संसदीय व्यवस्था में नोटिस दिया जाता है। जिसने पहले दे दिया उसने उठा लिया। लेकिन राहुल अन्याय के ख़िलाफ़ सबसे पहले खड़े हैं।

उधर लोकसभा में बीजेपी ने बड़ी सफाई से जेएनयू मामले को सीधे राष्ट्रवाद से जोड़ कर राहुल गांधी पर जम कर प्रहार किए। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस को इसी बात का डर था कि उसे कहीं राष्ट्रवाद के मुद्दे पर नुकसान न उठाना पड़ जाए। लेकिन राजीव शुक्ला इसे नहीं मानते। वे कहते हैं कांग्रेस मुद्दे के साथ खड़ी है, कौन पहले कौन बाद में इससे फर्क नहीं पड़ता, राष्ट्रवाद का सवाल है तो कांग्रेस सबसे आगे है। जेएनयू मामले में जो दोषी हों उनके पकड़ा जाए निर्दोष को न फंसाया जाए।

हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राष्ट्रवाद और पूरे जेएनयू की छवि पर प्रहार को अलग करने की कोशिशि की। लेकिन बीजेपी ने अपने नेताओं से जेएनयू मामले पर आक्रामक रहने का फ़रमान जारी किया है। ऐसे में जानकार मानते हैं कि अभिव्यक्ति की आज़ादी की वकालत करती कांग्रेस कहीं राष्ट्रवाद के उलट न दिखे इसलिए उसने अपना हाथ थोड़ा पीछे रखना ही बेहतर समझा। जब अनुराग ठाकुर राहुल गांधी पर सीधे प्रहार कर रहे थे तब राहुल का कुछ न बोलना भी पार्टी के हित के विरूद्ध गया।

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