- IPS सिमरन भारद्वाज को केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक मिला है. रेप के आरोपी को 40 दिन में फांसी की सजा दिलवाई
- हरियाणा के रेवाड़ी जिले की रहने वाली सिमरन भारद्वाज गुजरात कैडर में पहली पोस्टिंग
- 2022 बैच की आईपीएस सिमरन भारद्वाज राजकोट ग्रामीण पुलिस में एएसपी के पद तैनात
IPS Simran Bhardwaj: गुजरात कैडर में भारतीय पुलिस सेवा की 2022 बैच की अधिकारी सिमरन भारद्वाज को 31 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक मिला है. गुजरात की राजकोट ग्रामीण पुलिस में सहायक पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात सिमरन भारद्वाज को यह अवार्ड 7 साल की बच्ची से रेप करने वाले आरोपी को महज 40 दिन में फांसी की सजा दिलवाने वाले मामले में दिया गया है. सिमरन भारद्वाज हरियाणा के एक छोटे से गांव में पली-बढ़ी हैं. उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की, फिर UPSC क्रैक कर IPS बनीं और अब गुजरात पुलिस में पहली ही पोस्टिंग में बेहतरीन पुलिसिंग की मिसाल बन गई हैं.

IPS सिमरन भारद्वाज को केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक 2026 से सम्मानित किया गया है. Photo Credit: IPS Simran Bhardwaj
रेप केस में 12 दिन में चार्जशीट पेश की
हरियाणा की IPS बेटी सिमरन भारद्वाज ने इस रेप केस में महज 12 दिन में तमाम पुख्ता सबूतों के साथ आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट तक पेश कर दी थी. बच्ची छोटी होने के कारण मामले की सही दिशा में जांच करना आसान नहीं था. जांच के दौरान एएसपी सिमरन भारद्वाज और उनकी टीम को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. कई दिन तक तो वे खुद ठीक से सो भी नहीं पाईं. रेप के बाद आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज होने से लेकर जज द्वारा आरोपी को मौत की सजा सुनाए जाने तक की पूरी कहानी IPS सिमरन भारद्वाज ने NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताई है.
रेपिस्ट ने बच्ची के प्राइवेट पार्ट में सरिया घुसाया
IPS सिमरन भारद्वाज ने बताया कि राजकोट ग्रामीण पुलिस के आटकोट पुलिस स्टेशन क्षेत्र में मध्य प्रदेश के कई परिवार रहते हैं, जो खेतों में मजदूरी करते हैं. आटकोट कस्बे में 4 दिसंबर 2025 की दोपहर बच्चे खेल रहे थे. रेमसिंह उर्फ रामसिंह वहां पहुंचा. सात वर्षीय बच्ची को खेलता देखकर वह अपने घर गया, लोहे का सरिया लेकर आया और बच्ची को अपने साथ ले गया. उसने उसके साथ रेप किया और जान से मारने की नीयत से उसके प्राइवेट पार्ट में 3 सेंटीमीटर लंबा सरिया घुसा दिया, जिससे बच्ची चीखने-चिल्लाने लगी. आवाज सुनकर अन्य बच्चे वहां पहुंच गए तो आरोपी बच्ची को छोड़कर भाग गया.
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सिमरन भारद्वाज गुजरात की राजकोट ग्रामीण पुलिस में सहायक पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात हैं Photo Credit: IPS Simran Bhardwaj
पहली चुनौती: वारदात के बाद सहम गई बच्ची
बच्ची से रेप की सूचना मिलने पर राजकोट ग्रामीण पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी की तलाश शुरू की. आसपास के इलाकों में संदिग्धों से पूछताछ की गई. दो दिन तक पुलिस टीम ठीक से सो भी नहीं पाई. आरोपी को पकड़ लिया गया और उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई. एएसपी सिमरन भारद्वाज को जांच सौंपी गई. जांच में सबसे पहली और बड़ी समस्या यह थी कि वारदात के बाद बच्ची बेहद सहम गई थी. वह ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी और पुलिस को देखकर डर रही थी. दो महिला पुलिस कांस्टेबल 24 घंटे बच्ची के साथ रहीं ताकि वह उनके साथ सामान्य हो सके.
