नई दिल्ली:
पांच साल की एक मासूम के साथ हुई क्रूरतापूर्ण दुष्कर्म की घटना के बाद राष्ट्रीय राजधानी में एक बार फिर प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है। शनिवार को पुलिस मुख्यालय, एम्स, केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास समेत विभिन्न स्थानों पर आक्रोशित लोग जुटे और जोरदार प्रदर्शन किया।
आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय पर आम आदमी पार्टी (एएपी) के सदस्यों, भारत का छात्र फेडरेशन (एसएफआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त नीरज कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शकारियों में कई महिला संगठनों की कार्यकर्ताएं भी शामिल थीं।
करीब 300 प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नीरज कुमार दिल्ली में दुष्कर्म रोकने में विफल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बच्ची के साथ क्रूरता के आरोपी मनोज कुमार को फांसी की सजा देने की मांग की। मनोज को शनिवार सवेरे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित उसकी ससुराल से गिरफ्तार किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालय परिसर में घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुख्यालय में जबरन घुसे एक प्रदर्शनकारी को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस मुख्यालय के बाहर और अंदर 200 से अधिक महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। किसी भी तरह की हिंसक गतिविधि को रोकने के लिए जल-तोप और आंसूगैस का बंदोबस्त किया गया है। एक अधिकारी ने कहा, "हमने शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की अपील की।"
वहीं, सरकार की भर्त्सना करते हुए एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "यह कानून तो बनाती है, लेकिन उसे लागू करना सुनिश्चित नहीं करती..और हम देख रहे हैं कि दुष्कर्म की वारदात दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।"
धुर वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) की कार्यकर्ता सुचेइता ने कड़े कानून और पुलिस के कामकाज में सुधार की मांग की।
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि निलंबित किए गए तीनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएं और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने सवाल उठाया, "सरकार यह साफ करे कि आखिर इस मामले में जांच में देरी क्यों हुई।"
एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा कि लगता है पुलिस ने 16 दिसंबर की भयानक घटना और रायसीना हिल्स पर विरोध के ऐतिहासिक मंजर से कुछ नहीं सीखा है।
प्रदर्शनकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाहर भी इकट्ठा हुए, जहां पीड़ित बच्ची का इलाज चल रहा है। यहां प्रदर्शनकारियों को काबू में रखने में पुलिस को काफी पसीना बहाना पड़ा।
एएपी के एक सदस्य ने कहा, "यदि सिर्फ केंद्रीय गृह मंत्री के आवास के आगे-पीछे सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था हो तो पुलिसकर्मी सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा कहां से कर सकेंगे।"
करीब 20 प्रदर्शनकारी 10 जनपथ स्थित सोनिया गांधी के आवास पर भी पहुंच गए, नारेबाजी की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से चले जाने के लिए मना लिया।
पूर्वी दिल्ली के जिस गांधी नगर इलाके में दुष्कर्म की वारदात हुई है वहां भी प्रदर्शन हुए। शाम तक कई दुकानें बंद रहीं और इलाके के निवासियों ने गांधी नगर थाने के सामने जमा होकर पुलिस आयुक्त का पुतला फूंका।
एएपी और कुछ एनजीओ के कंदील जुलूस को देखते हुए इंडिया गेट इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
इधर, एम्स के डॉक्टरों ने बलात्कार पीड़ित 5-वर्षीय बच्ची की हालत में सुधार बताया है। बच्ची को शुक्रवार शाम एम्स स्थानांतरित किया गया था।
एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डीके शर्मा ने बताया, बच्ची अब पहले से ठीक है। उसके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। वह होश में है और बात कर रही है। सभी महत्वपूर्ण अंग सामान्य अवस्था में हैं। उसे आईसीयू में नहीं रखा गया है, लेकिन नजदीकी निगाह रखी जा रही है।
शर्मा ने कहा, विस्तृत चिकित्सकीय जांच और सर्जरी की प्रक्रिया सामान्य एनिस्थिसिया में रात में 12 बजकर 15 मिनट पर पूरी हुई। उसे गंभीर चोट आई है। उसे आईवी फ्लूइड और एंटीबॉयोटिक्स पर रखा गया है। शर्मा के मुताबिक सुधार के लिए खास सर्जरी के लिए विस्तृत रणनीति बनानी पड़ेगी और संक्रमण पर नियंत्रण के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा।
पीड़ित को न्याय दिलाने और 15 अप्रैल को लापता हुई इस लड़की को ढूंढ़ने में मदद नहीं करने वाले पुलिसकर्मियों को दंडित किए जाने की मांग को लेकर शनिवार सुबह एम्स और पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन हुए। आईटीओ पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी दिल्ली पुलिस के कमिश्नर नीरज कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही ये लोग दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से भी इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे हैं।
एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा, 16 दिसंबर की घटना के बाद लगता है पुलिस ने इससे कुछ नहीं सीखा है। हम हर दिन इस तरह की दो या तीन घटनाओं के बारे में सुनते हैं। यह कब तक जारी रहेगा? आरोपियों को जरूर सजा मिलनी चाहिए और पुलिस पर सतर्क रहने का दबाव बढ़ाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा था कि वह बच्ची के साथ हुए बर्बर कृत्य से 'अत्यंत दुखी' हैं। यह लोमहषर्क घटना पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर में हुई थी। लड़की 15 अप्रैल की शाम से लापता थी। उसे उस इमारत के भूतल से बचाया गया, जहां उसका परिवार रह रहा था।
