NEET पेपर लीक को लेकर हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज तमाम FIR को रद्द कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्पेशल पावर आर्टिकल 142 का इस्तेमाल कर सभी मामलों को एक साथ रद्द कर दिया. इससे पहले केंद्र सरकार की तरफ से अपील करते हुए कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIRs को खत्म कर दे. अब ये खबर आते ही आर्टिकल 142 को लेकर चर्चा तेज हो गई है. लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर आर्टिकल 142 क्या है, इसका संबंध सुप्रीम कोर्ट से कैसे है और इसका इस्तेमाल कब किया जाता है.
क्या है आर्टिकल 142?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी भी लंबित मामले में "पूर्ण न्याय" (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री जारी करने का विशेष अधिकार देता है. इसका मतलब है कि अगर अदालत को लगता है कि सामान्य कानूनी प्रक्रिया (Standard legal procedure) से न्याय पूरा नहीं हो पाएगा, तो फिर सर्वोच्च अदालत इसका इस्तेमाल कर सकती है.
संविधान में साफ कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ऐसा कोई भी आदेश पारित कर सकता है, जो किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए जरूरी हो. अदालत के ऐसे आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं.
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन हुआ था, इस दौरान दिल्ली पुलिस के साथ छात्रों की झड़प हुई और लाठीचार्ज भी हुआ. प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों की पहचान कर उनके खिलाफ मामले दर्ज हुए, लेकिन बाद में छात्र नेताओं के कहने पर इन्हें वापस लेने पर सहमति बनी. सुप्रीम कोर्ट में मामला गया और कोर्ट ने भी कहा कि अगर एफआईआर रद्द करने में कोई दिक्कत है तो वो अपनी स्पेशल पावर यानी आर्टिकल 142 का इस्तेमाल कर सकता है. इसके कई दिनों बाद अब दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार ने कोर्ट से सभी एफआईआर एक साथ रद्द करने की अपील की.
यह भी पढ़ें- NEET PG री-एग्जाम के लिए क्या होंगे नियम? नए एडमिट कार्ड से लेकर एग्जाम सेंटर तक, यहां जानें हर सवाल का जवाब
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं