- IAS श्रीधन्या सुरेश केरल के कासरगोड जिले की जिला कलेक्टर और मजिस्ट्रेट नियुक्त हुई हैं
- वे केरल की पहली आदिवासी महिला IAS अधिकारी हैं और 2019 बैच की अधिकारी हैं
- श्रीधन्या सुरेश का बचपन आर्थिक अभावों में बीता, उनके माता-पिता मनरेगा मजदूरी करते थे
IAS श्रीधन्या सुरेश जिला कलेक्टर बन गई हैं. उन्होंने केरल के कासरगोड जिला कलेक्टर व मजिस्ट्रेट पद पर कार्यभार ग्रहण किया है. खुद श्रीधन्या सुरेश ने 16 सितंबर 2026 को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर इसकी जानकारी साझा की है. श्रीधन्या सुरेश एक ऐसे साधारण परिवार में पली-बढ़ीं, जहां उनके माता-पिता कभी मनरेगा मजदूरी करते थे. उन्होंने पहले IAS अधिकारी और अब जिला कलेक्टर बनकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है.
केरल की पहली आदिवासी महिला IAS
श्रीधन्या सुरेश केरल कैडर की 2019 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं. मूल रूप से वायनाड की रहने वालीं श्रीधन्या सुरेश आदिवासी समाज से आती हैं और उन्हें केरल की पहली आदिवासी महिला आईएएस अधिकारी बनने का गौरव हासिल हुआ है.
अभावों में बीता श्रीधन्या सुरेश का बचपन
श्रीधन्या सुरेश का बचपन बेहद अभावों में बीता था. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी. उनके माता-पिता केरल के वायनाड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत दिहाड़ी मजदूरी करते थे. इसके अतिरिक्त, वे तीर-धनुष और टोकरी बेचकर भी अपने परिवार का गुजारा चलाते थे. श्रीधन्या सुरेश ने सभी मुश्किलों को मात देते हुए वायनाड जिले के पोजुथाना गांव स्थित सरकारी स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की और फिर कालीकट के सेंट जोसेफ कॉलेज से जूलॉजी में उच्च शिक्षा हासिल की.

IAS श्रीधन्या सुरेश केरल के कासरगोड में जिला कलेक्टर बनीं हैं.
कलेक्टर राव से मिली आईएएस बनने की प्रेरणा
आगे की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए श्रीधन्या सुरेश ने पहले केरल के अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में क्लर्क के रूप में काम किया और बाद में एक आदिवासी छात्रावास में वार्डन की नौकरी भी संभाली. वहां तत्कालीन जिला कलेक्टर IAS श्रीराम राव को देखकर उनके मन में स्वयं कलेक्टर बनने का विचार आया. IAS श्रीराम राव ने ही उन्हें संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का सुझाव दिया था.

IAS श्रीधन्या सुरेश केरल के कासरगोड में जिला कलेक्टर
दोस्तों ने पैसे जुटाकर इंटरव्यू के लिए भेजा दिल्ली
इसके बाद श्रीधन्या सुरेश ने वार्डन की नौकरी छोड़ दी और पूरे मनोयोग से UPSC की तैयारी में जुट गईं. दिन-रात कड़ी मेहनत करके उन्होंने UPSC की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन इंटरव्यू देने के लिए दिल्ली स्थित UPSC कार्यालय पहुंचने तक के पैसे उनके पास नहीं थे. जब यह बात उनके दोस्तों को पता चली, तो उन्होंने आपस में ₹40,000 जुटाए और श्रीधन्या सुरेश को इंटरव्यू के लिए दिल्ली भेजा.

आईएएस श्रीधन्या सुरेश की सक्सेस स्टोरी, यूपीएससी में हासिल की 410वीं रैंक
तीसरे प्रयास में 410वीं ऑल इंडिया रैंक
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा-2018 में श्रीधन्या सुरेश ने अखिल भारतीय स्तर पर 410वीं रैंक हासिल की और उन्हें होम कैडर केरल आवंटित हुआ. UPSC में श्रीधन्या सुरेश को यह सफलता अपने तीसरे प्रयास में, महज 22 वर्ष की उम्र में मिली थी. केरल में कासरगोड की जिलाधिकारी बनने से पहले श्रीधन्या सुरेश कोझीकोड में सहायक जिला कलेक्टर के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. इसके अलावा वह मलप्पुरम के पेरिंथलमन्ना में भी तैनात रही हैं. केरल की कुरिचिया जनजाति से ताल्लुक रखने वालीं IAS श्रीधन्या सुरेश के पैतृक गांव का नाम पोजुथाना है. इस छोटे से गांव की कुल आबादी लगभग सात हजार है.
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