महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) पेपर लीक मामले की जांच में दबंग IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की एंट्री हो चुकी है. तेज तर्रार अधिकारी की एंट्री के साथ ही छात्रों ने पिछले कई दिनों से चल रहा अपना आंदोलन खत्म कर दिया है. राज्य के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत के बाद जांच आयोग के गठन, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को अहम जिम्मेदारी सौंपने और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे फैसलों की जानकारी दी. तुकाराम मुंढे ने इससे पहले FDA कमिश्नर रहते हुए नकली सामान बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है, उन्हें अब पेपर लीक मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई है.
तुकाराम मुंढे को जांच आयोग में अहम जिम्मेदारी
MPSC मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग गठित करने की घोषणा की गई है. बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले इस आयोग की अध्यक्षता करेंगे, जबकि वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है. आयोग एमपीएससी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की जांच करेगा. आयोग को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का प्रस्ताव है. तुकाराम मुंढे को ये जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और आयोग की विश्वसनीयता को लेकर छात्रों में नाराजगी है.
विवेक भीमनवार जांच पूरी होने तक छुट्टी पर
आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की थी. इस मामले में भी सरकार की ओर से अहम कदम उठाया गया है. भीमनवार ने घोषणा की है कि न्यायिक जांच पूरी होने तक वो पद पर कार्यरत नहीं रहेंगे और इस अवधि में छुट्टी पर रहेंगे. उन्होंने अपने बयान में कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में नैतिकता को प्राथमिकता दी है. एमपीएससी की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और विद्यार्थियों के हित हमेशा उनकी प्राथमिकता रहे हैं और आगे भी रहेंगे.
छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने का आश्वासन
सरकार ने आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का भी आश्वासन दिया है. इसके अलावा, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और एमपीएससी की कार्यप्रणाली में सुधार से जुड़ी मांगों पर विचार करने की बात कही गई है. छात्र लंबे समय से कथित पेपर लीक मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और भर्ती प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाने की मांग कर रहे थे.
भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी अहम ऐलान
आंदोलन के दौरान भर्ती से संबंधित अन्य मांगें भी उठाई गईं. सरकार की ओर से 2027 की समूह-सी भर्ती परीक्षा में पदों की संख्या दोगुनी करने और अगले तीन साल में 70 हजार रिक्त पद भरने का आश्वासन दिए जाने की जानकारी सामने आई है.
कई दिनों से जारी था आंदोलन
पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन कई दिनों से जारी था. छात्र आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे थे. मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले के साथ बातचीत और सरकार की घोषणाओं के बाद आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया गया. अब इस मामले में जांच आयोग की रिपोर्ट, कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करने और सरकार के आश्वासनों पर अमल को लेकर नजर रहेगी.
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