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कोयला नगरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, फिश हैचरी; IAS गौरव बैनल की पहल, बदल रही शिक्षा, खेल और रोजगार की तस्वीर

IAS गौरव बैनल के नेतृत्व में सिंगरौली में CSR आधारित विकास मॉडल चर्चा में है. NEET कोचिंग, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, महिला स्वरोजगार, टेलीस्कोप और आधुनिक सुविधाओं के जरिए युवाओं और छात्रों को नए अवसर मिल रहे हैं.

कोयला नगरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, फिश हैचरी; IAS गौरव बैनल की पहल, बदल रही शिक्षा, खेल और रोजगार की तस्वीर
IAS गौरव बैनल की पहल से सिंगरौली में खिल रहे हजारों युवाओं के सपने
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  • कोयले की नगरी में खिल रहे नए सपने, IAS गौरव बैनल की पहल से बदल रही ऊर्जा राजधानी सिंगरौली की तस्वीर
  • सरकारी स्कूल के बच्चों को NEET कोचिंग, खेल और विज्ञान का नया मंच
  • महिलाओं को स्वरोजगार, छात्रों को विज्ञान से जोड़ रही अनोखी पहल
सिंगरौली:

मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचाना जाता है. यहां कोयला खदानें, बिजली परियोजनाएं और भारी उद्योग विकास की पहचान रहे हैं. लेकिन अब इस औद्योगिक जिले में बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है. IAS गौरव बैनल के नेतृत्व में सिंगरौली में CSR आधारित विकास मॉडल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा में है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके प्रयासों ने सिंगरौली को नई दिशा देने की उम्मीद जगाई है. यहां NEET कोचिंग, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, महिला स्वरोजगार, टेलीस्कोप और आधुनिक सुविधाओं के जरिए युवाओं और छात्रों को नए अवसर मिल रहे हैं. आइए देखते हैं बदलाव की कहानी.

गांव से निकलकर ऑनलाइन क्लास तक पहुंचा डॉक्टर बनने का सपना

सिंगरौली जिले के देवसर क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला 17 वर्षीय राहुल डॉक्टर बनना चाहता है. उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी. बड़े शहरों की महंगी कोचिंग और संसाधन उसके जैसे छात्रों की पहुंच से बाहर होते हैं.

जिला प्रशासन ने इसी चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश की है. मॉडल और उत्कृष्ट विद्यालयों, कन्या शिक्षा परिसर तथा एकलव्य विद्यालयों के 200 से अधिक बायोलॉजी के स्टूडेंट्स को ऑनलाइन NEET कोचिंग उपलब्ध कराई जा रही है.

इसके लिए ALLEN इंस्टीट्यूट की ऑनलाइन कक्षाओं का उपयोग किया जा रहा है, इसमें आदित्य बिरला समूह CSR के माध्यम से सहयोग कर रहा है. यह पहल उन छात्रों के लिए खास महत्व रखती है जो प्रतिभाशाली हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में पीछे रह जाते हैं.

सिंगरौली कलेक्टर IAS गौरव

सिंगरौली कलेक्टर IAS गौरव बैनल

कौन हैं कलेक्टर गौरव बैनल?

आईएएस गौरव बैनल 2016 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं. उन्होंने यूपीएससी 2015 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 249 हासिल की थी. IIT रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना. वर्तमान में वह सिंगरौली कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले वे स्मार्ट सिटी भोपाल, खरगोन जिला पंचायत के सीईओ और इंदौर में अपर कलेक्टर की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं.

गौरव की स्कूली शिक्षा उज्जैन, इंदौर और खरगोन के कई स्कूलों में हुई. उन्होंने बताया कि कक्षा 9 में पढ़ते समय केंद्रीय विद्यालय उज्जैन में एक अविस्मरणीय घटना हुई. स्कूल के प्राचार्य के बेटे, जो उस समय आर्मी में मेजर थे, वो स्कूल में प्रेरणादायक भाषण देने आए. यह भाषण गौरव के जीवन में ऐसा मोड़ था, जिसने उन्हें पहली बार वर्दी और देशसेवा की तरफ आकर्षित किया.

समय के साथ यह प्रेरणा आर्मी से आगे बढ़कर एयरफोर्स की दिशा में चली गई. लेकिन, अंत में उन्होंने तय किया कि उन्हें आईएएस बनना है और पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई करेंगे. आईआईटी की तैयाई की, अच्छी रैंक आयी और आईआईटी रुड़की में प्रवेश मिल गया.

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद गौरव ने निर्णय किया कि उनका असली मार्गदर्शन देश की प्रशासनिक सेवा में है. उन्होंने तय किया कि वे ऐसे पद में काम करना चाहते हैं जहां देश के लिए वास्तविक, ठोस योगदान दे सकें.

दिल्ली में UPSC की तैयारी के लिए परिवार ने पूरा समर्थन दिया.IAS गौरव बैनल बताते हैं घर से मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं था. माता-पिता ने कहा जो मन कहे वही करो. बस पूरे दिल से करो.

निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स की जानकारी लेते हुए सिंगरौली कलेक्टर

निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स की जानकारी लेते हुए सिंगरौली कलेक्टर

14 करोड़ का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, युवाओं के सपनों को नई उड़ान

सिंगरौली के युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार भी उनकी प्राथमिकता में शामिल है. NCL के CSR सहयोग से करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है.

इस परिसर में चार टेनिस कोर्ट, चार इंडोर बैडमिंटन कोर्ट, स्विमिंग पूल, बास्केटबॉल कोर्ट और क्रिकेट नेट जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. विशेष बात यह है कि सरकारी स्कूलों और छात्रावासों के बच्चों को भी इन सुविधाओं से जोड़ने की योजना बनाई गई है.

युवा खिलाड़ी देवराज वाल्मीकि इस पहल की सराहना करते हुए कहते हैं, "आईएएस अधिकारी तो इस जिले में कई आए और चले गए, लेकिन युवाओं के भविष्य और उनकी प्रतिभा के लिए इतनी गंभीरता से सोचने वाला अधिकारी शायद पहली बार मिला है. कलेक्टर गौरव बैनल ने सिर्फ एक भवन बनाने की पहल नहीं की, बल्कि हजारों युवाओं के सपनों को एक मंच देने का काम किया है."

सिंगरौली में तैयार किया गया स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

सिंगरौली में तैयार किया गया स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

जीर गांव की महिलाओं को मिला स्वरोजगार का सहारा

सिंगरौली के जीर ग्राम पंचायत क्षेत्र में CSR का एक अलग रूप दिखाई देता है. यहां विकास किसी भवन या सड़क के रूप में नहीं, बल्कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के रूप में सामने आ रहा है.

लगभग 90 महिलाओं ने स्वरोजगार में रुचि दिखाई. इनमें से करीब 35 महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण देने के साथ पेशेवर सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गईं. इसके अलावा 30-30 महिलाओं को बकरी पालन और पोल्ट्री से जुड़े प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है.

स्थानीय स्तर पर यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

स्कूली छात्रों के बीच टेलिस्कोप

स्कूली छात्रों के बीच टेलिस्कोप

सरकारी स्कूल के बच्चों के हाथ में पहुंचा टेलीस्कोप

सिंगरौली में विज्ञान शिक्षा को रोचक और व्यवहारिक बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं. बैढ़न के सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को टेलीस्कोप उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे अंतरिक्ष और खगोलीय दुनिया को करीब से देख सकें.

कक्षा 12वीं की छात्रा रागिनी कहती हैं, 'पहले हम किताबों और मोबाइल में ही ग्रहों, तारों और चंद्रमा के बारे में पढ़ते थे, लेकिन टेलीस्कोप से उन्हें अपनी आंखों से देखने का अनुभव बिल्कुल अलग है.'

वह आगे कहती हैं, 'यह टेलीस्कोप सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि हमारे सपनों और वैज्ञानिक सोच को नई उड़ान देने का माध्यम है.'

मछली पालन को मिलेगी स्थानीय ताकत

जिले में लगभग 70 लाख रुपये की लागत से आधुनिक फिश हैचरी विकसित करने की योजना बनाई गई है. वर्तमान में मछली बीज के लिए दूसरे जिलों पर निर्भरता रहती है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं. स्थानीय स्तर पर मछली बीज उपलब्ध होने से मत्स्य पालकों की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे स्तर की ऐसी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं.

बेटियों के लिए तैयार हो रहे नए अवसर

कन्या शिक्षा परिसर में बैडमिंटन, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और पिकलबॉल जैसी खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं. वहीं बालिका कॉलेज में बास्केटबॉल कोर्ट का निर्माण जारी है. मेडिकल कॉलेज में भी बास्केटबॉल, बैडमिंटन, स्नूकर और टेबल टेनिस जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. इन प्रयासों को केवल खेल सुविधाओं के रूप में नहीं, बल्कि बेटियों के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने वाली पहल माना जा रहा है.

400 सीटों वाला आधुनिक ऑडिटोरियम भी बन रहा

निर्माणाधीन पीजी कॉलेज परिसर में लगभग 400 सीटों वाला आधुनिक ऑडिटोरियम तैयार किया जा रहा है. यहां शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे. स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे बुनियादी ढांचे युवाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराने के साथ जिले की सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई पहचान देंगे.

सिंगरौली की नई पहचान गढ़ने की कोशिश

स्थानीय शिक्षक अरविंद पाण्डेय कहते हैं, 'कई अधिकारी आए और चले गए, लेकिन पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि किसी ने सिंगरौली को सिर्फ कोयला उत्पादन के आंकड़ों से नहीं, बल्कि यहां के बच्चों और युवाओं के सपनों से जोड़कर देखने की कोशिश की है.'

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