बैठे-बैठे कान में हल्की सी खुजली हुई नहीं कि हाथ अपने आप माचिस की तीली, सेफ्टी पिन, गाड़ी की चाबी या ईयरबड की तरफ बढ़ जाता है. हमारे यहां ज्यादातर घरों में यह नजारा आम है. लोग सोचते हैं कि कान में मैल जम गया है और इसे बाहर निकालना ही सफाई है. पर सच यह है कि आपकी यही जल्दबाजी आपके कान के नाजुक पर्दे में छेद कर सकती है और जिंदगी भर के लिए बहरा बना सकती है. कान में बनने वाला पीला या भूरा मोम जैसा पदार्थ कोई गंदगी नहीं, बल्कि कान की कुदरती हिफाजत के लिए बना वैक्स (सेरुमेन) है. यह धूल-धक्कड़, छोटे कीड़े-मकोड़ों और बैक्टीरिया को कान के पर्दे तक जाने से रोकता है. जब यह सूखकर बहुत ज्यादा कड़ा हो जाता है, तभी कान भारी लगने लगता है या सुनाई कम देता है.
कान का मैल निकालने के लिए ईयरबड या तीली का इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहिए?
नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में यूनानी विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. सैयद अहमद खान का कहना है कि कान कुदरत का बनाया ऐसा अंग है जो अपनी सफाई खुद करना जानता है. जब हम दिनभर बातचीत करते हैं, हंसते हैं या खाना चबाते हैं, तो हमारे जबड़े की हरकत से अंदर फंसा सूखा मैल अपने आप खिसककर कान के बाहरी छेद तक आ जाता है.
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डॉ. खान साफ शब्दों में चेताते हैं कि कान में कभी भी रुई वाली तीली यानी ईयरबड नहीं डालना चाहिए. लोग सोचते हैं कि वे ईयरबड से मैल खींच रहे हैं, जबकि असलियत में ईयरबड 80 फीसदी मैल को कान के और अंदर ठूंस देता है. इससे कान पूरी तरह चोक हो जाता है और पर्दे पर भारी दबाव पड़ता है.

Kan Ka Mail Kaise Nikale: यूनानी हेल्थ एक्स्पर्ट ने बताया कैसे घर पर कान का मैल आसानी से निकाला जा सकता है.
कान में जमे मैल (Ear Wax) को नरम करने के यूनानी घरेलू उपाय
डॉ. सैयद अहमद खान के अनुसार, कान से छेड़छाड़ करने के बजाय सिर्फ मैल को नरम कर देना चाहिए, ताकि वह खुद बहकर बाहर निकल आए:
रोगन बादाम शीरीं (मीठे बादाम का तेल): यूनानी में कान के सूखेपन और कड़े मैल के लिए बादाम का तेल सबसे मुफीद माना गया है. शुद्ध बादाम के तेल को हल्का सा गुनगुना करें और ड्रॉपर से सिर्फ 2 बूंद कान में टपकाएं. 5 से 7 मिनट उसी करवट लेटे रहें ताकि तेल सूखे मैल को काट सके. फिर दूसरी तरफ करवट लें, मैल पिघलकर बाहर निकल आएगा जिसे किसी साफ कपड़े से पोंछ लें.
हल्का गुनगुना सरसों का तेल: हमारी नानी-दादी के जमाने से चला आ रहा सरसों का तेल कान के लिए बेहतरीन लुब्रिकेंट है. कटोरी में थोड़ा सा सरसों तेल हल्का गुनगुना करके कान में 1-2 बूंद डालें. यह कान के जमे हुए मैल को फुलाकर ढीला कर देता है.
शुद्ध जैतून का तेल: जैतून के तेल में कुदरती एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं. रात को सोते वक्त एक बूंद जैतून का तेल डालने से कान के भीतर की खुजली बंद होती है और जिद्दी से जिद्दी सूखा मैल दो दिन में मुलायम होकर बाहर आ जाता है.
हल्का नमकीन गुनगुना पानी: अगर तेल नहीं डालना चाहते, तो आधा कप हल्के गुनगुने पानी में चुटकी भर सेंधा नमक मिलाएं. रुई के जरिए दो बूंद पानी कान में डालें और सिर तिरछा करके तुरंत पानी बाहर निकाल दें. इससे कान की सतह साफ हो जाती है.
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क्या कान का मैल हमेशा निकालना जरूरी है?
हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोगों को कान का मैल निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती. डॉ. सैयद अहमद खान के अनुसार, यह मैल कान की प्राकृतिक सुरक्षा परत है, जो धूल और कीटाणुओं से बचाने का काम करती है. जरूरत से ज्यादा सफाई करने पर फायदा नहीं, बल्कि नुकसान हो सकता है.
कान की सफाई में ये गलतियां कभी न दोहराएं
माचिस की तीली, पेन का ढक्कन, हेयरपिन या चाबी कान में घुमाना बिल्कुल बंद कर दें. एक छोटी सी खरोंच भी कान में भयानक फंगल इन्फेक्शन पैदा कर सकती है. ईयरबड का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ कान के बाहरी हिस्से यानी कान की बाहरी सिलवटों को पोंछने के लिए करें, उसे छेद के अंदर कभी न धकेलें. कभी भी बहुत तेज गर्म तेल या मेडिकल स्टोर से बिना पूछे कोई भी केमिकल ड्रॉप कान में न डालें.
कब घरेलू नुस्खे छोड़कर सीधे डॉक्टर के पास जाएं?
अगर कान में तेज टीस मारता हुआ दर्द हो रहा हो, या कान से बदबूदार पीला-सफेद पानी बह रहा हो, तो कोई भी तेल डालने की गलती न करें. अगर अचानक से एक कान से सुनाई देना बंद हो गया हो, कान में लगातार घंटी बजने जैसी आवाजें आ रही हों या सिर चकरा रहा हो, तो बिना देर किए सीधे किसी ईएनटी (कान, नाक, गला) डॉक्टर को दिखाएं.
सीधी सी बात है कि कान को जबरदस्ती साफ करने की जरूरत ही नहीं होती. अगर कभी भारीपन लगे तो बस कुदरती तेल से मैल को ढीला कर दीजिए, बाकी काम कान की कुदरती बनावट खुद संभाल लेगी.
एक्सपर्ट के बारे में : डॉ. सैयद अहमद खान, पूर्व प्रमुख (यूनानी विभाग), सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली.
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