डॉक्टर बनना देश में लाखों युवाओं का सपना होता है. लेकिन जरा सोचिए कोई दिन-रात एक करके मेडिकल की पढ़ाई करे, एक शानदार और सेफ करियर बनाए और फिर सब कुछ छोड़कर देश की सबसे मुश्किल परीक्षा (UPSC) की तैयारी में लग जाए. सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन कुछ युवाओं ने इस मुश्किल रास्ते को चुना और कामयाबी की नई मिसाल पेश की. आज हम आपको ऐसे ही 5 डॉक्टरों की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने स्टेथोस्कोप छोड़कर सिविल सर्विस को चुना और IAS-IPS बनकर सिस्टम बदलने की ठानी. पढ़िए 5 डॉक्टरों के अफसर बनने की सक्सेस स्टोरी..
डॉ. अनुज अग्निहोत्री
राजस्थान के रावतभाटा के रहने वाले डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने UPSC 2025 की परीक्षा में पूरे देश में पहली रैंक हासिल की है. अनुज ने साल 2023 में AIIMS जोधपुर से अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी की थी. डॉक्टरी की पढ़ाई के साथ ही उन्होंने ठान लिया था कि उन्हें अफसर बनना है. साल 2023 में उन्होंने परीक्षा पास की और दिल्ली में SDM के पद पर काम किया. लेकिन उनका लक्ष्य और भी बड़ा था. अपने तीसरे अटेंप्ट में उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और सीधे ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर ली.
डॉ. रीतिका आइमा
उत्तराखंड की डॉ. रीतिका आइमा की कहानी बहुत खास है. हल्द्वानी से MBBS करने के बाद उनकी ड्यूटी कोरोना महामारी के दौरान एक सरकारी हेल्थ सेंटर में लगी. वहां उन्होंने देखा कि एक डॉक्टर होने के नाते वह एक बार में सिर्फ एक ही मरीज की जान बचा सकती हैं. लेकिन अगर पूरे हेल्थ सिस्टम और अस्पतालों की हालत सुधारनी है, तो प्रशासन (Administration) का हिस्सा बनना होगा.
डॉ. राजदीप सिंह खैरा
अगर आप एक-दो बार फेल होने पर निराश हो जाते हैं, तो डॉ. राजदीप की कहानी आपको जरूर पढ़नी चाहिए. पंजाब के पटियाला से MBBS करने के बाद वह एक मेडिकल ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे थे। लेकिन मन में IAS बनने की जिद थी. उन्होंने नौकरी छोड़ दी और तैयारी शुरू की, लेकिन एक के बाद एक लगातार 4 बार फेल हो गए. पांचवें प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स और मेन्स तो निकाल लिया, लेकिन इंटरव्यू से ठीक पहले उनके पिता का निधन हो गया. इस पहाड़ जैसे दुख के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला, इंटरव्यू दिया और 495वीं रैंक के साथ IAS अफसर बनकर अपने पिता का सपना पूरा किया.
डॉ.अंकुर लाठर
हरियाणा के एक छोटे से गांव राजगढ़ की रहने वाली डॉ. अंकुर लाठर (Dr. Ankur Lather) बचपन से ही पढ़ाई में बहुत तेज थीं. पिता जानवरों के डॉक्टर थे, तो बेटी ने भी दिल्ली के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान AIIMS से MBBS किया. उनका फ्यूचर एकदम सेट था, पैसों की कोई कमी नहीं थी. लेकिन देश सेवा का जज्बा उन्हें UPSC की तरफ खींच लाया. पहले प्रयास में उन्हें निराशा हाथ लगी, लेकिन वह रुकने वालों में से नहीं थीं. अपनी शानदार मेहनत के दम पर साल 2016 में उन्होंने 77वीं रैंक हासिल की और IAS अफसर बन गईं. आज उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले की जिलाधिकारी (DM) हैं.
डॉ. अनिल कुमार
राजस्थान के झुंझुनू के रहने वाले डॉ. अनिल कुमार बचपन में 5वीं क्लास के एक एंट्रेंस एग्जाम में फेल हो गए थे. लेकिन उस फेलियर ने उनके अंदर ऐसी आग लगाई कि वह स्कूल के बेस्ट स्टूडेंट बन गए. जोधपुर से MBBS करने के बाद वह दिल्ली के बड़े अस्पतालों में डॉक्टर रहे. वहीं से उन्हें UPSC करने का जुनून सवार हुआ. आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि उन्होंने एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे 5 बार UPSC की परीक्षा पास की. साल 2016 में उन्हें अपना मनपसंद IPS का पद मिला. आज वह यूपी पुलिस के सबसे सख्त और दबंग अफसरों में गिने जाते हैं.
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