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This Article is From May 03, 2014

राहुल ने किया तीसरे मोर्चे को समर्थन की संभावना से इनकार

फाइल फोटो

अमेठी:

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस द्वारा तीसरे मोर्चे को समर्थन देने की संभावनाओं को लेकर अटकलें लगाए जाने के बीच पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज यहां कहा कि उनकी पार्टी किसी भी मोर्चे को समर्थन नहीं देगी।

अपने चुनाव क्षेत्र अमेठी के दो दिवसीय दौरे के पहले दिन राहुल गांधी ने एनडीटीवी संवाददाता उमाशंकर सिंह से अनौपचारिक बातचीत में इस सवाल पर कि देश में किसी भी दल को सरकार बनाने लायक बहुमत मिलने की सम्भावना नहीं है, ऐसे में स्थितियां बनने पर क्या कांग्रेस तीसरे मोर्चे को समर्थन दे सकती है, राहुल ने ‘ना’ में सिर हिलाया और कहा 'हम किसी फ्रंट को समर्थन नहीं देंगे।'

यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस सरकार बनाने के लिए जोड़तोड़ करेगी, उन्होंने दोबारा ‘ना’ में सिर हिलाया और दावा किया, 'हम पूरे नंबर लाएंगे।'

गौरतलब है कि केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने हाल में कांग्रेस द्वारा तीसरे मोर्चे को समर्थन देने की संभावना व्यक्त की थी। उसके बाद इसकी अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि बाद में खुर्शीद अपने बयान से पलट गए थे। 

राहुल और उनके क़रीबियों को लगता है कि पूरे नंबर न आने के बावजूद सरकार बनाने बनवाने के खेल में शामिल होने से कांग्रेस अपनी ही ज़मीन खोती है और खोएगी। फ्रैक्चर्ड मैनडेट मिलने की स्थिति में जो भी पार्टी चाहे जोड़-तोड़ कर सरकार बनाए, कांग्रेस चुपचाप अपनी बारी का इंतज़ार करे। इस बीच कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमज़ोरियों को दूर करने का काम करे। यूपी-बिहार जैसे राज्यों में पार्टी में जान फूंकने की कोशिश हो। मिली-जुली सरकार की स्थायित्व का भरोसा नहीं होता। ऐसे में जैसे ही वह सरकार गिरे, कांग्रेस कमर कस कर तैयार रहे चुनावी कामयाबी को हासिल करने के लिए। (पढ़े- क्यों तीसरे मोर्चे को समर्थन नहीं देगी कांग्रेस)

इससे न तो उस पर गठबंधन साथियों के सामने झुक-झुक कर सरकार चलाने की मजबूरी होगी, न ही सबको साथ साधने में अपनी ऊर्जा खर्च करनी होगी। राहुल के पास भी वक्त होगा कि वह जिस तरह से पार्टी को युवाओं के हाथ में सौंपना चाहते हैं, उस दिशा में आगे बढ़ें।

पार्टी के एक धड़े के मुताबिक निचले स्तर से लेकर कांग्रेस कार्यसमिति और यहां तक कि पार्टी में महासचिव, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत तमाम पदों के लिए चुनाव कराने जैसी बातों को लागू करना चाहते हैं, वे सब करें। देश के सामने एक नई कांग्रेस पार्टी लेकर आएं। इसलिए विपक्ष में बैठना कांग्रेस को भविष्य के लिए तैयार करेगा, इसके बरक्स सत्ता में शामिल होने वाली पार्टियों पर डेलीवर करने का दबाव होगा और सरकार चलाने के क्रम में वे ग़लतियां भी करेंगी। सो वो वेट एंड वॉच सही रणनीति होगी। (इनपुट भाषा से भी)

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