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This Article is From May 01, 2018

शहरी बच्चों को अधिक होता है मानसिक रोग का जोखिम!

जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ उल्म और अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के शोधकर्ताओं के मुताबिक बढ़ते बच्चों के इर्द गिर्द पशुओं का होना मानसिक सेहत के लिए अच्छा होता है.

शहरी बच्चों को अधिक होता है मानसिक रोग का जोखिम!
ग्रामीण क्षेत्रों में पलने - बढ़ने वाले बच्चे जो पशुओं और बैक्टिरिया से घिरे रहते हैं उनकी तनाव के प्रति लचीली रोग प्रतिरोधक प्रणाली होती है और उन्हें मानसिक रोग होने का जोखिम भी कम होता है, उन बच्चों की तुलना में जो शहर में रहते हैं और जिनका पशुओं से कोई संपर्क नहीं रहता. एक अध्ययन में यह पता चला है. प्रोसीडिंग्स ऑफ दी नेशनल ऐकेडमी ऑफ साइंसेस नाम के जर्नल में प्रकाशित शोध पुष्टि करता है कि आवश्यकता से अधिक जीवाणुरहित पर्यावरण से सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.

जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ उल्म और अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के शोधकर्ताओं के मुताबिक बढ़ते बच्चों के इर्द गिर्द पशुओं का होना मानसिक सेहत के लिए अच्छा होता है.

सीयू बोल्डर में प्रोफेसर क्रिस्टोफर लॉरी ने बताया कि यह पहले ही साबित हो चुका है कि बच्चे के विकास के दौर में पशुओं और ग्रामीण पर्यावरण से उसका संपर्क आने वाले वक्त में उसमें अस्थमा और अन्य एलर्जी के जोखिम को कम करता है.

उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन इस शोध में यह पहली बार साबित हुआ है कि यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है.’’ 

शोध में जर्मनी के 40 लोगों को शामिल किया गया था जिनकी आयु 20 से 40 वर्ष के बीच थी. इसमें से आधे लोग खेतों में, पशुओं के बीच पले बढ़े जबकि आधे बिना पशुओं के संपर्क के बड़े शहरों में बड़े हुए.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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