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This Article is From Feb 01, 2016

जानें कैसे गर्भवती महिलाओं के बच्चे में हो सकता है ऑटिज्म का ख़तरा

जानें कैसे गर्भवती महिलाओं के बच्चे में हो सकता है ऑटिज्म का ख़तरा
न्यूयॉर्क: पैदा होते बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़ें तक डायबिटीज़ जैसी बीमारी का शिकार हैं। मार्किट में मिलने वाला फास्ट-फूड भी कुछ अच्छा नहीं माना जाता है। इससे मोटापे की परेशानी और अन्य कई बीमारियों से लोगों को सामना करना पड़ रहा है।

आपको बता दें कि डायबिटीज़ और मोटापे से परेशान महिलाओं की संतान में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम होने की अधिक संभावना होती है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि बच्चे में इस समस्या को होने की संभावना उसके जन्म लेने से पहले से ही हो जाती है।
 

अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने हुए इस अध्ययन मुख्य लेखक जियोबिन वैंग के अनुसार “मोटापा और डायबिटीज़, गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा नहीं होता है। दोनों ही समस्याओं से परेशान महिलाओं में विकसित हो रही संतान के न्यूरोडेवलपमेंट, लंबे समय तक प्रभावित हो सकते हैं”।

इस शोध में साल 1998 से 2014 तक के बीच करीब 2,734 मां उनके बच्चे पर अध्ययन किया गया। अध्ययन के दौरान करीब 100 बच्चों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार देखा गया, जिसका कारण मोटापा और डायबिटीज़ हैं। इस अध्ययन के अन्य लेखक एम डेनियेली फॉलिन के अनुसार ऑटिज्म का खतरा भ्रूण (फिटस) के साथ शुरू हो जाता है।

सामान्य वज़न वाली महिलाओं के बच्चे की तुलना में जिन महिलाओं को मोटापा और डायबिटीज़ दोनों ही समस्याएं होती हैं, उनके बच्चे में ऑटिज्म का खतरा चार गुना अधिक होता है।

यह शोध पत्रिका ‘पीडियाट्रिक्स’ में प्रकाशित हुआ है।

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