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UPSC से पहले IAS-IPS बनने के लिए होता था ये एग्जाम, लंदन में होती थी ट्रेनिंग

UPSC Exam History: यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग अपने 100 साल पूरे कर रहा है, ऐसे में लोग उस दौर को याद कर रहे हैं, जब अंग्रेजों ने ये व्यवस्था शुरू की थी और भारतीय युवाओं को परीक्षा देने लंदन जाना पड़ता था.

UPSC से पहले IAS-IPS बनने के लिए होता था ये एग्जाम, लंदन में होती थी ट्रेनिंग
UPSC से पहले ऐसे बनते थे सिविल सर्वेंट

संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC अपने 100 साल पूरे कर रहा है. पिछले कई दशकों से लगातार यूपीएससी देश को काबिल अफसर दे रहा है. हर साल लाखों युवा इस परीक्षा को देते हैं, लेकिन महज कुछ को ही सफलता मिलती है. हालांकि सिविल सेवा में अफसर बनने के लिए परीक्षा का चलन इतना भी नया नहीं है, ये प्रथा औपनिवेशिक काल से चली आ रही है और इसमें समय-समय पर बदलाव होते रहे. आज हम आपको बताएंगे कि यूपीएससी से पहले भारत में सिविल सर्वेंट कैसे बनते थे और इसके लिए कौन सी परीक्षा देनी होती थी. 

UPSC से पहले होती थी ये परीक्षा

भारत में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) से कई साल पहले ब्यूरोक्रेसी की शुरुआत हो चुकी थी. गवर्नर-जनरल लॉर्ड कॉर्नवालिस ने 1786 से 1793 के दौरान इसकी शुरुआत की थी. ये वो दौर था, जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत के तमाम हिस्सों पर अपना कब्जा कर रही थी. इन इलाकों में काम करने के लिए एक प्रशासन की जरूरत थी, जिसका काम लगान वसूलने से लेकर न्याय व्यवस्था और कानून व्यवस्था बनाए रखना था. 

शुरुआत में तो ये पद उन अंग्रेजों को दिए जाते थे, जो हुकूमत के करीबी होते थे. कई साल बाद 1855 में बड़ा बदलाव हुआ और 'इंडियन कोवेनेंटेड सिविल सर्विस' (ICS) के लिए खुली प्रतियोगी परीक्षा शुरू की गई. तब भारत में तैनात होने वाले अफसरों के लिए परीक्षा लंदन में हुआ करती थी. यही वजह है कि भारतीय युवाओं के लिए ये एक दूर की कौड़ी थी, वहीं परीक्षा के स्तर को मैच करना भी एक बड़ी चुनौती थी. हालांकि इसके बावजूद कुछ भारतीयों ने ये कमाल कर दिखाया. 

कांग्रेस की स्थापना के बाद से ही ये एक बड़ा मुद्दा बन गया और मांग उठने लगी कि भारत में भी इस परीक्षा को कराया जाना चाहिए. करीब 67 साल की लंबी लड़ाई के बाद 1922 में भारत में इलाहाबाद में पहली बार ये ICS परीक्षा हुई. इसके बाद 1 अक्टूबर 1926 को 'पब्लिक सर्विस कमीशन' (लोक सेवा आयोग) का गठन हुआ. जिसे इस बड़ी परीक्षा की जिम्मेदारी दी गई. बाद में ICS को IAS कर दिया गया, जिसमें सरदार पटेल का बड़ा हाथ रहा.

भारत के पहले IAS अफसर

भारत के पहले आईएएस अफसर यानी सिविल सर्वेंट सत्येंद्रनाथ टैगोर थे. 1863 में उनका चयन सिविल सर्विस के लिए हुआ और फिर लंदन ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ा. उन्होंने 1864 में वापसी की और अहमदाबाद के सहायक मैजिस्ट्रेट और कलेक्टर के पद पर उनकी तैनाती हुई. करीब 30 साल तक सेवा में रहने के दौरान उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया. सत्येंद्रनाथ टैगोर महान कवि रबींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे. 

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