दूसरी चुनौती: पुलिस की गाड़ी में चॉकलेट और खिलौने
रेप के बाद बच्ची को कई बार पुलिस की गाड़ी से लाना-ले जाना हुआ. इस दौरान पुलिस की गाड़ी में उसके लिए चॉकलेट और खिलौने रखे गए. एम्स में चाइल्ड विशेषज्ञ से उसकी काउंसलिंग करवाई गई. अब दूसरी बड़ी चुनौती जज के सामने उसके BNS की धारा 163 के तहत बयान दर्ज करवाने की थी. बातों-बातों में पता चला कि बच्ची स्कूल में दाखिले को लेकर काफी उत्साहित है. ऐसे में उसके सामने स्कूल में दाखिले और दाखिले से पहले इंटरव्यू का एक माहौल तैयार किया गया, ताकि उसे यह समझाया जा सके कि उसे अपनी आपबीती कैसे बतानी है. इससे आरोपी के खिलाफ पुख्ता चार्जशीट पेश करने में मदद मिल सके.
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सिमरन भारद्वाज को अवार्ड 7 साल की बच्ची से रेप करने वाले आरोपी को 40 दिन में फांसी की सजा दिलवाने वाले मामले में दिया गया है. Photo Credit: @rajkotruralpolice
तीसरी चुनौती: जज के सामने बयान दर्ज करवाया
IPS सिमरन भारद्वाज के अनुसार बच्ची को बताया गया कि स्कूल में नाम लिखवाने के लिए एक छोटा सा टेस्ट है, जो उसे पास करना होगा. जबकि असल में वह उसके धारा 163 के बयान दर्ज करवाने की कोशिश थी. बच्ची को गुलाबी रंग की ड्रेस पसंद थी. इसलिए उस दिन सभी पुलिसकर्मी वर्दी की बजाय सफेद और गुलाबी रंग के कपड़ों में पहुंचे. महिला जज ने भी बच्ची की मानसिक स्थिति का पूरा ध्यान रखा और सामान्य कपड़े पहने. बच्ची के लिए कमरे में ढेर सारी चॉकलेट और खिलौने रखवाए गए. बयान के दौरान वह बीच में रोने लगी और गोलगप्पे खाने की इच्छा जताई. जज ने अपने कक्ष में ही उसके साथ क्रिकेट खेला. इसी तरह सामान्य माहौल में उसके बयान दर्ज किए गए.

हरियाणा के रेवाड़ी की IPS बेटी सिमरन भारद्वाज को केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक 2026. गुजरात में राजकोर्ट ग्रामीण एएसपी हैं. Photo Credit: IPS Simran Bhardwaj
चौथी चुनौती: बच्ची ने आरोपी की पहचान कैसे की?
बयानों के बाद आरोपी की शिनाख्त की बारी थी. इस चौथी चुनौती को पार करना भी आसान नहीं था. आठ लोगों के बीच से उसे वारदात को अंजाम देने वाले व्यक्ति की पहचान करनी थी. सभी के हाथों में खिलौने दिए गए. कभी क्रिकेट की गेंद तो कभी अन्य खिलौने. हर बार बच्ची ने सही आरोपी की पहचान की और खिलौने के आधार पर बताया कि वही व्यक्ति अपराधी है. खास बात यह रही कि बच्ची आरोपियों को देख सकती थी, लेकिन आरोपी बच्ची को नहीं देख पा रहे थे. यह पूरी प्रक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड की गई.समय पर FSL जांच करवाई गई. सरिए पर मिला खून बच्ची के खून से मेल खा गया. सभी सबूतों के आधार पर FIR दर्ज होने के महज 12 दिन के भीतर चार्जशीट पेश कर दी गई.

