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भारत की 57% महिलाएं एनीमिया से प्रभावित, करवाचौथ में निर्जला व्रत रखने से कितना बढ़ता है रिस्क? 

हमारे देश में कई महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं. ऐसे में निर्जला व्रत रखना सुरक्षित है या नहीं? यहां जानते हैं डॉक्टर से इस बारे में विस्तार से-

भारत की 57% महिलाएं एनीमिया से प्रभावित, करवाचौथ में निर्जला व्रत रखने से कितना बढ़ता है रिस्क? 
Karwa chauth Fast Anemia: एनीमिया से प्रभावित लोगों को करना चाहिए निर्जला व्रत?

करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र की कामना के साथ महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं. इस दौरान वे न तो भोजन करती हैं और न ही पानी पीती हैं. हालांकि, जिन महिलाओं के शरीर में पहले से ही खून की कमी यानी एनीमिया है, उनके लिए लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना परेशानी बढ़ा सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या निर्जला व्रत से खून की कमी बढ़ती है और एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को व्रत रखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण  में 15 से 49 वर्ष की आयु की 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित पाई गई थीं. यानी देश में इस आयु वर्ग की आधे से अधिक महिलाओं में खून की कमी दर्ज की गई.

क्या होता है एनीमिया?

एनीमिया ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है. हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाता है. इसकी कमी होने पर शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.

एनीमिया के प्रमुख लक्षणों में थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, सांस फूलना और शारीरिक काम करने की क्षमता कम होना शामिल हैं. आयरन की कमी इसका एक प्रमुख कारण है, लेकिन विटामिन बी12 और फोलेट की कमी, कुछ बीमारियां और रक्तस्राव भी एनीमिया का कारण बन सकते हैं.

निर्जला व्रत से कितना बढ़ता है रिस्क?

डॉक्टरों के मुताबिक, निर्जला व्रत रखने से सीधे एनीमिया नहीं बढ़ता और न ही केवल कुछ घंटों तक भोजन नहीं करने से शरीर में हीमोग्लोबिन अचानक कम हो जाता है. हालांकि, पहले से एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को व्रत के दौरान कमजोरी, थकान, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं अधिक महसूस हो सकती हैं.

पानी नहीं पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन का जोखिम भी बढ़ सकता है. यदि महिला को पहले से ही खून की कमी है, तो निर्जलीकरण के कारण होने वाली कमजोरी और चक्कर उसकी परेशानी बढ़ा सकते हैं. गर्म मौसम, अधिक पसीना, शारीरिक गतिविधि और कुछ दवाएं इस जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं.

डॉ. काशिफ अली , मेटाबॉलिक हेल्थ एंड लाइफस्टाइल कंसल्टेंट,  हीलिंग हैंड्स मल्टीस्पेशियलिटी क्लिनिक के कहना है कि एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को निर्जला व्रत रखते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. खून की कमी के कारण शरीर की ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. ऐसे में लंबे समय तक पानी नहीं पीने और भोजन से दूर रहने पर कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं. जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन काफी कम है या जिन्हें पहले से चक्कर, सांस फूलने अथवा अत्यधिक कमजोरी की शिकायत रहती है, उन्हें व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

किन महिलाओं को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन महिलाओं को पहले से एनीमिया है, मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होता है, वे गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, उन्हें निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए. डायबिटीज, किडनी या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित महिलाओं और नियमित दवाएं लेने वालों के लिए भी डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

यदि व्रत के दौरान अत्यधिक कमजोरी, लगातार चक्कर, बेहोशी, भ्रम या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए.

व्रत से पहले और बाद में क्या रखें ध्यान?

व्रत से पहले सरगी में पौष्टिक और संतुलित भोजन शामिल करें. फल, साबुत अनाज, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ और पर्याप्त तरल पदार्थ शरीर को ऊर्जा और पानी उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. चांद निकलने के बाद धीरे-धीरे पानी पिएं और संतुलित भोजन करें. आयरन की कमी दूर करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना और अन्य आयरन युक्त खाद्य पदार्थ आहार में शामिल किए जा सकते हैं. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से आयरन की दवाएं लें.

विशेषज्ञों का कहना है कि करवा चौथ की परंपरा निभाते समय स्वास्थ्य के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. एनीमिया की आशंका होने पर हीमोग्लोबिन की जांच कराना और उसके कारण का पता लगाना जरूरी है. व्रत रखने या न रखने का निर्णय अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लेना चाहिए.

यह भी ध्यान रखें कि व्रत खोलते समय तली-भुनी चीजों और अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए. बेहतर होगा कि रोजा खोलने के लिए थोड़ी मात्रा में फल या हल्का भोजन लें. व्रत खोलते ही एक साथ ज्यादा मात्रा में खाना खाने से भी बचना चाहिए.

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