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This Article is From Oct 24, 2018

कांग्रेस का BJP पर हमला- CBI में अभियुक्त के समर्थन में खड़ी है सरकार, केंद्र पर थोपा गुजरात मॉडल

सीबीआई में जारी विवाद( CBI WAR) के बाद डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर से कामकाज छीने जाने के बाद कांग्रेस ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कांफ्रेंस कर बीजेपी पर हमला बोला.  

कांग्रेस का BJP पर हमला- CBI में अभियुक्त के समर्थन में खड़ी है सरकार, केंद्र पर थोपा गुजरात मॉडल
प्रतीकात्मक तस्वीर.
नई दिल्ली: सीबीआई में भारी विवाद( CBI WAR) के बाद दर्जन भर अफसरों के ट्रांसफर हुए. इसमें एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना से भी कामकाज छीन कर छुट्टी पर भेज दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कांफ्रेंस कर बीजेपी पर हमला बोला. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गैरकानूनी और न्याय विरुद्ध तरीके से मोदी सरकार की ओर से देश की संस्थाओं को आइसीयू में धकेल दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री को 'रफेलोफोबिया' हो गया है.राफेल घोटाले की पोल खुलने से डरे हुए बीजेपी नेताओं ने गुजरात मॉडल केंद्र में थोप दिया है. CBI को कहीं का नहीं छोड़ा.जिस तरह CBI डाइरेक्टर को हटाया गया है वो गैर कानूनी और असंवैधानिक है.

CBI डायरेक्टर को हटा कर सरकार ने उच्चतम न्यायालय को नकार दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र CBI की जरूरत बताई है. CBI एक्ट में लिखा है कि डायरेक्टर का कार्यकाल दो वर्षों का होगा.सरकार अभियुक्त के समर्थन में खड़ी है जबकि अभियोजक को हटा दिया है.जबकि आरोप उगाही के हैं. प्रधानमंत्री मोदी सीधा सीबीआई के अधिकारियों को बुलाते हैं और एक फौजदारी मामले में सीधी दखल देते हैं. जबकि मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी CBI को लेकर कई तरह की बातें करते थे. यूपीए सरकार में एफिडेविट देखा गया था तो इस्तीफा मांगा गया था.

CVC के पास CBI डायरेक्टर को नियुक्ति या हटाने का कोई अधिकार नहीं है. CVC के पास नया पावर कैसे आ गया? CVC केवल सुपरवाइजरी बॉडी है. CVC गुमराह कर रहा है. इस संस्थान का भी दुरुपयोग किया जा रहा है.CBI डायरेक्टर की नियुक्ति, हटाने और ट्रांसफर का अधिकार कमिटी को है.हटाने के लिए CBI की बैठक बुलाइए. लेकिन ऐसा करने से सरकार डरती है.

ये बराबरी का मामला नहीं है. एक व्यक्ति हैं जिन पर 2014 के पहले से आरोप हैं. उनकी नियुक्ति के वक्त भी आरोप लगे. ताजा आरोप के बाद DSP की एक गिरफ्तारी होती है. आपकी भी गिरफ्तारी हो जाती, इसलिए आप कोर्ट गए.इसके बाद आरोपी अभियोजक पर आरोप लगाता है.. अगर चोर कोतवाल पर आरोप लगा दे तो क्या कोतवाल और चोर बराबर हो जाएंगे?

ये इसलिए किया गया ताकि अपने चहेते को बचाया जाए और अपने गलत कारनामों को ढका जाए.आशंका नहीं पूरा विश्वास है कि हर वक्त असंवैधानिक कार्य हो रहा है.. एक गलती को ठीक करने के लिए दो गलती की जा रही है.कांग्रेस के पास सारे विकल्प खुले हैं

वीडियो-सीबीआई डायरेक्टर पद से आलोक वर्मा को नहीं हटा सकती सरकारः प्रशांत भूषण


 

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