बीजेपी की तेलंगाना इकाई ने आज कहा कि पार्टी 30 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव और राज्य विधानसभा चुनाव क्षेत्र में अकेले लड़ेगी। इस तरह से संकेत दिया गया कि सीटों के बंटवारे को लेकर चंद्रबाबू नायडू की तेलुगूदेशम पार्टी के साथ बातचीत विफल रही।
अकेले चुनाव लड़ने के बीजेपी के फैसले की घोषणा करते हुए तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने यह भी कहा कि इस बाबत अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व लेगा।
रेड्डी ने शनिवार रात तेलंगाना की भाजपा की चुनाव समिति की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, 'हमने अकेले लड़ने का फैसला किया है, लेकिन अगर हमारा केंद्रीय नेतृत्व चाहेगा तो वे टीडीपी से गठबंधन के लिए और बातचीत कर सकते हैं।' बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक में भाग लिया।
पार्टी तेलंगाना क्षेत्र की सभी 17 लोकसभा सीटों और 119 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। रेड्डी ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया है।
उन्होंने कहा, 'जहां तक हमारी बात है, टीडीपी के साथ बातचीत समाप्त हो गई है। अब हमने अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।' बीजेपी के तेलंगाना के नेता शुरू से टीडीपी के साथ किसी तरह के गठबंधन के पक्ष में नहीं थे। हालांकि बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने टीडीपी को एक बार फिर एनडीए में शामिल होने का न्योता दिया था।
मोदी की पहल पर टीडीपी ने सकारात्मक रूप से जवाब दिया था और बीजेपी से फिर से जुड़ने के लिए आगे बढ़ी थी। टीडीपी और बीजेपी नेताओं के बीच पिछले कुछ दिन में सीटों के बंटवारे पर कई दौर की वार्ता हुई।
आंध्र प्रदेश के विभाजन के समर्थन और 'मोदी लहर' को देखते हुए बीजेपी ने 70 विधानसभा और 11 लोकसभा सीटें देने और मुख्यमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार का नाम घोषित करने की मांग की थी।
टीडीपी हालांकि बीजेपी की इन मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि टीडीपी को राज्य में फिर से मजबूत होने की आशा है।
बीजेपी नेताओं के साथ आज वार्ता के दौरान टीडीपी ने बीजेपी को 35 विधानसभा और 8 लोकसभा सीटों का प्रस्ताव दिया, लेकिन बीजेपी 45 विधानसभा और नौ लोकसभा सीटों पर अड़ी रही। इस कारण से गतिरोध पैदा हो गया और बीजेपी नेताओं ने कहा कि गठबंधन की योजना 'नाकाम' रही।
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