
कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने केन्द्र की मोदी सरकार से मांग की है कि कोरोना वायरस के मामलों की चिकित्सा जांच का दायरा बढ़ाया जाए. साथ ही उन्होंने छोटे एवं मझोले कारोबारियों, किसानों एवं कामगारों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करने की मांग की. सोनिया ने एक बयान में कहा कि मास्क, सैनिटाइजर, खाने-पीने की वस्तुओं की बाजार में सुचारू ढंग से आपूर्ति बनाई रखी जाए. सोनिया ने कहा, ''130 करोड़ लोगों के देश में अब तक सिर्फ 15071 लोगों की जांच किये जाने की जानकारी सामने आई है. पर्याप्त समय, अन्य देशों से शुरुआती चेतावनियों और सबक के बावजूद, हमने अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल नहीं किया. इसे बदलना होगा. हमें निगरानी में रखे गए सभी लोगों की जांच करनी चाहिए और जांच का दायरा उन सभी लोगों तक ले जाना चाहिए जो कोरोनो वायरस से संक्रमित पाए लोगों के सीधे संपर्क में आए हैं.''
उन्होंने कहा कि मास्क, सैनिटाइजर एवं दूसरे स्वास्थ्य सुरक्षा उपकरणों, खाने-पीने की वस्तुओं की बाजार में निर्बाध आपूर्ति और उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. सोनिया ने कहा कि पृथक केंद्र, वेटिंलेटर और मेडिकल टीम के बारे में जानकारी की कमी दिख रही है और इसके लिए एक पोर्टल बनाने की जरूरत है जहां ये सारी जानकारियां एक साथ मिल सके.
उन्होंने कहा कि साथ ही इसके लिए अलग से बजट तय करने की भी जरूरत है. उन्होंने कोरोना वायरस का छोटे एवं मझोले कारोबारियों और मजदूरों पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को इनके लिए राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए.
सोनिया ने कहा, ‘‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम कारोबारी काफी मुश्किल में हैं. असाधारण समय में असाधारण कदमों की जरूरत होती है. क्षेत्रवार राहत पैकेज की घोषणा की जाए जिसमें कर अदायगी के समय को आगे बढाने, ब्याज में राहत और देनदारियों में भी समय की राहत देना शामिल हो.''
उन्होंने कहा कि दिहाड़ी मजदूरों और मनरेगा कामगारों को भी सरकार को वित्तीय राहत देनी चाहिए. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वेतनभोगी वर्ग के लिए सरकार को ईएमआई की समय सीमा को आगे बढ़ाने पर विचार करना चाहिए.
उन्होंने कोरोना वायरस से किसानों पर भी असर होने का दावा किया और कहा कि सरकार को कृषि क्षेत्र के लिए भी विशेष राहत पैकेज पर विचार करना चाहिए.
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