सुबह-सुबह पार्क या घर की छत पर चटाई बिछाकर योगासन करना बहुत अच्छी आदत है. इससे बदन खुलता है, दिनभर फुर्ती रहती है और दिमाग भी शांत रहता है. पर पिछले कुछ समय से एक अजीब होड़ देखने को मिल रही है. सोशल मीडिया पर रील्स देखकर या पड़ोस वाले को शीर्षासन करते देख कई लोग पहले ही दिन अपने शरीर को रबड़ की तरह खींचने लगते हैं. उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा टांगें खींचेंगे या जितना झुकेंगे, मोटापा उतनी जल्दी घटेगा और लचीलापन रातोंरात आ जाएगा.
सोशल मीडिया पर दिखने वाले कठिन योगासन देखकर क्या आप भी पहले दिन ही शरीर को जरूरत से ज्यादा खींचने लगते हैं? आयुष मंत्रालय का कहना है कि यही आदत चोट की बड़ी वजह बन सकती है.
इसी अंधाधुंध खींचतान का नतीजा यह होता है कि फायदे की जगह कमर में लचक आ जाती है, घुटने की कटोरी हिल जाती है या कंधे की नस चढ़ जाती है. अब इसी गंभीर लापरवाही को लेकर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने सीधे तौर पर लोगों को चेताया है. मंत्रालय का साफ कहना है कि योग शरीर को साधे रखने के लिए है, उसके साथ कुश्ती लड़ने के लिए नहीं.
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सोशल मीडिया पर मंत्रालय ने क्या समझाया?
आयुष मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट डालकर बहुत पते की बात लिखी है. मंत्रालय के मुताबिक, योग करते समय होश, ठहराव और अपने शरीर की सीमा को पहचानना सबसे पहली शर्त है.
सीधे शब्दों में कहें तो योग कोई सर्कस नहीं है. हर आसन को बहुत सहजता से करें. किसी भी तरह का झटका देने, बदन पर जबरन जोर डालने या दबाव बनाने से पूरी तरह बचें. अगर किसी आसन को करते हुए शरीर के किसी भी हिस्से में तेज दर्द की टीस उठे, तो उसी सेकंड रुक जाएं. हर मूवमेंट को समझदारी और पूरे ध्यान के साथ करना ही असली योग है.
देखा-देखी में शरीर को खींचना बंद कीजिए
मंत्रालय ने इस बात पर खास जोर दिया है कि अक्सर लोग शुरुआत में ही सबसे कठिन आसन करने की जिद पकड़ लेते हैं.
हर किसी की कद-काठी और हड्डियों की बनावट अलग होती है. कोई बहुत आराम से झुककर अपने दोनों पैर छू लेता है, तो किसी का हाथ घुटने से नीचे भी नहीं सरकता.
अगर आपका बदन आगे झुकते वक्त ज्यादा साथ नहीं दे रहा, तो जबरन सिर को घुटनों से सटाने की कोशिश मत करिए. अपने हाथ वहीं तक ले जाएं जहां तक शरीर बिना दर्द के जाने दे. जैसे-जैसे हफ्तों तक नियमित अभ्यास होगा, मांसपेशियां अपने आप ढीली पड़ेंगी और लचीलापन आ जाएगा. किसी दूसरे की नकल उतारने के चक्कर में अपनी नसें खिंचवा लेना समझदारी नहीं है.
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दर्द को बर्दाश्त करना बहादुरी नहीं, बेवकूफी है
अक्सर लोग जिम के उस पुराने जुमले को योग में भी घुसा देते हैं कि दर्द होगा तभी फायदा मिलेगा. पर योग में यह थ्योरी बिल्कुल उल्टी पड़ती है. अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ का भी यही अध्ययन है कि अगर आसन करते वक्त शरीर में कहीं तेज चुभन या खिंचाव हो, तो तुरंत बाहर आ जाना चाहिए.
कई लोग सोचते हैं कि बस दो सेकंड और रुक जाएं तो आसन पूरा हो जाएगा. यही दो सेकंड की जिद कंधे, गर्दन या रीढ़ की हड्डी को चोटिल कर देती है. एक बार मांसपेशी फट जाए या मोच आ जाए, तो ठीक होने में महीनों लग जाते हैं.
आसन करते वक्त सांसों और मन का तालमेल
- आयुष मंत्रालय ने अपनी हिदायत में माइंडफुल प्रैक्टिस यानी पूरे ध्यान से अभ्यास करने की बात कही है.
- जब आप कोई पोज बना रहे हों, तो नजर भले कहीं हो पर पूरा ध्यान अपनी सांसों पर होना चाहिए.
- जल्दबाजी में एक आसन खत्म करके तुरंत दूसरे पर छलांग मत लगाइए. बीच में कुछ पल रुकिए, बदन को ढीला छोड़िए और महसूस करिए कि सांस सामान्य हुई या नहीं.
अगर आप हड़बड़ी में आसन बदलेंगे, तो शरीर जो चेतावनी भरे इशारे दे रहा होता है, आप उन्हें नजरअंदाज कर बैठेंगे. इसलिए योग को सुकून से कीजिए. शरीर की सुनेंगे तो सेहत सुधरेगी, शरीर पर हुक्म चलाएंगे तो नुकसान तय है.
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