करवा चौथ का दिन हर सुहागिन के लिए बेहद खास होता है. पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना के साथ महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाकर पूरे दिन बिना अन्न और जल के रहती हैं. शाम को या रात में जब चांद के दर्शन होते हैं, तभी पानी की पहली घूंट गले से नीचे उतरती है. धार्मिक आस्था और परंपरा के लिहाज से यह व्रत जितना गहरा है, शरीर के स्तर पर यह उतना ही बड़ा इम्तिहान भी साबित होता है.
12 से 15 घंटे तक बिना पानी और निवाले के रहने पर हमारे भीतरी अंग किस तरह काम करते हैं? जब पेट खाली होता है और गला सूख रहा होता है, तब शरीर ऊर्जा कहां से जुटाता है? आइए, घंटे-दर-घंटे के हिसाब से समझते हैं कि इस निर्जला उपवास के दौरान शरीर के अंदर क्या हलचल मची रहती है.
शुरुआती 4 घंटे: सरगी से मिलती रहती है ताकत
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में जो सरगी खाई जाती है, अगले चार घंटे तक शरीर उसी की बदौलत अपनी गाड़ी चलाता है.
सरगी में जो कुछ भी खाया गया होता है, वह पचकर ग्लूकोज में बदलता है. खून में मौजूद इंसुलिन इसे शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाता है, जिससे सुबह के रोजमर्रा के काम निपटाने में कोई थकान महसूस नहीं होती.
जिन महिलाओं ने सरगी में फल, दही, दूध, पनीर या मेवे जैसी प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीजें खाई होती हैं, उनका पेट देर तक भरा रहता है. वहीं अगर सरगी में सिर्फ मीठे पकवान या तली-भुनी पूरियां खाई गई हों, तो चार घंटे बीतते ही ब्लड शुगर नीचे गिरता है और भूख लगने लगती है.

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4 से 8 घंटे: लिवर खोलता है अपनी जमा पूंजी
दोपहर होते-होते जब भोजन से मिलने वाली ऊर्जा पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो शरीर अपनी जमा पूंजी का इस्तेमाल शुरू करता है.
ग्लाइकोजन का टूटना: लिवर के अंदर जो ग्लूकोज 'ग्लाइकोजन' के रूप में सुरक्षित रखा होता है, शरीर उसे तोड़कर काम चलाने लगता है.
प्यास और सिर भारी होना: इसी दौरान हलकी सुस्ती, थकान या सिर में भारीपन महसूस होने लगता है. पानी की बूंद न मिलने से गले में हल्का सूखापन आने लगता है और काम में मन थोड़ा कम लगने लगता है.
8 से 12 घंटे: शरीर चर्बी से बनाने लगता है ऊर्जा
शाम ढलते-ढलते जब लिवर का बैकअप भी चुकने लगता है, तो शरीर एक कदम और आगे बढ़ता है.
फैट बर्निंग और कमजोरी: अब ऊर्जा की कमी पूरी करने के लिए शरीर में जमा चर्बी यानी वसा का इस्तेमाल शुरू होता है. इस दौरान कई महिलाओं को अचानक चक्कर आना, हाथ-पैरों में हलकी कंपकंपी या सुस्ती महसूस हो सकती है.
पसीने से पानी का नुकसान: अगर मौसम में गर्माहट या उमस है और पूजा की तैयारी में लगातार भागदौड़ हो रही है, तो पसीने के साथ शरीर से जरूरी नमक और इलेक्ट्रोलाइट्स भी तेजी से बहने लगते हैं.
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12 घंटे के बाद: डिहाइड्रेशन का बढ़ने लगता है खतरा
दिन ढलने और चांद का इंतजार लंबा होने के साथ शरीर में पानी की कमी सबसे ज्यादा सताने लगती है.
यूरिन का रंग गहरा होना: पानी न मिलने से गुर्दे यूरिन को गाढ़ा करने लगते हैं ताकि बदन का पानी बचा रहे. इससे पेशाब की मात्रा बहुत कम हो जाती है और उसका रंग गहरा पीला होने लगता है.
मुंह सूखना और सिर चकराना: होठों पर पपड़ी जमने लगती है, जुबान तालू से चिपकने लगती है और अचानक खड़े होने पर आंखों के आगे अंधेरा छा सकता है. जो महिलाएं पहले से कमजोर हैं, उन्हें इस समय सबसे ज्यादा बेचैनी महसूस होती है.
एक्सपर्ट की राय:
बीएलके-मैक्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के वाइस चेयरमैन एवं एचओडी डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल इस उपवास को लेकर बहुत जरूरी चिकित्सकीय सलाह देते हैं.
डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल का कहना है, "करवा चौथ का निर्जला व्रत गहरी आस्था का प्रतीक है, लेकिन भक्ति के साथ अपनी सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही अनिवार्य है. इतने लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से कमजोरी, गंभीर डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और अचानक ब्लड प्रेशर गिरने का खतरा रहता है. खास तौर पर बुजुर्ग महिलाओं, या जिन्हें डायबिटीज, हार्ट फेलियर या किडनी की पुरानी बीमारी है, उन्हें यह व्रत रखते वक्त बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. ऐसी महिलाओं को व्रत का फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से मिलकर दवाओं की टाइमिंग जरूर समझ लेनी चाहिए."
डॉ. सिंघल आगे आगाह करते हैं कि गर्भवती और बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं को निर्जला उपवास से बचना चाहिए या डॉक्टर की निगरानी में ही फैसला लेना चाहिए. अगर व्रत के दौरान अचानक बहुत तेज चक्कर आने लगें, आंखों के आगे अंधेरा छा जाए, सीने में भारीपन लगे या अत्यधिक कमजोरी से बेहोशी जैसी हालत बनने लगे, तो इसे जबरन सहन न करें. ऐसे में व्रत जारी रखने की जिद छोड़ें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें.
चांद देखकर व्रत खोलते समय न करें ये गलती
चांद निकलते ही छलनी से पति का दीदार करने के बाद जब व्रत खोलने की बारी आए, तो हड़बड़ी बिल्कुल न दिखाएं.
एक साथ ढेर सारा पानी न गटकें: पानी पीते समय घूंट-घूंट करके पिएं ताकि आंतों पर अचानक झटका न लगे. हल्का गुनगुना या सादा पानी सबसे मुफीद रहता है.
सीधे भारी और तला-भुना खाना न खाएं: दिनभर खाली रहे पेट में अचानक पूरियां, पराठे या भारी मिठाइयां डालने से पेट फूल सकता है और बदहजमी हो सकती है.
हल्की चीजों से करें शुरुआत: पानी के बाद पहले एक-दो खजूर, नारियल पानी, थोड़ा सा फल या कटोरी भर दही लें. उसके आधे घंटे बाद दाल, हरी सब्जी और हल्की रोटी का सादा भोजन करें. शरीर के संकेतों का आदर करना ही उपवास को सुरक्षित और फलदायी बनाता है.
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