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This Article is From Apr 17, 2016

नीतीश को कांग्रेस ने दिया झटका, राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की बात नकारी!

नीतीश को कांग्रेस ने दिया झटका, राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की बात नकारी!
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: जेडीयू के कमान संभालने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को बीजेपी के खिलाफ सभी विपक्षी दलों को एकजुट होने की अपील की, लेकिन इसे लेकर कांग्रेस और वामपंथी दलों ने कोई खास उत्साह नहीं दिखाया है। नीतीश के इस बयान को 2019 के लोकसभा चुनाव की अभी से तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश में नीतीश का ये कहना कि अलग-अलग रहेंगे तो ये सभी का बुरा हाल कर देंगे इसलिए सबको मिलना ही पड़ेगा। इस अपील ने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। बिहार चुनाव में महागबंधन का प्रयोग सफल रहा और बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस को पसंद नहीं आया नीतीश का आईडिया
जाहिर है बिहार की कामयाबी ने नीतीश को पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन का आईडिया दिया है। लेकिन सवाल है कि कांग्रेस जैसी पार्टी जिसकी अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा है, क्या वो देशभर में ऐसे किसी महागठबंधन के झंडे तले आएगी। तभी तो कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी कहते है फिलहाल ये सुझाव अच्छा है, लेकिन 2019 में क्या होगा और किसकी अगुवाई में इसको लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

हालांकि कांग्रेस ने नीतीश की उस राय का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने देश को संघ मुक्त बनाए जाने की बात कही थी। कांग्रेस को भी नीतीश की तरह ही लगता है कि आरएसएस लोकतंत्र और देश की एकता के लिए खतरा है। लेकिन कांग्रेस ने कहा कि 2019 के चुनाव में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन से पहले पार्टियों का राष्ट्रीय अस्तित्व भी होना चाहिए।

जाहिर है कांग्रेस क्षेत्रीय पार्टियों से राज्यों में बेशक तालमेल करे लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर अपने वजूद को लेकर समझौता करने के मूड में नहीं है। उसे लगता है जिस तरह देश में बीजेपी से लोगों का मोह भंग हो रहा है, उससे लोगों को यही लगेगा कि कांग्रेस ही बीजेपी का विकल्प हो सकती है और सब उसकी अगुवाई में ही बीजेपी से मुकाबला करें।

'आप काल्पनिक गठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे हैं'
कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने कहा, 'नेतृत्व (नीतीश कुमार की अगुवाई में) की कोई चर्चा नहीं है। आप एक 'काल्पनिक गठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। मैंने आपसे पहले ही कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन' सभी पार्टियां राज्य विशेष की पार्टियां हैं। इस तरह की पार्टियों के साथ राज्य स्तर पर तालमेल है।'

नीतीश के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन बनाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर अहमद ने कहा, 'जब तक 2019 का चुनाव आएगा लोग खुद ही मोदी सरकार को बाहर का रास्ता दिखा देंगे और किसी गठबंधन की आवश्यकता नहीं होगी।' बता दें कि कांग्रेस बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है।

'संघ मुक्त भारत में नीतीश के साथ कांग्रेस'
आरएसएस के खिलाफ नीतीश की राय से सहमति जताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, 'देश को वाकई 'संघ मुक्त' और 'भाजपा मुक्त' बनाया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने देश के लोकतंत्र, एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा कर दिया है।'

अहमद ने कहा कि जहां तक गठबंधन का सवाल है तो वह राज्य विशेष को लेकर है, क्योंकि कुछ पार्टियों की ताकत एक राज्य में है, तो दूसरे पड़ोसी राज्य में नहीं है।

उन्होंने कहा, 'अब तक कोई राष्ट्रीय गठबंधन नहीं है। पार्टियों का राष्ट्रीय अस्तित्व होना चाहिए। ज्यादातर पार्टियों का अस्तित्व राज्यों में है और राज्यस्तरीय गठबंधन पहले ही हो रहा है।'

'जनता मोदीजी को खुद ही हटा देगी, गठबंधन की जरूरत नहीं'
यह पूछे जाने पर कि बीजेपी के खिलाफ वैकल्पिक गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए क्या राहुल गांधी के मुकाबले नीतीश कुमार को मैदान में उतारा जा रहा है तो उन्होंने कहा, 'हमारे बीच कोई लड़ाई नहीं है। हम सब एक साथ हैं। लेकिन हमारे एकजुट होने से पहले, देश की जनता मोदीजी को हटाने के लिए एकजुट हो जाएगी। समय और चीजें बदलती रहती हैं। लोहियाजी कांग्रेस के खिलाफ थे, लेकिन कांग्रेस और लोहिया के अनुयायी आज एक गठबंधन में एक साथ हैं। उसमें भारी बदलाव आया है।'

यह पूछे जाने पर कि क्या राष्ट्रीय स्तर पर नीतीश कुमार को पेश किया जा सकता है तो कांग्रेस नेता ने कहा, 'नीतीश जी बिहार में हमारे गठबंधन के एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं और अच्छा काम कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि उनका राज्य बेहतर करे और वह मजबूत बनें। वहां अच्छा लोक कल्याणकारी काम करें और हम सबको इसका समर्थन करना चाहिए।'

'नीतीश अच्छे मुख्यमंत्री'
उन्होंने कहा कि कांग्रेस कह रही है कि नीतीश कुमार एक 'अच्छे' मुख्यमंत्री हैं और लालू यादव जो कभी प्रतिद्वंद्वी थे उन्होंने भी इसे स्वीकार किया है। यह पूछे जाने पर कि क्या नीतीश में राष्ट्रीय नेता बनने की क्षमता है तो उन्होंने कहा कि वह केंद्र में रेल और कृषि मंत्री रह चुके हैं।

पटना में शनिवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'कांग्रेस मुक्त भारत' के नारे के जवाब में कहा था, 'संघ मुक्त भारत बनाने के लिए सभी गैर बीजेपी दलों को एक होना होगा।'

वामपंथी दलों को भी नीतीश का प्रस्ताव रास नहीं आ रहा
वही वामपंथी दल पहले से ही तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश करते रहे हैं, ऐसे में उन्हें भी महागठबंधन का ये प्रस्ताव रास नहीं आया। तभी तो सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि ऐसा कोई गठबंधन फिलहाल तो नहीं होने जा रहा है। हालांकि एनसीपी सुझाव को अच्छा बता रही है।

एनसीपी नेता तारिक अनवर ने कहा कि देश में सांप्रदायिकता बढ़ रही है और इससे मुकाबला करने के लिए सारी पार्टियों को एकजुट होने की जरूरत है। विपक्षी पार्टियों में नीतीश की एकता की कोशिशों पर बीजेपी चुटकी ले रही है। संसदीय कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि पहले गैर कांग्रेस के नाम पर इकट्ठा होते थे और अब गैर बीजेपी के नाम पर, लेकिन इससे हम पर कोई असर नही पड़ता है। इसकी शायद बड़ी वजह ये भी है कि बीजेपी के खिलाफ मुलायम की समाजवादी पार्टी और ममता की तुणमूल कांग्रेस भी नीतीश के साथ खड़े नहीं हैं।

- साथ में भाषा इनपुट

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