मंदिरों और घाटों के लिए मशहूर वाराणसी शहर मतदान से पहले किले में तब्दील हो गया है, जहां कल निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान के लिए 45 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। यहां भाजपा के नरेंद्र मोदी और आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के बीच कड़ा मुकाबला है।
उत्तर प्रदेश के आला पुलिस अधिकारी खुद सुरक्षा हालात का जायजा लेने यहां आए हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव के सबसे अहम महा-मुकाबले के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। चुनाव आयोग ने एक विशेष पर्यवेक्षक की भी नियुक्ति की है।
शहर के लगभग हर हिस्से में और ग्रामीण इलाकों में सशस्त्र सुरक्षाकर्मी देखे जा सकते हैं। पुलिस ने कहा कि चुनावों के दौरान बूथ कैप्चर करने और धांधली समेत किसी भी तरह की आशंका नहीं होनी चाहिए।
पुलिस महानिरीक्षक प्रकाश डी (वाराणसी संभाग) ने कहा कि राज्य पुलिस, बीएसएफ, आरएएफ और सीआरपीएफ के सुरक्षाकर्मी पर्याप्त संख्या में तैनात किए गए हैं और निष्पक्ष तथा स्वतंत्र चुनावों के लिए हरसंभव कदम उठाए गए हैं। सभी 1562 मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है, जो सीसीटीवी निगरानी में हैं।
पुलिस ने पिछले दो दिन में अनेक इलाकों में छापे मारे हैं और एहतियातन जांच की है। ‘संवेदनशील’ क्षेत्र के तौर पर पहचाने गये इलाकों में कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने उन सभी लोगों से वाराणसी से जाने को कहा है जो प्रचार में शामिल रहे, लेकिन शहर में नहीं रहते। पुलिस यहां होटलों, अतिथिगृहों और धर्मशालाओं में छापे मारकर बाहरी लोगों का पता लगा रही है, जो वाराणसी के नहीं हैं और प्रचार में भाग ले रहे थे।
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