
अरुण जेटली (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि भारत नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नेपाल को अधिक मात्रा में सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने को तैयार है. साथ ही उन्होंने नेपाल से कहा कि वह अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिए कानून तथा विनियामकीय ढांचे को और अनुकूल बनाए.
काठमांडू में कल 'नेपाल निवेश सम्मेलन 2017' को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि अपर करनाली और अरण तीन बिजली परियोजनाओं के जल्द पूर्ण होने के बाद नेपाल बिजली का निर्यात भारत को कर सकेगा.'' उन्होंने कहा कि वन भूमि और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों से इन परियोजनाओं में देरी हुई है और इनका जल्द से जल्द निपटान किया जाना चाहिए. नेपाल के कुल व्यापार में भारत का हिस्सा 66 प्रतिशत है. भारत उसका सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. इस पड़ोसी देश में कुल एफडीआई प्रवाह में भारत का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत है.
नेपाल के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों मसलन पनबिजली, पारेषण लाइन, सड़क और रेल नेटवर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन तथा सिंचाई में भारतीय निवेश किया गया है.
जेटली ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि नेपाल को द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के गहरे संबंध हैं जिससे व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में गहन सहयोग संभव हुआ है.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
काठमांडू में कल 'नेपाल निवेश सम्मेलन 2017' को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि अपर करनाली और अरण तीन बिजली परियोजनाओं के जल्द पूर्ण होने के बाद नेपाल बिजली का निर्यात भारत को कर सकेगा.'' उन्होंने कहा कि वन भूमि और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों से इन परियोजनाओं में देरी हुई है और इनका जल्द से जल्द निपटान किया जाना चाहिए. नेपाल के कुल व्यापार में भारत का हिस्सा 66 प्रतिशत है. भारत उसका सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. इस पड़ोसी देश में कुल एफडीआई प्रवाह में भारत का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत है.
नेपाल के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों मसलन पनबिजली, पारेषण लाइन, सड़क और रेल नेटवर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन तथा सिंचाई में भारतीय निवेश किया गया है.
जेटली ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि नेपाल को द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के गहरे संबंध हैं जिससे व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में गहन सहयोग संभव हुआ है.
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