
आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, 'अगर पीएम मोदी (Narendra Modi) इस बात से सहमत हैं कि अल्पसंख्यक डर में जीते हैं तो उन्हें उन लोगों के बारे में जानना चाहिए जिन्होंने अखलाक को मारा और वो चुनावी जनसभा में सबसे आगे बैठे थे. अगर पीएम सोचते हैं कि मुस्लिम डर में जीते हैं तो क्या वो उन गैंगों पर लगाम लगाएंगे जो गाय के नाम पर मुस्लिमों की हत्या करते हैं, पीटते हैं और फिर वीडियो बनाकर नीचा दिखाते हैं.' ओवैसी ने कहा, 'अगर मुस्लिम वास्तव में डर में जीता है तो क्या पीएम हमें बता सकते हैं कि 300 सांसदों में उनकी पार्टी के कितने मुस्लिम सांसद हैं जो लोकसभा के लिए चुने गए. यह पाखंड और अंतर्विरोध है जिसका पीएम मोदी और उनकी पार्टी पिछले 5 साल से प्रयोग कर रही है.'
A Owaisi: If Muslims seriously live in fear can the PM tell us, out of the 300 odd MPs, how many Muslim MPs he has in own party who got elected from Lok Sabha? This is the hypocrisy & contradiction which the PM & his party is practicing from last 5 years. https://t.co/yMHLrFIXV4
— ANI (@ANI) May 26, 2019
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बता दें कि भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का नेता चुने जाने के बाद अपने 75 मिनट के भाषण में मोदी ने अल्पसंख्यकों का भी विश्वास जीतने की जरूरत बताते हुए कहा था कि वोट-बैंक की राजनीति में भरोसा रखने वालों ने अल्पसंख्यकों को डर में जीने पर मजबूर किया, हमें इस छल को समाप्त कर सबको साथ लेकर चलना होगा. पीएम मोदी ने कहा था, '2014 में मैंने कहा था, मेरी सरकार इस देश के दलित, पीड़ित, शोषित, आदिवासी को समर्पित है. मैं आज फिर से कहना चाहता हूं कि पांच साल उस मूलभूत बात से अपने आपको ओझल नहीं होने दिया. 2014 से 2019 हमने प्रमुख रूप से गरीबों के लिए चलाई है. और आज मैं ये गर्व से कह सकता हूं कि ये सरकार गरीबों ने बनाई. गरीबों के साथ जो छल चल रहा था, उस छल में हमने छेद किया है और सीधे गरीब के पास पहुंचे हैं.'
उन्होंने कहा था, 'देश पर इस गरीबी का जो टैग लगा है, उससे देश को मुक्त करना है. गरीबों के हक के लिए हमें जीना-जूझना है, अपना जीवन खपाना है. गरीबों के साथ जैसा छल हुआ, वैसा ही छल देश की माइनॉरिटी के साथ हुआ है. अच्छा होता कि माइनॉरिटी की शिक्षा, स्वास्थ्य की चिंता की जाती. 2019 में आपसे अपेक्षा करने आया हूं कि हमें इस छल को भी छेद करना है. हमें विश्वास जीतना है. संविधान को साक्षी मानकर हम संकल्प लें कि देश के सभी वर्गों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है. पंथ-जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए.'
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