
नई दिल्ली:
दिल्ली सरकार ने अफसरों को अपने पक्ष में रखने के लिए बुधवार को एक साथ कई तीर चला दिए। सबसे पहले उसने दिल्ली सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी सर्विसेज रहे अनिन्दो मजूमदार को आखिरकार नया विभाग देते हुए दिल्ली फाइनेंसियल कॉरपोरेशन का सीएमडी नियुक्त कर दिया।
अनिन्दो मजूमदार ही वह अधिकारी हैं, जिन्होंने शकुंतला गामलिन को एलजी के आदेश पर कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया जबकि दिल्ली सरकार का कहना था कि ये नियुक्ति बिना उसकी सहमति के हुई और नियुक्ति के लिए अनिन्दो मजूमदार को पद से हटा दिया गया।
इसके बाद एलजी ने दिल्ली सरकार का आदेश रद्द करने और मजूमदार को बहाल करने का आदेश दिया, लेकिन सरकार ने मानने से मना कर दिया और मजूमदार के दफ्तर पर ताला जड़ दिया था।
एलजी ने बाद में फिर आदेश दिया, लेकिन सरकार ने कह दिया की एलजी को अधिकार ही नहीं ऐसे आदेश देने का और जब विवाद लंबा चला तो गृह मंत्रालय नोटिफिकेशन ले आया।
अफसरों में नाराज़गी और दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिससे दिल्ली सरकार इनकार नहीं कर पाई और फिर लगातार अफसरों लिखित आदेश देने के साथ-साथ भरोसा बनाने के लिए अफसरों के साथ मीटिंग शुरू हो गई।
बुधवार को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया में दिल्ली विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि अफसर एक तरह से चक्की के दो पाट के बीच पिस्ता हुआ सा महसूस कर रहे हैं और हम अपनी तरफ से अफसरों के लिए जो कर सकते हैं कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार परेशान कर रही है।
यही नहीं दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के किसी अफसर को डरने की ज़रूरत नहीं है। केजरीवाल ने कहा कि "इस तरह की बातें चल रही हैं भ्रम फैलाया जा रहा है जैसे अगर अफसर केंद्र की बात नहीं मानेंगे तो उनको तनख्वाह नहीं मिलेगी, आप अपना काम ईमानदारी से करते जाएं, मजाल है कोई आपकी तनख्वाह रोक दे? हम देंगे आपको तनख्वाह ये विधानसभा देगी आपको तनख्वाह।"
दिल्ली सरकार जानती है कि वह चाहे कुछ भी करे या कहे लेकिन अगर अफसरशाही उसका साथ नहीं देगी तो सरकार चलती भले ही रहे, लेकिन सुशासन और दिल्ली को मॉडल शहर बनाने का दावा वह पूरा नहीं कर पाएगी। और वैसे भी आम आदमी पार्टी ने अपने दुश्मन इतने बनाए हुए हैं कि अगर अफसरों से नहीं पट पाई तो समझिये कि बाकी दुश्मन से ज़्यादा नुकसान कहीं अफसर ही न कर दें।
अनिन्दो मजूमदार ही वह अधिकारी हैं, जिन्होंने शकुंतला गामलिन को एलजी के आदेश पर कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया जबकि दिल्ली सरकार का कहना था कि ये नियुक्ति बिना उसकी सहमति के हुई और नियुक्ति के लिए अनिन्दो मजूमदार को पद से हटा दिया गया।
इसके बाद एलजी ने दिल्ली सरकार का आदेश रद्द करने और मजूमदार को बहाल करने का आदेश दिया, लेकिन सरकार ने मानने से मना कर दिया और मजूमदार के दफ्तर पर ताला जड़ दिया था।
एलजी ने बाद में फिर आदेश दिया, लेकिन सरकार ने कह दिया की एलजी को अधिकार ही नहीं ऐसे आदेश देने का और जब विवाद लंबा चला तो गृह मंत्रालय नोटिफिकेशन ले आया।
अफसरों में नाराज़गी और दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिससे दिल्ली सरकार इनकार नहीं कर पाई और फिर लगातार अफसरों लिखित आदेश देने के साथ-साथ भरोसा बनाने के लिए अफसरों के साथ मीटिंग शुरू हो गई।
बुधवार को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया में दिल्ली विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि अफसर एक तरह से चक्की के दो पाट के बीच पिस्ता हुआ सा महसूस कर रहे हैं और हम अपनी तरफ से अफसरों के लिए जो कर सकते हैं कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार परेशान कर रही है।
यही नहीं दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के किसी अफसर को डरने की ज़रूरत नहीं है। केजरीवाल ने कहा कि "इस तरह की बातें चल रही हैं भ्रम फैलाया जा रहा है जैसे अगर अफसर केंद्र की बात नहीं मानेंगे तो उनको तनख्वाह नहीं मिलेगी, आप अपना काम ईमानदारी से करते जाएं, मजाल है कोई आपकी तनख्वाह रोक दे? हम देंगे आपको तनख्वाह ये विधानसभा देगी आपको तनख्वाह।"
दिल्ली सरकार जानती है कि वह चाहे कुछ भी करे या कहे लेकिन अगर अफसरशाही उसका साथ नहीं देगी तो सरकार चलती भले ही रहे, लेकिन सुशासन और दिल्ली को मॉडल शहर बनाने का दावा वह पूरा नहीं कर पाएगी। और वैसे भी आम आदमी पार्टी ने अपने दुश्मन इतने बनाए हुए हैं कि अगर अफसरों से नहीं पट पाई तो समझिये कि बाकी दुश्मन से ज़्यादा नुकसान कहीं अफसर ही न कर दें।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
अरविंद केजरीवाल, नजीब जंग, उपराज्यपाल, केंद्र सरकार, Arvind Kejirwal, Najeeb Jung, LG, Central Government