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पत्नी को जोर से गले लगाया तो टूट गईं 5 पसलियां! क्या सच में एक झप्पी से हो सकता है फ्रैक्चर?

क्या किसी को जोर से गले लगाने से उसकी हड्डी टूट सकती है? सुनने में यह अजीब लगता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक कुछ खास परिस्थितियों में ऐसा संभव है. खासकर बुजुर्गों, ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों, छोटे बच्चों और मेनोपॉज के बाद की महिलाओं में हड्डियां अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती हैं. ऐसे में बहुत कसकर झप्पी देना जोखिम बढ़ा सकता है.

पत्नी को जोर से गले लगाया तो टूट गईं 5 पसलियां! क्या सच में एक झप्पी से हो सकता है फ्रैक्चर?

चीन में एक शख्स ने अपनी पत्‍नी को प्‍यार से गलते तो लगया, लेकिन इसके बाद वह बहुत पछताया. इस खबर ने सभी का ध्‍यान अपनी ओर खींचा. हुआ कुछ यूं कि इस शख्‍स ने प्यार जताने के लिए अपनी पत्नी को इतना कसकर गले लगाया कि उसकी 5 पसलियों टूट गई और कुछ पसलियों में दरार आ गई.

मामला चीन के जियांग्सू का है. चीनी न्यूज आउटलेट Phoenix New Media की र‍िपोर्ट के अनुसार महिला को ऑस्टियोपोरोसिस था. तो क्‍या वाकई ऑस्टियोपोरोसिस में ऐसा हो सकता है कि जोर से गले लगाने पर पसल‍ियां टूट सकती हैं. इस बारे में ज्‍यादा जानकारी पाने के लिए हमने बात की गुरुग्राम के सीके बिड़ला हॉस्पिटल में सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन और डायरेक्टर डॉ. रामकिंकर झा से. जानें एक्‍सपर्ट का इस मामले पर क्‍या कहना है.

आखिर कब गले मिलना बन जाता है खतरे की घंटी?

एक तंदुरुस्त इंसान की हड्डियां रोजमर्रा के दबाव और वजन को बहुत आसानी से झेल लेती हैं. आम दिनों में किसी को गले लगाने से हड्डी चटकने का सवाल ही पैदा नहीं होता. खतरा तब खड़ा होता है जब कोई हद से ज्यादा ताकत लगा दे, अचानक झटका दे बैठे या शरीर के किसी नाजुक हिस्से पर पूरा भार डाल दे.

बहुत तेज दबाव पड़ने पर सबसे ज्यादा रिस्क पसलियों (रिब्स), कॉलरबोन (हंसली की हड्डी) और कंधे के पास वाली बाजू की हड्डी पर होता है. ऐसे मामलों में ऑस्टियोपोरोसिस सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है. इस बीमारी में हड्डियां अंदर से इतनी भुरभुरी और खोखली हो जाती हैं कि कई बार जोर से खांसने, छींकने या तेज झप्पी से भी चटक जाती हैं.

अगर किसी को गले मिलने के बाद अचानक तेज दर्द शुरू हो जाए, तो उसे सिर्फ मसल पेन समझकर नजरअंदाज न करें. अगर मरीज को पहले से ऑस्टियोपोरोसिस रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

छोटे बच्चों के साथ क्यों बरतें नरमी?

छोटे बच्चों की हड्डियां पूरी तरह पकी नहीं होतीं, वे लचीली और नाजुक होती हैं. भले ही उनमें थोड़ा मुड़ने की ताकत होती है, पर वे चोट से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. अक्सर लोग लाड़-प्यार में बच्चों को सीने से बहुत जोर से भींच लेते हैं या हाथों से पकड़कर हवा में उछाल देते हैं. यह खेल बच्चों की नाजुक हड्डियों पर भारी पड़ सकता है. जिन बच्चों में गंभीर रूप से विटामिन डी की कमी होती है या जन्मजात 'ऑस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा' जैसी बीमारी होती है, उनकी हड्डियां कांच की तरह कमजोर हो सकती हैं.

सामान्य परिस्थितियों में माता-पिता का प्यार से गले लगाना बच्चे के लिए सुरक्षित माना जाता है. अगर बच्चा अचानक जोर-जोर से रोने लगे, हाथ हिलाने से मना करे या किसी हिस्से में सूजन दिखने लगे, तो घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत अस्पताल ले जाएं.

मेनोपॉज के बाद महिलाओं की हड्डियां क्यों हो जाती हैं कमजोर?

45 से 50 की उम्र के आसपास जब महिलाओं के पीरियड्स बंद होते हैं, तो शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल तेजी से गिरता है.  एस्ट्रोजन ही महिलाओं की हड्डियों को मजबूत बनाए रखने का काम करता है. इसकी कमी होते ही हड्डियां तेजी से कैल्शियम खोने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो जाती हैं.गंभीर ऑस्टियोपोरोसिस वाले लोगों में अत्यधिक दबाव या जोरदार पकड़ से फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है.

हालांकि आम महिलाओं में ऐसा कम ही दिखता है, लेकिन जिनकी बोन डेंसिटी बहुत ज्यादा गिर चुकी है, उन्हें संभलकर रहना चाहिए. अगर परिवार में किसी को ऑस्टियोपोरोसिस रहा हो या जरा सा फिसलने पर भी कभी हड्डी टूटी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

हड्डियों को मजबूत रखने के 4 नियम

डाइट में कैल्शियम और विटामिन डी का ध्यान रखें: दूध, दही, पनीर, रागी, सोयाबीन, टोफू और हरी पत्तेदार सब्जियां रोज की थाली में रखें. रोज सुबह 15-20 मिनट हल्की धूप जरूर सेकें ताकि शरीर को कुदरती विटामिन डी मिले. जरूरत पड़ने पर ही डॉक्टर से पूछकर सप्लीमेंट लें.
रोजाना थोड़ी कसरत की आदत डालें: पैदल चलना, हल्की वेट ट्रेनिंग और सीढ़ियां चढ़ना हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है.. बुजुर्गों को बैलेंस बनाने वाले हल्के योग या स्ट्रेचिंग जरूर करनी चाहिए ताकि वे फिसलकर न गिरें.
डेक्सा स्कैन (DEXA Scan) से जांच: अगर अक्सर बदन दर्द रहता है या हड्डियां कमजोर लग रही हैं, तो डॉक्टर की सलाह से डेक्सा टेस्ट कराएं. इससे हड्डियों की असली ताकत का साफ पता चल जाता है.
ध्यान रखें.: किसी से भी गले मिलते समय उसके कद, उम्र और सेहत का ख्याल रखें. किसी को भी पहलवानों की तरह भींचने की जरूरत नहीं है.

कब जाएं डॉक्‍टर के पास?

किसी झप्पी या हल्के झटके के बाद अगर छाती या पसली में चुभने वाला तेज दर्द शुरू हो जाए, तो फौरन सावधान हो जाएं.
छूने पर तेज दर्द होना, सांस खींचने पर छाती में सुई जैसा चुभना, जगह पर सूजन या नीला पड़ना पसली में हेयरलाइन फ्रैक्चर का इशारा हो सकता है.
अगर सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही हो या कोई अंग टेढ़ा दिखने लगे, तो बिना एक मिनट गंवाए सीधे नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचें.

कुल मिलाकर बात इतनी है कि प्यार भरी झप्पी से डरने की जरूरत नहीं है. बस सामने वाले की उम्र और सेहत को समझें और प्यार जताते वक्त अपनी ताकत पर थोड़ा काबू रखें.

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