
मुंबई:
2002 के ‘हिट एंड रन’ मामले में एक अदालत ने एक मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अभिनेता सलमान खान की अपील पर सुनवाई 29 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी।
सलमान ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसके तहत उन पर ‘गैर इरादतन हत्या’ का आरोप लगाया गया था।
सुनवाई इसलिए स्थगित की गई क्योंकि सत्र जज यू बी हजीब छुट्टी पर हैं।
47 वर्षीय सलमान का तर्क है कि मजिस्ट्रेट ने ‘हिट एंड रन’ मामले में उन पर गैर इरादतन हत्या (भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग दो) का आरोप लगाकर भूल की है। इस धारा के तहत आने वाले अपराध में दस साल की कैद का प्रावधान है और इसमें सत्र अदालत में सुनवाई हो सकती है।
पूर्व में सलमान के खिलाफ मजिस्ट्रेट ने लापरवाही के कारण हत्या के (हल्के) आरोप में (भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए के तहत) सुनवाई की थी, जिसमें अधिकतम दो साल कैद की सजा होती है।
17 गवाहों से जिरह के बाद मजिस्ट्रेट इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि सलमान के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का आरोप लगाया जा सकता है। उन्होंने फिर से सुनवाई के लिए मामला सत्र अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।
सलमान का तर्क है कि मजिस्ट्रेट का आदेश त्रुटिपूर्ण, कानून के अनुसार गलत और रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट यह नहीं समझ पाए कि उनका (सलमान का) इरादा न तो लोगों को मारने का था और न ही वह यह जानते थे कि उनके लापरवाहीपूर्ण तरीके से गाड़ी चलाने के कारण एक व्यक्ति की जान चली जाएगी और चार अन्य घायल हो जाएंगे।
मुंबई के बांद्रा उपनगर में 28 सितंबर 2002 को तड़के एक बेकरी के बाहर फुटपाथ पर कुछ लोग सो रहे थे। इन लोगों को तेज रफ्तार से जा रही एक लैंड क्रूजर ने कुचल दिया था, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए थे। कहा जाता है कि यह लैंड क्रूजर सलमान खान चला रहे थे।
सलमान ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसके तहत उन पर ‘गैर इरादतन हत्या’ का आरोप लगाया गया था।
सुनवाई इसलिए स्थगित की गई क्योंकि सत्र जज यू बी हजीब छुट्टी पर हैं।
47 वर्षीय सलमान का तर्क है कि मजिस्ट्रेट ने ‘हिट एंड रन’ मामले में उन पर गैर इरादतन हत्या (भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग दो) का आरोप लगाकर भूल की है। इस धारा के तहत आने वाले अपराध में दस साल की कैद का प्रावधान है और इसमें सत्र अदालत में सुनवाई हो सकती है।
पूर्व में सलमान के खिलाफ मजिस्ट्रेट ने लापरवाही के कारण हत्या के (हल्के) आरोप में (भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए के तहत) सुनवाई की थी, जिसमें अधिकतम दो साल कैद की सजा होती है।
17 गवाहों से जिरह के बाद मजिस्ट्रेट इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि सलमान के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का आरोप लगाया जा सकता है। उन्होंने फिर से सुनवाई के लिए मामला सत्र अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।
सलमान का तर्क है कि मजिस्ट्रेट का आदेश त्रुटिपूर्ण, कानून के अनुसार गलत और रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट यह नहीं समझ पाए कि उनका (सलमान का) इरादा न तो लोगों को मारने का था और न ही वह यह जानते थे कि उनके लापरवाहीपूर्ण तरीके से गाड़ी चलाने के कारण एक व्यक्ति की जान चली जाएगी और चार अन्य घायल हो जाएंगे।
मुंबई के बांद्रा उपनगर में 28 सितंबर 2002 को तड़के एक बेकरी के बाहर फुटपाथ पर कुछ लोग सो रहे थे। इन लोगों को तेज रफ्तार से जा रही एक लैंड क्रूजर ने कुचल दिया था, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए थे। कहा जाता है कि यह लैंड क्रूजर सलमान खान चला रहे थे।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं