
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए की अपनी आखिरी रैली में अपनी पार्टी के विज़न डॉक्यूमेंट में उत्तर-पूर्व के लोगों के संबंध में लिखे गए विवादस्पद शब्दों पर सफाई भले ही दे दी हो, लेकिन लगता है, बीजेपी की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं।
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विज़न डॉक्यूमेंट में शिक्षा के मामले में दिल्ली के कॉलेजों में 85 प्रतिशत सीटें केवल दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित करने पर सवाल खड़ा किया है। नीतीश कुमार ने एक बयान जारी कर पूछा कि अगर 85 प्रतिशत सीटें केवल दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित हो जाएंगी, तब उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तर-पूर्व राज्यों से आने वाले हज़ारों छात्रों के भविष्य का क्या होगा।
नीतीश ने अपने बयान में कहा, "इस तरह का विचार दिल्ली की मिश्रित संस्कृति (composite culture) पर कुटिल व्यंग्य है... अगर ऐसे नियम-कायदे लागू किए गए, तो यह छात्रों और देश के लिए बीजेपी की नकारात्मक सोच को दर्शाता है..." नीतीश ने बीजेपी नेताओं से पूछा कि क्या बाहर के राज्यों के छात्रों को देश की राजधानी दिल्ली में पढ़ने का अधिकार नहीं है।
नीतीश कुमार के इस बयान से बीजेपी नेताओं के लिए न सिर्फ बिहार, बल्कि दिल्ली में भी मुश्किलें बढ़ेंगी, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने इन राज्यों के कई नेताओं, सांसदों को दिल्ली में बसे बिहार और उत्तर प्रदेश के निवासियों को जुटाने के काम पर लगाया हुआ है।
इस बीच, बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा है कि उनकी पार्टी दिल्ली में सरकार बनने पर कॉलेजों में सीटें बढ़ाएगी, लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि सिर्फ 15 फीसदी सीटों के जरिये दिल्ली से बाहर के छात्रों के साथ न्याय कैसे हो पाएगा।
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