विज्ञापन

Aaj ka Panchang 4 November 2026: उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचें, नोट करें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग

आज कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि मंगलवार को सुबह 11:54 बजे से शुरू होकर बुधवार को सुबह 11:03 बजे तक रहेगी. इसके बाद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी.

Aaj ka Panchang 4 November 2026: उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचें, नोट करें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग
आज का पंचांग 4 नवंबर 2026
Photo Credit: NDTV

Aaj ka Panchang 4 November 2026: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. 

आज की तिथि

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि मंगलवार को सुबह 11:54 बजे से शुरू होकर बुधवार को सुबह 11:03 बजे तक रहेगी. इसके बाद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे तक रहेगी. बुधवार को सुबह 6:37 बजे सूर्योदय और शाम 5:43 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, रात 1:53 बजे चंद्रोदय और अगले दिन दोपहर 2:38 बजे चंद्रास्त होगा.

नक्षत्र

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं. स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और स्वामी राहु हैं. इस नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से लोगों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से निकलकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना प्रबल होती है.

यह भी पढ़ें: Rama Ekadashi 2026: 4 या 5 नवंबर कब है रमा एकादशी? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व

योग

बुधवार को सुबह 8:00 बजे तक 'ब्रह्म योग' रहेगा, इसके बाद 'इंद्र योग' आरंभ होगा. ज्योतिष के अनुसार, ब्रह्म योग 27 नित्य योगों में से 25वां योग है. इस योग को शांति कर्म, धार्मिक अनुष्ठानों, नए कार्यों की शुरुआत और स्वास्थ्य संबंधी इलाज या चिकित्सा के लिए बहुत शुभ माना जाता है. इस योग के दौरान किए गए कार्य अक्षय और सकारात्मक फल देते हैं.

जान लें शुभ मुहूर्त

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभावों या दोषों का स्वतः नाश हो जाता है. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.

बुधवार को रात 9:24 बजे से 11:00 बजे तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

नोट करें राहुकाल

इस दिन राहुकाल दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. इसकी गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर की जाती है और यह हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.

बुधवार को यमगंड काल सुबह 8:00 बजे से 9:24 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेन-देन से बचना चाहिए.

इस दिन गुलिक काल सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.

ग्रहों की स्थिति

बुधवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य जब तुला राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य का नीच होना या नीचस्थ होना कहा जाता है. सूर्य अग्नि तत्व का कारक है, जबकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन आती है, जो सूर्य के स्वभाव के विपरीत है. सूर्य को अहंकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है. तुला राशि में आने से आत्मबल या ऊर्जा थोड़ी कमजोर महसूस हो सकती है. इस स्थिति में किसी भी फैसले पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है.

इस दिन चंद्र देव सिंह राशि में विराजमान रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जन्म कुंडली में अथवा गोचर के दौरान चंद्रमा के सिंह राशि में रहने से व्यक्ति के मन, स्वभाव और जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है. सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं, जो तेज, अधिकार और नेतृत्व का कारक हैं. व्यक्ति का आत्मविश्वास और मनोबल काफी ऊंचा रहता है. वह किसी भी परिस्थिति का डटकर मुकाबला करता है. सूर्य के प्रभाव के कारण इनमें अहंकार, घमंड या श्रेष्ठता की भावना आ सकती है. कई बार ये दूसरों की सलाह सुनना पसंद नहीं करते.

दिशाशूल

बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा (उत्तर-पूर्व/ईशान कोण) में रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है.

(IANS की रिपोर्ट)

यह भी पढ़ें: Govardhan Puja 2026: 9 या 10 नवंबर कब है गोवर्धन पूजा? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
AAJ KA PANCHANG, Panchang
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com