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This Article is From May 23, 2014

अखिलेश की कलम से : मोदी मंत्रिमंडल में क्या मिलेगा सहयोगियों को...?

अखिलेश की कलम से : मोदी मंत्रिमंडल में क्या मिलेगा सहयोगियों को...?
नरेंद्र मोदी का फाइल चित्र
नई दिल्ली:

बीजेपी को लोकसभा में अपने बूते पर बहुमत हासिल है, जबकि सहयोगियों के साथ उसकी संख्या 336 है। बीजेपी के अलावा एनडीए की ऐसी 11 पार्टियां और हैं, जिन्होंने लोकसभा में सीटें जीती हैं, और इनमें से शिवसेना और तेलुगुदेशम पार्टी की संख्या दहाई के आंकड़े में है। अब जबकि मंत्रिमंडल के गठन के लिए माथापच्ची शुरू हो गई है, सवाल उठता है कि कितने सहयोगी दलों को मोदी सरकार में जगह मिलेगी और मंत्रिमंडल में उनकी कितनी हिस्सेदारी होगी।

मोदी सरकार में सहयोगी दलों को शामिल करने पर बातचीत का सिलसिला जल्दी ही शुरू होगा। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के सभी सहयोगी दलों को मोदी सरकार में जगह मिलने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए 26 मई को दिल्ली आएंगे, और अगर 26 को ही शपथग्रहण में सहयोगियों को भी शामिल करने का फैसला लिया जाता है तो इससे पहले उद्धव से बात हो सकती है।

उधर, तेलुगुदेशम पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू शनिवार को दिल्ली आ रहे हैं, और मोदी से मिलेंगे। टीडीपी को एक कैबिनेट और दो राज्यमंत्री मिल सकते हैं, और पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक गणपति राजू का नाम आगे चल रहा है। बिहार में मध्यावधि चुनावों की संभावना के मद्देनज़र रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को भी हिस्सेदारी मिल सकती है, जबकि उत्तर प्रदेश से अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी बतौर राज्यमंत्री सरकार में लिया जा सकता है। अकाली दल एकमात्र सहयोगी दल है, जिसने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया है, हालांकि बीजेपी इसके बावजूद उसे सरकार में शामिल होने का न्योता दे सकती है।

बीजेपी नेताओं के मुताबिक सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में जगह देने के लिए एक फार्मूले पर काम किया जा रहा है। इस फार्मूले से हर सहयोगी दल के न सिर्फ कैबिनेट और राज्यमंत्रियों की संख्या तय की जा रही है, बल्कि यह भी तय हो रहा है कि किस पार्टी के कितने मंत्री बनाए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक अभी तक के फार्मूले के मुताबिक लोकसभा के 13 सांसदों पर एक कैबिनेट मंत्री मिल सकता है। अगर मंत्रिमंडल का आकार छोटा कर सिर्फ 50 का रखा जाएगा तो हर सात सांसदों पर एक मंत्री बनेगा, जबकि 70 के मंत्रिमंडल पर यह संख्या पांच हो सकती है।

अगर मोदी मंत्रिमंडल सिर्फ 50 का रहता है तो देखा जाए कि किस पार्टी को कितना हिस्सा मिलेगा। तेलुगुदेशम पार्टी को लोकसभा में 16 सीटें मिली हैं, सो, इस लिहाज़ से उसका सिर्फ एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री बनता है, जबकि 18 सीटें हासिल करने वाली शिवसेना को एक कैबिनेट और दो राज्यमंत्री मिल सकते हैं। वैसे वाजपेयी सरकार में शिवसेना को ज्यादा हिस्सेदारी दी गई थी, लेकिन तब बीजेपी की सीटें 182 थीं, और अब बीजेपी के पास 282 सीटें हैं, सो, सहयोगी दलों की हिस्सेदारी अपने आप कम हो जाएगी।

इस फार्मूले के मुताबिक चलें, तो सहयोगी दलों में शिवसेना और टीडीपी को छोड़ किसी अन्य दल के सांसद को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया जा सकता। अन्य सहयोगी दलों में लोक जनशक्ति पार्टी को छह, अकाली दल को चार, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को तीन, और अपना दल को दो सीटें मिली हैं, और नगा पीपुल्स फ्रंट, नेशनल पीपुल्स पार्टी, पीएमके, स्वाभिमानी पक्ष और ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस को एक-एक सीट मिली है।

इस तरह मोदी को यह तय करना होगा कि लोकसभा में संख्याबल कम होने के बावजूद क्या सहयोगी पार्टियों को क्षेत्रीय संतुलन और उनके नेताओं के कद के हिसाब से मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए। मिसाल के तौर पर 13 सांसदों पर एक कैबिनेट मंत्री के फार्मूले के मुताबिक छह सांसदों वाले रामविलास पासवान को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया जा सकता, लेकिन बिहार में संभावित मध्यावधि चुनाव, पासवान वोटों से बीजेपी को मिली शानदार कामयाबी और पासवान के अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। मोदी ने दलित एजेंडे पर खास ध्यान दिया है, सो, ऐसे में पासवान के दावे को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा।

इसी तरह से नागालैंड में वर्ष 2003 से सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट के दावे को दरकिनार करना मुश्किल होगा, जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा जीतकर आए हैं। उत्तर-पूर्व को प्रतिनिधित्व देने के लिए इन नेताओं की दावेदारी भी बनती है। तमिलनाडु से बीजेपी का अपना एक सांसद है, जबकि पीएमके ने भी एक सीट जीती है। उधर, बगल के पुदुच्चेरी से भी बीजेपी के सहयोगी दल ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस को कामयाबी मिली है, इसीलिए क्षेत्रीय संतुलन बिठाने के लिए ऊपर दिए फार्मूले को नज़रअंदाज़ भी किया जा सकता है।

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