क्या आप भी इंटरनेट देखकर घर बैठे ही योग करते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि योग तो वे घर पर भी कर ही सकते हैं, क्योंकि इससे कोई नुकसान तो होगा नहीं. लेकिन हकीकत यह है कि अधूरी जानकारी और बिना किसी ट्रेनर के अपनी मर्जी से आसन खींचने की आदत कई बार फायदे की जगह शरीर को ऐसा नुकसान पहुंचा देती है जिसे ठीक होने में महीनों लग जाते हैं. कभी कमर में लचक आ जाती है तो कभी घुटने जवाब दे जाते हैं.
इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी साफ आगाह किया है कि योग तभी तक अमृत है जब तक इसे सही समझ और कायदे से किया जाए. अगर आप रील्स या किताबों की नकल करके शरीर पर जबरन जोर डालेंगे या क्षमता से ज्यादा सांस रोकने की जिद करेंगे, तो यह सेहत सुधारने के बजाय सीधे अस्पताल का रास्ता दिखा सकता है.
रील्स देखकर आसन दोहराने की जिद क्यों है गलत?
हर इंसान की हड्डियों की बनावट, लचीलापन और शारीरिक ताकत बिल्कुल अलग होती है. जो आसन सामने वाला सेकंडों में आसानी से कर रहा है, जरूरी नहीं कि आपका बदन भी पहले ही दिन उसके लिए तैयार हो.
जब आप बिना तैयारी के शरीर को जबरदस्ती मोड़ते हैं या झटका देते हैं, तो मांसपेशियां खिंच जाती हैं और लिगामेंट फटने का खतरा बढ़ जाता है.
अगर किसी भी आसन को करते हुए शरीर के किसी हिस्से में अचानक तेज दर्द की सुई जैसी चुभन या टीस उठे, तो उसे उसी सेकंड छोड़ देना चाहिए. दर्द को ताकत समझने की भूल सबसे ज्यादा भारी पड़ती है.
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पद्मासन से लेकर शीर्षासन तक में छिपे हैं खतरे
अक्सर लोग पद्मासन यानी कमल मुद्रा को बहुत मामूली समझते हैं. लेकिन अगर आपके घुटनों, टखनों या कूल्हों में पहले से दर्द है और आप जबरन पैर खींचकर जांघों पर चढ़ाने की कोशिश करेंगे, तो घुटने की गद्दी और लिगामेंट में गंभीर मोच आ सकती है.
वहीं शीर्षासन और सर्वांगासन जैसे उल्टे लटकने वाले आसनों में तो थोड़ी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है. इन आसनों में पूरे शरीर का भारी वजन सीधी गर्दन की नाजुक हड्डियों यानी सर्वाइकल स्पाइन पर आ जाता है. अगर संतुलन बिगड़ा या तकनीक गलत हुई, तो गर्दन की डिस्क खिसक सकती है, नसें दब सकती हैं और बात गर्दन के फ्रैक्चर तक पहुंच सकती है.
अगर आपको चक्कर आते हैं, माइग्रेन है, बीपी की समस्या है, हाल में कोई सर्जरी हुई है या पीरियड्स और प्रेग्नेंसी का समय है, तो ऐसे कठिन आसन भूलकर भी नहीं करने चाहिए.
प्राणायाम में सांस रोकने की जिद बिगाड़ सकती है खेल
ज्यादातर लोग मानते हैं कि सांसों की कसरत में कोई खतरा नहीं होता, लेकिन यहां भी संभलना जरूरी है.
अपनी क्षमता से ज्यादा देर तक सांस अंदर रोककर रखना यानी कुंभक करना दिमाग तक जाने वाली ऑक्सीजन की सप्लाई को अचानक रोक सकता है. इससे सिर चकराने लगता है और इंसान गश खाकर गिर भी सकता है.
सांस रोकने का नियम इतना सहज होना चाहिए कि जब आप उसे बाहर छोड़ें, तो सांस बिना किसी घबराहट या झटके के बिल्कुल सामान्य रफ्तार से बाहर आए.
अगर दिल की बीमारी, मिर्गी, हर्निया की शिकायत है या गर्भावस्था का दौर है, तो बिना किसी सर्टिफाइड योग गुरु के सांस रोकने वाले अभ्यास कतई न करें.
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जल नेति और सूत्र नेति में बरतें पूरी सावधानी
नाक और सांस की नली साफ करने के लिए जल नेति और सूत्र नेति को बहुत बढ़िया माना जाता है, पर इनमें की गई छोटी सी लापरवाही गंभीर इन्फेक्शन का कारण बन जाती है.
जल नेति करते वक्त मुंह खुला रखकर सिर्फ मुंह से ही सांस लें. अगर गलती से भी नाक से सांस खींच ली, तो पानी सीधे साइनस की नसों या कान के पर्दे तक चला जाएगा, जिससे असहनीय सिरदर्द और मवाद का खतरा बन जाता है.
नेति का लोटा हटाने के तुरंत बाद हल्का कपालभाति करके नाक में बचा सारा पानी बाहर निकालना जरूरी है, वरना अटका हुआ पानी जुकाम और भारी कफ बना देगा. नल का सीधा ठंडा या बहुत खौलता पानी कभी इस्तेमाल न करें, हमेशा हल्का गुनगुना उबला पानी और सही मात्रा में सेंधा नमक ही मिलाएं.
सूत्र नेति करते समय धागे या कैथेटर को झटके से नाक में डालने की गलती न करें, इससे नाक की नाजुक खाल छिल सकती है और खून बह सकता है. बिना तेल या गुनगुने पानी की चिकनाई लगाए सूखा धागा कभी अंदर न डालें.
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