- बृजेश परमार 12वीं और कॉलेज में असफल होने के बावजूद पेशेवर डांसर बनकर दिल्ली मुंबई में काम कर चुके हैं
- लॉकडाउन के दौरान उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की
- उन्होंने दो बार RAS उत्तीर्ण कर पहले सहकारिता विभाग में अधिकारी और अब राजस्थान पुलिस में डीएसपी बने हैं
राजस्थान पुलिस में डीएसपी बने बृजेश परमार की सक्सेस स्टोरी भारतीय पुलिस सेवा के चर्चित आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा की कहानी से काफी मिलती-जुलती है. दोनों 12वीं में फेल हुए, लोगों के ताने सुने और फिर उन्हीं तानों को अपनी ताकत बनाकर पुलिस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया. बृजेश परमार ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2024 में सफलता हासिल की है. हाल ही में उनका चयन राजस्थान पुलिस सेवा के लिए हुआ है और आने वाले दिनों में वे बतौर डीएसपी सेवाएं देते नजर आएंगे.
पढ़ाई छोड़कर बने पेशेवर डांसर
बृजेश परमार की डीएसपी बनने की कहानी कई दिलचस्प मोड़ों से भरी है. वे सिर्फ 12वीं कक्षा में ही नहीं, बल्कि कॉलेज में भी फेल हो गए थे. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और पेशेवर डांसर बन गए. दिल्ली और मुंबई में रहकर उन्होंने कई बड़े कलाकारों और कोरियोग्राफरों के साथ काम किया. कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी.

राजस्थान पुलिस में डीएसपी पद पर ज्वाइन करते बृजेश परमार. Photo Credit: brijesh parmar Instagram
फिर जीवन में अचानक ऐसा मोड़ आया कि उन्होंने दोबारा किताबों से दोस्ती की और राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा दो बार उत्तीर्ण कर ली. पहले राजस्थान सहकारिता विभाग में अधिकारी और अब राजस्थान पुलिस में डीएसपी बने हैं. 5 अक्टूबर 2026 को उन्होंने राजस्थान पुलिस सेवा में शामिल हुए हैं और 14 अक्टूबर 2026 से जयपुर स्थित अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण के लिए जाएंगे.
कोटा में रहता है बृजेश परमार का परिवार
एनडीटीवी से बातचीत में बृजेश परमार ने बताया कि वे मूल रूप से राजस्थान के सिरोही जिले के गोयली गांव के रहने वाले हैं. वर्तमान में उनका परिवार कोटा में रहता है. उनके पिता केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में एएसआई अधिकारी के पद पर गया हवाई अड्डे पर सेवाएं दे रहे हैं. उनकी मां गृहिणी हैं.

बृजेश परमार की मां हाउस वाइफ हैं. ये मूल रूप से सिरोही के रहने वाले हैं. वर्तमान में परिवार कोटा में रहता है.
Photo Credit: brijesh parmar Instagram
बृजेश बताते हैं कि बचपन से वे पढ़ाई में अच्छे और रचनात्मक स्वभाव के थे. वे हमेशा सवाल पूछने वाले और जिज्ञासु किस्म के छात्र रहे हैं. उनके पिता की देशभर में लगातार ट्रांसफर वाली नौकरी होने के कारण वे उनके साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाए. परिवार या आसपास ऐसा कोई नहीं था जो आगे की पढ़ाई के बारे में मार्गदर्शन दे सके. उन्हें यह तक पता नहीं था कि 11वीं में अलग-अलग संकाय का चयन करना होता है और कौन सा संकाय किस उद्देश्य के लिए होता है.
पीसीएम में तीन-तीन नंबर मिले
दूसरों को देखकर उन्होंने भी विज्ञान वर्ग में गणित विषय चुन लिया, लेकिन इसकी गंभीरता और महत्व समझ नहीं पाए. पढ़ाई में रुचि कम होती गई, बेचैनी और कुंठा बढ़ती गई. आखिरकार वे 12वीं कक्षा में बुरी तरह असफल हो गए. गणित, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान में उन्हें क्रमश: 3, 3 और 4 अंक मिले. इसके बाद उनका पढ़ाई से पूरी तरह मन उचट गया. उन्हें लगने लगा कि पढ़ाई करना सामान्य लोगों का काम है. आज वे इसे अपनी अज्ञानता मानते हैं. फेल होने पर लोगों ने खूब ताने मारे.
कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद भी स्थिति नहीं बदली. वे परीक्षा के दौरान आधे घंटे में ही उत्तर पुस्तिका खाली छोड़कर बाहर आ जाते थे. परीक्षा हॉल में उनका दम घुटता था. नतीजा यह हुआ कि वे स्नातक प्रथम वर्ष में भी फेल हो गए. उन्होंने लगभग पढ़ाई छोड़ने का निर्णय कर लिया था, लेकिन एक शिक्षक की सलाह पर उन्होंने सिर्फ डिग्री पूरी करने के उद्देश्य से स्नातक की पढ़ाई जारी रखी.

