- जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सलवाह गांव की आदिवासी परिवार से आईएएस रेहाना बशीर और आईआरएस आमिर बशीर हैं
- पिता के निधन के बाद मां परवीन अख्तर ने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद बच्चों की पढ़ाई जारी रखी
- आमिर बशीर ने इंजीनियरिंग के बाद UPSC परीक्षा में लगातार प्रयास कर भारतीय राजस्व सेवा में चयन पाया
IAS रेहाना बशीर और IRS आमिर बशीर की यह सक्सेस स्टोरी संघर्ष, संकल्प और पारिवारिक एकता की मिसाल है. अफसर भाई-बहन की यह जोड़ी जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले पुंछ की मेंढर तहसील के सलवाह गांव की एक आदिवासी परिवार से है. साल 2006 में पिता मोहम्मद बशीर के निधन के बाद मां परवीन अख्तर इनकी सबसे बड़ी ताकत बनी. आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी. घर का माहौल ऐसा था जहां भाई-बहन एक-दूसरे का सहारा बनकर आगे बढ़ते रहे और मां उन्हें हर मुश्किल में हिम्मत देती रहीं. नतीजा यह रहा कि दोनों भाई बहन भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय राजस्व सेवा के अफसर बनने में सफल हो गए.

मां परवीन अख्तर के साथ IRS आमिर बशीर और IAS रेहाना बशीर पुंछ जम्मू-कश्मीर. Photo Credit: Social Media
भाई का इंजीनियरिंग से UPSC तक का सफर
रेहाना और आमिर के पिता मोहम्मद बशीर स्टेट फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन में कर्मचारी थे. साल 2006 में लंबी बीमारी के कारण उनका निधन हो गया. तब रेहाना बशीर 14 वर्ष और उनके भाई आमिर बशीर की उम्र महज 13 साल थी. आमिर बशीर ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा देने का फैसला किया. उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2016 में ऑल इंडिया रैंक 1087 हासिल की. इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 2017 में ऑल इंडिया रैंक 843 प्राप्त की. लगातार प्रयासों का परिणाम यह रहा कि उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में हो गया.
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आमिर बशीर ने UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 843 प्राप्त की और भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी बने. Photo Credit: Social Media
बहन डॉक्टर बनीं, फिर आईएएस अफसर
दूसरी ओर, आमिर बशीर की बहन रेहाना बशीर ने शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज से मेडिकल की पढ़ाई की. इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई चुनौतियों को करीब से देखा. इसी अनुभव ने उन्हें प्रशासनिक सेवा की ओर प्रेरित किया. उनके भाई की UPSC यात्रा ने भी उन्हें नई दिशा दी और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी.

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पहली असफलता के बाद भी नहीं मानी हार
रेहाना अपने पहले प्रयास में सफलता नहीं पा सकीं, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं छोड़ा. कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने फिर कोशिश की और UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2018 में ऑल इंडिया रैंक 187 हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हुईं. उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर आवंटित हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पुंछ जिले की पहली महिला बनीं जिन्होंने IAS अधिकारी बनने का यह मुकाम हासिल किया.
मां का सपना हुआ पूरा
मां परवीन अख्तर के लिए बच्चों की यह सफलता किसी रैंक या प्रतिष्ठित नौकरी से कहीं बढ़कर थी. यह उस सपने का सच होना था, जिसे उन्होंने और उनके दिवंगत पति ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए देखा था. जिस परिवार ने कभी पिता को खोने का दर्द झेला था, उसी घर से आगे चलकर एक IAS और एक IRS अधिकारी निकले. यह कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियां रास्ता रोक सकती हैं, लेकिन मजबूत इरादों को नहीं.
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