आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिमाग हर पल सैकड़ों विचारों, जिम्मेदारियों और चिंताओं से घिरा रहता है. ऐसे में मानसिक शांति पाना और किसी काम पर पूरी तरह एकाग्र होना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. अगर आप भी दिनभर की उलझनों के बाद रात को करवटें बदलते रहते हैं या ध्यान भटकने से परेशान हैं, तो हठयोग की प्राचीन पद्धति 'त्राटक' आपके लिए एक अचूक समाधान साबित हो सकती है. यह एक ऐसी सूक्ष्म साधना है, जो भटकते हुए मन पर लगाम लगाकर उसे एक बिंदु पर स्थिर करना सिखाती है.
त्राटक क्रिया क्या चीज है?
हठयोग के षटकर्म यानी शरीर और मन की शुद्धि के छह तौर-तरीकों में त्राटक का नाम सबसे ऊपर आता है. इसमें करना बस इतना होता है कि किसी एक स्थिर वस्तु, जैसे जलते हुए दीये की बत्ती की लौ, दीवार पर बना कोई काला बिंदु या किसी प्रतीक पर बिना पलकें गिराए लगातार नजर टिकानी होती है. जब तक आंखों के कोरों से पानी न छलक आए, तब तक टकटकी बांधकर उसी एक जगह देखना पड़ता है. ऊपर से देखने में यह सिर्फ आंखों की कसरत लग सकती है, पर भीतर से यह मन की सारी उथल-पुथल को एक झटके में शांत कर देती है.
आयुष मंत्रालय की नजर में क्यों खास है त्राटक?
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी मानता है कि त्राटक आंखों की रोशनी और दिमाग के सुकून के लिए बेहद मुफीद अभ्यास है. अगर इसे रोज के नियम में बांध लिया जाए, तो धुंधली नजर साफ होने लगती है, दिमागी थकान छूमंतर हो जाती है और रात को बिना किसी दवा के बहुत गहरी और मीठी नींद आने लगती है.
अनिद्रा और तनाव से राहत कैसे दिलाता है यह अभ्यास?
आजकल जिसे देखो वही इनसोमनिया यानी नींद न आने और डिप्रेशन का रोना रो रहा है. इसकी असली जड़ वह दिमागी रेडियो है जो रात को बत्ती बुझने के बाद भी बजना बंद नहीं होता.
चिंंंता से राहत : बिस्तर पकड़ते ही दिनभर की बहस, कल की चिंताएं और अधूरे काम एक साथ दिमाग पर धावा बोल देते हैं. जब दिमाग में यह शोर चलता रहता है, तो शरीर में नींद लाने वाला मेलाटोनिन हार्मोन बन ही नहीं पाता और करवटें बदलते-बदलते सुबह हो जाती है.
मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन: एक शांत और हल्के अंधेरे कमरे में जब आप तिल के तेल या गाय के घी के दीये की लौ को एकटक घूरते हैं, तो आंखों के जरिए सीधे दिमाग की नसों को आराम का पैगाम जाता है. इससे दिमाग शांत पड़ता है और वही मेलाटोनिन हार्मोन तेजी से रिलीज होने लगता है जो सुकून की नींद दिलाता है.
शांत दिमाग: लौ की चमक पर नजर गड़ते ही दिमाग के पास इधर-उधर भागने की कोई वजह नहीं बचती. जो लोग रोज रात को सोने से पहले सिर्फ 8-10 मिनट यह कर लेते हैं, उन्हें हफ्ते-दस दिन के भीतर नींद की गोलियों से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है.
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त्राटक करते समय इन बातों की गांठ बांध लें
- त्राटक का सही फायदा तभी मिलेगा जब आप जबरदस्ती आंखें फाड़कर न बैठें.
- कमरे की खिड़कियां बंद रखें और पंखे की रफ्तार धीमी कर दें, ताकि दीये की लौ हवा से फड़फड़ाए नहीं और स्थिर रहे.
- अगर नजर का चश्मा या लेंस लगाते हैं, तो उसे उतारकर एक तरफ रख दें, नंगी आंखों से ही लौ को देखें.
- आंखों के साथ जबरदस्ती मत कीजिए. जैसे ही आंखों में तेज जलन लगे या आंसू की बूंद गालों पर ढुलक जाए, तुरंत आंखें मूंद लें और दोनों हथेलियों को आपस में रगड़कर आंखों पर रखकर सेकें.
- सूर्य त्राटक जैसी कठिन साधनाएं बिना किसी मंझे हुए गुरु के सामने बैठकर कभी न करें, वरना आंखों के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है.
जिन लोगों की आंखों में लालिमा, इन्फेक्शन, मोतियाबिंद की शिकायत हो या हाल-फिलहाल कोई ऑपरेशन हुआ हो, वे भूलकर भी त्राटक न करें और पहले किसी आई स्पेशलिस्ट से राय जरूर लें.
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