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This Article is From Jun 18, 2014

मोदी सरकार द्वारा इस्तीफे के दबाव का यूपीए कार्यकाल में नियुक्त कई राज्यपाल कर रहे हैं विरोध

मोदी सरकार द्वारा इस्तीफे के दबाव का यूपीए कार्यकाल में नियुक्त कई राज्यपाल कर रहे हैं विरोध
फाइल फोटो
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र के राज्यपाल के शंकरनारायणन पद से इस्तीफा देने के केन्द्र के दबाव का बुधवार को प्रतिरोध करते नजर आए। अन्य राज्यों के कुछ राज्यपाल भी ऐसा ही रुख अपनाते दिख रहे हैं।

केंद्र में सरकार बदलने के परिप्रेक्ष्य में संप्रग सरकार के कार्यकाल में नियुक्त कुछ राज्यपालों को इस्तीफे के लिए केन्द्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी द्वारा कहे जाने के दो दिन बाद राज्यपालों के इस्तीफे हासिल करने को लेकर दबाव बढ़ा दिया गया है, लेकिन निकट भविष्य में कोई नतीजा सामने आता नहीं दिख रहा है।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन ने आज कहा कि उन्होंने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। शंकरनारायणन ने कहा कि यदि निर्णय लेने वाला कोई 'उचित प्राधिकार' उनसे इस्तीफा देने को कहता है तो वह ऐसा करने के बारे में सोचेंगे।

शंकरनारायणन ने कहा, 'केन्द्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने मुझे पिछले हफ्ते दो बार फोन किया। मैंने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया, राज्यपाल का पद संवैधानिक होता है। वह राष्ट्रपति का प्रतिनिधि होता है, उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने मुझे ये पद छोड़ने के लिए लिखित में नहीं कहा।'

उन्होंने एक मलयालम टीवी चैनल से कहा कि लोकतंत्र में कोई भी पद स्थायी नहीं होता। यदि निर्णय लेने वाला कोई उचित प्राधिकार 'मुझे (इस्तीफा देने को) कहता है तो मैं निश्चित रूप से उस पर विचार करूंगा।'

82 वर्षीय शंकरनारायणन 22 जनवरी 2010 से महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। उन्होंने 7 मई 2012 को दूसरी बार प्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ ली थी।

इस बीच कर्नाटक के राज्यपाल एच आर भारद्वाज ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और इस्तीफे के बारे में पहेलियों में बात की। अटकलें हैं कि नगालैंड के राज्यपाल अश्विनी कुमार जल्द ही अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।

कुमार ने संप्रग शासन के समय नियुक्त राज्यपालों को बदलने के केन्द्र के कदम के प्रति विरोध जताते हुए हैरत जताई कि क्या अब राज्यों में किसी रंग विशेष के राज्यपाल सरकार चाहती है।
उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि विभिन्न राज्यों में राज्यपालों को बदलने के पीछे वजह निश्चित तौर पर राजनीतिक है। एक नई सरकार आई है और 'मैं मानता हूं कि वह चाहती है कि राज्यों में एक रंग विशेष के राज्यपाल हों।'

उधर, इस्तीफे से इंकार करते हुए भारद्वाज ने कहा कि राज्यपाल तब तक इस्तीफा नहीं दे सकते जब तक उनकी जगह कोई अन्य न आ जाए।

उन्होंने कहा कि संविधान में प्रावधान है कि जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति न हो जाए, वर्तमान राज्यपाल पद पर बना रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कल मुलाकात का समय मांगने वाले भारद्वाज ने कहा कि राज्यपाल इस्तीफा नहीं दे सकते।

कल उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी एल जोशी ने इस्तीफा दे दिया था क्योंकि मोदी सरकार ने पूर्व की सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपालों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

भारद्वाज ने कहा कि उनकी पिछले पांच साल से गृह सचिव से कोई बात नहीं हुई। किसी गृह सचिव ने उनसे बात नहीं की।

समझा जाता है कि केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित और चार अन्य राज्यपालों से केन्द्र में सरकार के बदलने के परिप्रेक्ष्य में हटने को कहा गया है।

समझा जाता है कि जिन राज्यपालों से गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने बात की, उनमें शीला दीक्षित, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन और अश्विनी कुमार हैं। गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल से भी हटने को कहा जा सकता है।

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