IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद से ही एक बार फिर पढ़ाई और मेंटल हेल्थ को लेकर बहस शुरू हो चुकी है. इसी बीच ऐसे आंकड़े भी सामने आ रहे हैं, जो काफी ज्यादा हैरान करने वाले हैं. देश के 23 आईआईटी के आंकड़ों से पता चला है कि पिछले पांच साल में 45 ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने किसी न किसी वजह से अपनी जान दे दी. यानी आईआईटी में खुदकुशी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इसमें ये भी बताया गया है कि इन पांच सालों में जिन छात्रों की मौत हुई, उनमें ज्यादातर संख्या दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों की है.
आरक्षित वर्ग के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा
आंकड़ों के मुताबिक 2020-21 से 2024-25 के बीच 45 छात्रों ने आत्महत्या की है. इनमें से 28 छात्र अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों से थे. देश के सभी IITs से मांगी गई जानकारी के आधार पर ये आंकड़ा 8 दिसंबर 2025 को लोकसभा में दिया गया था. हैरानी वाली बात ये है कि खुदकुशी करने वाले 62 प्रतिशत से ज्यादा छात्र आरक्षित वर्ग से हैं.
किस वर्ग के कितने छात्र
- OBC वर्ग: 12 छात्र
- SC वर्ग: 9 छात्र
- ST वर्ग: 7 छात्र
- सामान्य वर्ग (General): 16 छात्र
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 1 छात्र
सबसे ज्यादा मामले इस साल आए
पिछले पांच सालों के आंकड़ों में ये भी बताया गया है कि खुदकुशी के मामलों में 2023-24 में सबसे बड़ा उछाल देखा गया. साल 2022-23 में 6 ऐसे मामले सामने आए थे, वहीं 2023-24 में ये संख्या बढ़कर 16 हो गई. साल 2024-25 में आत्महत्या के 13 मामले दर्ज किए गए. इनमें 4 ओबीसी वर्ग के छात्र, तीन एससी और 2 एसटी वर्ग के छात्र शामिल थे. यानी हाल ही में ऐसे मामलों में काफी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है.
किस IIT में सबसे ज्यादा केस?
छात्रों की खुदकुशी के मामले में सबसे आगे IIT हैदराबाद है, जहां पिछले पांच साल में 7 छात्रों ने ऐसा कदम उठाया. इसके बाद IIT खड़गपुर, IIT दिल्ली और IIT कानपुर में 6-6 मामले सामने आए. वहीं IIT मद्रास में 5 और IIT वाराणसी में 4 छात्रों की मौत हुई.
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