बृजेश परमार पढ़ाई छोड़कर डांसर बन गए थे. Photo Credit: brijesh parmar Instagram
डांसर बनने के लिए दिल्ली पहुंचे
बृजेश बताते हैं कि प्रथम वर्ष में असफल होने के बाद उनका मन पूरी तरह टूट चुका था. हालांकि बचपन से उन्हें नृत्य में काफी रुचि थी. इसी वजह से वे पेशेवर प्रशिक्षण लेने के लिए दिल्ली चले गए. वहां उन्होंने प्रसिद्ध नृत्य प्रशिक्षक एश्ले लोबो की डांस कंपनी से प्रोफेशनल डांस सर्टिफिकेशन कोर्स किया. इस दौरान उन्होंने डांस की ट्रेनिंग ली तथा अमेरिका, जर्मनी, इटली, इजराइल और मैक्सिको सहित कई देशों के कोरियोग्राफरों के साथ काम किया. इसके बाद उनका चयन नवधारा इंडिया डांस थिएटर में हुआ, जो दुनिया के विभिन्न देशों में प्रस्तुति देने वाली प्रतिष्ठित नृत्य संस्था है. बाद में उनका चयन प्रसिद्ध डांसर और कोरियोग्राफर शक्ति मोहन की टीम में हुआ. इसके जरिए उन्हें मनोरंजन और फिल्म जगत में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने कई कलाकारों और कोरियोग्राफरों के साथ भी काम किया.
लॉकडाउन ने बदली जिंदगी, आरपीएससी की तैयारी
लॉकडाउन के दौरान उन्हें वापस घर लौटना पड़ा. घर पर रहते हुए यूट्यूब के माध्यम से उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा और राजस्थान प्रशासनिक सेवा के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने इन परीक्षाओं से जुड़े कई वीडियो देखे, जिससे उनकी रुचि बढ़ी और पढ़ाई की ओर लौटने की इच्छा जागी. इसके बाद उन्होंने 19 अप्रैल 2022 से राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. वर्ष 2022 से 2025 तक उन्होंने पूरी तरह खुद को तैयारी में झोंक दिया. वे बताते हैं कि इन तीन वर्षों के दौरान वे लगभग घर से बाहर नहीं निकले. कोचिंग में अपने बैच के टॉपर रहे, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ा.
कड़ी मेहनत का परिणाम यह हुआ कि उन्होंने पहले ही प्रयास में राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2023 उत्तीर्ण कर ली. वर्तमान में वे सहकारिता विभाग में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. इसके बाद उन्होंने दूसरा प्रयास किया और राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2024 भी पास कर ली. इस बार उन्हें राजस्थान पुलिस सेवा में चयन मिला और अब वे डीएसपी बनने जा रहे हैं.

मेरी कहानी '12वीं फेल पार्ट-2' जैसी
बृजेश परमार का कहना है कि उनकी कहानी से अनेक युवाओं को प्रेरणा मिली है. कई लोगों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल होता है कि कभी 12वीं और कॉलेज में फेल होने वाला व्यक्ति राजस्थान प्रशासनिक सेवा जैसी कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर सकता है. वे कहते हैं कि आज उनकी सफलता से ऐसे अभ्यर्थियों को हौसला मिला है, जो खुद पर भरोसा नहीं कर पाते थे. उनकी उपलब्धि ने कई युवाओं के मन का डर दूर किया है.
बृजेश अपनी कहानी को "12वीं फेल पार्ट-2" जैसा बताते हैं. डांसर से सिविल सेवक बने बृजेश का मानना है कि यदि व्यक्ति लगातार आगे बढ़ने का प्रयास करे और जिज्ञासु बना रहे, तो जीवन में कुछ भी हासिल किया जा सकता है. उनका कहना है, "कोई भी व्यक्ति छोटा नहीं होता. जब उसके भीतर ज्ञान और बुद्धिमत्ता का दीप जलता है, तो वह अपनी क्षमता को पहचानकर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है." एससी परिवार से ताल्लुक रखने वाले बृजेश परमार ने आरएएस परीक्षा में पहले प्रयास में पूरे राजस्थान में 1660 और दूसरे प्रयास में 1096वीं रैंक हासिल की थी.
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