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झारखंड में कुत्ते ने 1 दिन में 16 लोगों को काटा, जानें कुत्ता काट ले तो सबसे पहले क्या करें?

अगर कुत्ता काट ले या खरोंच मार दे, तो घाव को नजरअंदाज न करें। जानिए रेबीज से बचाव के लिए फर्स्ट एड, एंटी-रेबीज इंजेक्शन और डॉक्टर क्या सलाह देते हैं.

झारखंड में कुत्ते ने 1 दिन में 16 लोगों को काटा, जानें कुत्ता काट ले तो सबसे पहले क्या करें?
रेबीज क्या है और यह कितना खतरनाक हो सकता है?
  • At least 16 people were bitten by a suspected rabid dog in Balumath, Jharkhand in one day
  • Victims received anti-rabies vaccine, anti-tetanus injection, and symptomatic treatment promptly
  • Dog vaccination prevents rabies by stopping the virus transmission among dogs and humans

सड़क पर चलते वक्त अचानक कोई कुत्ता पीछे से लपक पड़े या पैर में दांत गड़ा दे, तो किसी के भी हाथ-पांव फूल जाते हैं. झारखंड के लातेहार जिले के बालूमाथ कस्बे में अभी ऐसा ही खौफनाक वाकया हुआ है. शुक्रवार को दोपहर से लेकर रात तक एक ही लावारिस कुत्ते ने ऐसा आतंक मचाया कि जिसे पाया उसी पर झपट पड़ा. 8 साल के छोटे बच्चे से लेकर 35 साल तक के राहगीरों तक, कुल 16 लोग लहूलुहान होकर अस्पताल पहुंचे.

अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि रात दस बजे तक एक के बाद एक जख्मी लोग आते रहे. किसी के पैर में गहरा घाव था तो किसी के हाथ पर मांस फटा हुआ था. आनन-फानन में सबको एंटी-रेबीज की सुई और टिटनेस का टीका लगाया गया. ऐसी घटनाएं अब आए दिन अखबारों में दिखती हैं. दिक्कत यह है कि लोग कुत्ते के काटने को मामूली चोट समझकर घर पर ही बैठ जाते हैं, जो आगे चलकर सीधे मौत का फंदा बन जाता है.

रेबीज की बीमारी: जहां संभलने का दूसरा मौका नहीं मिलता

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ का साफ कहना है कि दुनिया में इंसानों को रेबीज होने का 99 फीसदी कारण कुत्तों का काटना या उनका नाखून लगना ही है.

रेबीज कोई आम बुखार या इन्फेक्शन नहीं है. एक बार यह वायरस रीढ़ की नस पकड़कर दिमाग में घुस गया और मरीज में इसके लक्षण दिखने लगे, फिर दुनिया का कोई भी बड़ा अस्पताल या महंगी दवा उसे बचा नहीं सकती. रेबीज के लक्षण उभरने के बाद इलाज बेहद कठिन हो जाता है, इसलिए समय रहते वैक्सीन लगवाना जरूरी है.

लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि अगर दांत लगते ही इंसान बिना वक्त गंवाए सीधे अस्पताल पहुंच जाए, तो इस बीमारी को सौ फीसदी रोका जा सकता है.

कुत्तों को टीका लगाना क्यों है सबसे बड़ा हल?

गली-मोहल्लों में घूमने वाले कुत्तों का टीकाकरण ही इस पूरी आफत पर लगाम लगा सकता है.

यह वायरस हवा में जिंदा नहीं रह सकता. इसे एक जानवर से दूसरे जानवर के शरीर में जाने के लिए दांत मारने की जरूरत पड़ती है.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, अगर किसी इलाके के 70 फीसदी कुत्तों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लग जाए, तो वायरस की चेन वहीं टूट जाती है. उसे आगे फैलने के लिए कोई नया जरिया ही नहीं मिलता.

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े स्तर पर कुत्तों का टीकाकरण रेबीज वायरस के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

दांत या खरोंच लगते ही फौरन क्या कदम उठाएं?

अगर कभी आपके साथ या किसी जानने वाले के साथ ऐसा हादसा हो जाए, तो घबराहट में गलतियां करने के बजाय ये तीन काम तुरंत कीजिए.

सीधे नल के नीचे पैर लगाइए: जहां भी दांत लगा हो या खरोंच आई हो, उसे तुरंत बहते पानी के नीचे रखें और कपड़े धोने वाले या नहाने वाले साबुन से पूरे 15 मिनट तक लगातार धोएं. डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से धोना सबसे जरूरी कदमों में से एक है.

लोग अक्सर घाव पर पिसी मिर्च, हल्दी, मिट्टी या चूना पोत देते हैं. यह सबसे खतरनाक गलती है. धोने के बाद सिर्फ बीटाडीन या कोई एंटीसेप्टिक दवा ही लगाएं.

सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल या डिस्पेंसरी पहुंचिए और एंटी-रेबीज का पहला डोज लगवाइए. अगर घाव बहुत गहरा है और खून बह रहा है, तो डॉक्टर घाव के ठीक अंदर इम्यूनोग्लोबुलिन का खास इंजेक्शन देते हैं ताकि वायरस वहीं का वहीं बेअसर हो जाए.

उस कुत्ते पर नजर रखने के चक्कर में मत पड़िए

कई लोग पुरानी बातों में आकर यह गलती करते हैं कि पहले दस दिन कुत्ते को देखेंगे कि वह पागल होकर मरता है या नहीं. अगर वह पागल निकला तभी सुई लगवाएंगे. यह जानलेवा भूल है. अगर आप खुद के बीमार होने या कुत्ते के मरने का इंतजार करते रहे, तो जब तक लक्षण सामने आएंगे तब तक शरीर के भीतर बहुत देर हो चुकी होगी. कुत्ता पालतू हो या सड़क का, अगर उसने दांत गड़ाया है तो अस्पताल ही आपका पहला ठिकाना होना चाहिए.

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