(इनपुट भाषा , आईएएनएस से भी)
आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय पर आम आदमी पार्टी (एएपी) के सदस्यों, भारत का छात्र फेडरेशन (एसएफआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त नीरज कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शकारियों में कई महिला संगठनों की कार्यकर्ताएं भी शामिल थीं।
करीब 300 प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नीरज कुमार दिल्ली में दुष्कर्म रोकने में विफल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बच्ची के साथ क्रूरता के आरोपी मनोज कुमार को फांसी की सजा देने की मांग की। मनोज को शनिवार सवेरे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित उसकी ससुराल से गिरफ्तार किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालय परिसर में घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुख्यालय में जबरन घुसे एक प्रदर्शनकारी को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस मुख्यालय के बाहर और अंदर 200 से अधिक महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। किसी भी तरह की हिंसक गतिविधि को रोकने के लिए जल-तोप और आंसूगैस का बंदोबस्त किया गया है। एक अधिकारी ने कहा, "हमने शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की अपील की।"
वहीं, सरकार की भर्त्सना करते हुए एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "यह कानून तो बनाती है, लेकिन उसे लागू करना सुनिश्चित नहीं करती..और हम देख रहे हैं कि दुष्कर्म की वारदात दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।"
धुर वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) की कार्यकर्ता सुचेइता ने कड़े कानून और पुलिस के कामकाज में सुधार की मांग की।
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि निलंबित किए गए तीनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएं और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने सवाल उठाया, "सरकार यह साफ करे कि आखिर इस मामले में जांच में देरी क्यों हुई।"
एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा कि लगता है पुलिस ने 16 दिसंबर की भयानक घटना और रायसीना हिल्स पर विरोध के ऐतिहासिक मंजर से कुछ नहीं सीखा है।
प्रदर्शनकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाहर भी इकट्ठा हुए, जहां पीड़ित बच्ची का इलाज चल रहा है। यहां प्रदर्शनकारियों को काबू में रखने में पुलिस को काफी पसीना बहाना पड़ा।
एएपी के एक सदस्य ने कहा, "यदि सिर्फ केंद्रीय गृह मंत्री के आवास के आगे-पीछे सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था हो तो पुलिसकर्मी सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा कहां से कर सकेंगे।"
करीब 20 प्रदर्शनकारी 10 जनपथ स्थित सोनिया गांधी के आवास पर भी पहुंच गए, नारेबाजी की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से चले जाने के लिए मना लिया।
पूर्वी दिल्ली के जिस गांधी नगर इलाके में दुष्कर्म की वारदात हुई है वहां भी प्रदर्शन हुए। शाम तक कई दुकानें बंद रहीं और इलाके के निवासियों ने गांधी नगर थाने के सामने जमा होकर पुलिस आयुक्त का पुतला फूंका।
एएपी और कुछ एनजीओ के कंदील जुलूस को देखते हुए इंडिया गेट इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
इधर, एम्स के डॉक्टरों ने बलात्कार पीड़ित 5-वर्षीय बच्ची की हालत में सुधार बताया है। बच्ची को शुक्रवार शाम एम्स स्थानांतरित किया गया था।
एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डीके शर्मा ने बताया, बच्ची अब पहले से ठीक है। उसके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। वह होश में है और बात कर रही है। सभी महत्वपूर्ण अंग सामान्य अवस्था में हैं। उसे आईसीयू में नहीं रखा गया है, लेकिन नजदीकी निगाह रखी जा रही है।
शर्मा ने कहा, विस्तृत चिकित्सकीय जांच और सर्जरी की प्रक्रिया सामान्य एनिस्थिसिया में रात में 12 बजकर 15 मिनट पर पूरी हुई। उसे गंभीर चोट आई है। उसे आईवी फ्लूइड और एंटीबॉयोटिक्स पर रखा गया है। शर्मा के मुताबिक सुधार के लिए खास सर्जरी के लिए विस्तृत रणनीति बनानी पड़ेगी और संक्रमण पर नियंत्रण के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा।
पीड़ित को न्याय दिलाने और 15 अप्रैल को लापता हुई इस लड़की को ढूंढ़ने में मदद नहीं करने वाले पुलिसकर्मियों को दंडित किए जाने की मांग को लेकर शनिवार सुबह एम्स और पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन हुए। आईटीओ पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी दिल्ली पुलिस के कमिश्नर नीरज कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही ये लोग दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से भी इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे हैं।
एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा, 16 दिसंबर की घटना के बाद लगता है पुलिस ने इससे कुछ नहीं सीखा है। हम हर दिन इस तरह की दो या तीन घटनाओं के बारे में सुनते हैं। यह कब तक जारी रहेगा? आरोपियों को जरूर सजा मिलनी चाहिए और पुलिस पर सतर्क रहने का दबाव बढ़ाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा था कि वह बच्ची के साथ हुए बर्बर कृत्य से 'अत्यंत दुखी' हैं। यह लोमहषर्क घटना पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर में हुई थी। लड़की 15 अप्रैल की शाम से लापता थी। उसे उस इमारत के भूतल से बचाया गया, जहां उसका परिवार रह रहा था।
(इनपुट भाषा , आईएएनएस से भी)
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