पांचवीं चुनौती: परिजनों को गवाही के लिए तैयार करना
रेप पीड़िता बच्ची को न्याय दिलाने के लिए उसके परिजनों और अन्य गवाहों को गवाही के लिए तैयार करना पांचवीं चुनौती था. वे कम पढ़े-लिखे थे. पुलिस की गाड़ी देखते ही घबरा जाते थे और कोर्ट-कचहरी के झंझट में नहीं पड़ना चाहते थे. धीरे-धीरे उन्हें भरोसे में लेकर गवाही के लिए तैयार किया गया. वहीं, बच्ची कोर्ट परिसर की भीड़ और वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को देखकर डर जाती थी. ऐसे में जब भी बच्ची को कोर्ट लाने की जरूरत पड़ती, आसपास मौजूद पुलिसकर्मियों को एक कमरे में भेज दिया जाता और कोर्ट का पूरा कॉरिडोर खाली करवा दिया जाता था. बच्ची के वापस जाने के बाद ही सामान्य व्यवस्था बहाल की जाती थी.
छठी चुनौती: बच्ची ने किया डिफेंस वकील के सवालों का सामना
रेप केस की सुनवाई के दौरान छठी चुनौती पार करते समय ऐसा भी लगा कि मामला कोर्ट में कमजोर पड़ सकता है और आरोपी सख्त सजा से बच जाएगा. कारण यह था कि डिफेंस वकील बच्ची से ऐसे सवाल पूछ रहा था, जिनकी तैयारी पुलिस ने उसे नहीं करवाई थी. बच्ची को टॉय कार में बैठाकर कोर्ट लाया गया था. डिफेंस वकील ने उससे पूछा कि क्या आरोपी ने उसे चॉकलेट का लालच देकर अपने पास बुलाया था? आमतौर पर ऐसे मामलों में छोटी बच्चियां कई बार ऐसे प्रश्नों का उत्तर हां में दे देती हैं, जिससे केस की दिशा प्रभावित हो सकती है. लेकिन बच्ची ने साफ कहा कि आरोपी ने उसे चॉकलेट का लालच नहीं दिया था. उसका यह जवाब भी आरोपी को सजा दिलाने में मजबूत आधार साबित हुआ.

राजकोट पुलिस अधीक्षक IPS विजय सिंह गुर्जर बोले- ASP सिमरन भारद्वाज का काम सराहनीय
NDTV से बातचीत में राजकोट पुलिस अधीक्षक विजय सिंह गुर्जर ने कहा कि बच्ची से रेप के मामले में जांच अधिकारी के रूप में IPS सिमरन भारद्वाज ने बेहतरीन कार्य किया है. FIR दर्ज होने के महज 12 दिन में चार्जशीट पेश की गई और 40 दिन के भीतर आरोपी को फांसी की सजा दिलवाई गई.
उधर, राजकोट ग्रामीण पुलिस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, "केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक-2026. आटकोट पुलिस स्टेशन के G.R. No. 0570/2025 के तहत 6 साल 8 महीने की मासूम बच्ची के साथ रेप करने और फरार हुए आरोपी को गिरफ्तार किया गया. महज 12 दिनों में कोर्ट में मजबूत चार्जशीट पेश की गई. ASP सुश्री सिमरन भारद्वाज की त्वरित कार्रवाई के कारण सिर्फ 40 दिनों में कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई और आरोपी को मौत की सजा सुनाई गई."
पुलिस ने आगे लिखा, "ASP सुश्री सिमरन भारद्वाज की यह गौरवपूर्ण उपलब्धि उनकी लगन, समर्पण और कुशलता का प्रतीक है. हम कामना करते हैं कि वे भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट कार्य से पुलिस विभाग का गौरव बढ़ाती रहें. राजकोट रूरल पुलिस परिवार को इस उपलब्धि पर गर्व है."
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