
यूरोप में कोरोना के टीकाकरण (COVID-19 Vaccine Shots In Europe) के बाद 71 लोगों की मौत का वैक्सीन से कोई संबंध नहीं पाया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन लोगों की मौत कोरोना की वैक्सीन (Vaccination Deaths) लेने की वजह से हुई हो, ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है.स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि कोविड-19 वैक्सीन लेने के बाद ज्यादातर जो मौतें हुई भी हैं, वे बेहद बुजुर्ग लोगों की हुई हैं, जो पहले ही तमाम गंभीर रोगों से जूझ रहे हैं.
टीकाकरण के बाद मरने वालों में ज्यादातर बुजुर्ग और बीमार
नार्वे में पिछले हफ्ते तब हड़कंप मच गया था, जब 20 हजार से ज्यादा सेवानिवृ्त्त होम रेजीडेंट को कोरोना का टीका दिया गया था, उनमें से 33 लोगों की मौत हो गई थी. इन लोगों को फाइजर-बायोनटेक की वैक्सीन लगाई गई थी. नार्वे इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार, इनमें से 13 की उम्र बेहद ज्यादा थी, साथ ही वे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. एजेंसी का कहना है कि बुखार, उल्टी-दस्त जैसे वैक्सीनेशन के सामान्य प्रभावों ने बुजुर्ग और बीमार लोगों की परेशानी शायद बढ़ गई हो.
फ्रांस, स्वीडन में भी सामने आए मामले
टीकाकरण के बाद मौतों की इन खबरों से वैक्सीन विरोधी मुहिम भी दुनिया में तेज हो गई है.फ्रांस में 8 लाख लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है और 9 लोगों की मौत हुई है. लेकिन ये सभी काफी बुजुर्ग और काफी गंभीर रोगों से ग्रस्त थे.नेशनल मेडिसिन्स एजेंसी एएनएसएम का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई चिकित्सकीय सबूत नहीं मिला है कि वैक्सीन के कारण किसी की मौत हुई हो. स्वीडन में भी 13 और आइसलैंड में 7 लोगों की मौत हुई , लेकिन इनमें भी टीकाकरण से कोई संबंध नहीं पाया गया.
यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी ने भी दी हरी झंडी
पुर्तगाल में भी टीका लेने के दो दिन बाद एक हेल्थ केयर वर्कर की मौत हो गई, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद इसका टीकाकरण से कोई रिश्ता नहीं पाया गया. फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, टीकाकरण के बाद निगरानी के दिनों में मौत के 71 मामले हुए हैं, लेकिन इनका कोरोना टीकाकरण से कोई ताल्लुक नहीं मिला है.यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी का कहना है कि फाइजर के टीके कोमिरंटी से जुड़े कोई चिंताजनक साक्ष्य नहीं मिले हैं.
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