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This Article is From Oct 16, 2017

मध्य प्रदेश: क्रेडिट कार्डों को हैक करके विदेशों में करते थे अय्याशी, दो गिरफ्तार

क्रेडिट कार्डों की गोपनीय जानकारी खरीदकर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन खरीदारी और विदेशों में अय्याशी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का मध्य प्रदेश पुलिस के साइबर दस्ते ने भंडाफोड़ किया.

मध्य प्रदेश: क्रेडिट कार्डों को हैक करके विदेशों में करते थे अय्याशी, दो गिरफ्तार
ये लोग क्रेडिट कार्ड हैक करके विदेशों में जाकर अय्याशी करते थे (प्रतीकात्मक चित्र)
  • हैंकर्स में एक पाकिस्तान का नागरिक शामिल है
  • "डार्क वेब" का बेवसाइटों से चुराते थे कार्ड का डाटा
  • विदेशों में जाकर करते थे खरीदारी और अय्याशी
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इंदौर: क्रेडिट कार्डों की गोपनीय जानकारी खरीदकर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन खरीदारी और विदेशों में अय्याशी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का मध्य प्रदेश पुलिस के साइबर दस्ते ने भंडाफोड़ किया. गिरोह के दो ​भारतीय सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं. राज्य साइबर सेल की इंदौर इकाई के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह ने बताया कि आगर-मालवा जिले के एक बैंक अधिकारी की शिकायत पर गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रामकुमार पिल्लै और रामप्रसाद नाडर के रूप में हुई है. दोनों आरोपी मुम्बई के रहने वाले हैं और संदिग्ध तौर पर पाकिस्तानी नागरिक शेख अफजल उर्फ शोजी के साइबर गिरोह से जुड़े हैं.

उन्होंने बताया कि शोजी के बारे में पता चला है कि वह मूलतः लाहौर का रहने वाला है और पिछले साल ही उसकी शादी हुई है. वह दुनिया के अलग-अलग देशों में घूमता रहता है. पिछली बार जब पिल्लै और नाडर की उससे स्काइप के जरिये बात हुई थी, तब वह उज्बेकिस्तान में था.

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साइबर गिरोह के सदस्यों ने "डार्क वेब" (इंटरनेट का गुप्त संसार जो अवैध कारोबार के लिए कुख्यात है) की कुछ वेबसाइटों पर हैकरों द्वारा उपलब्ध कराई क्रेडिट कार्डों की डीटेल खरीदीं. फिर इस गोपनीय जानकारी का दुरूपयोग कर बैंकॉक, थाईलैंड, दुबई, हांगकांग और मलेशिया के हवाई टिकट और पर्यटन पैकेज खरीदे. इसके साथ ही, विदेशी कम्पनियों की महंगी चीजों की ऑनलाइन खरीदारी की.

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पुलिस ने बताया कि डार्क वेब पर लोगों के क्रेडिट कार्डों की डीटेल खरीदने के लिये आरोपी बिटकॉइन (आभासी मुद्रा) के ऑनलाइन वॉलेट के जरिए भुगतान करते थे. अगर इस भुगतान को भारतीय मुद्रा के सन्दर्भ में आंका जाये, तो उन्हें हर क्रेडिट कार्ड की डीटेल खरीदने के लिये महज 500 से 800 रुपये चुकाने पड़ते थे.

पुलिस के हत्थे चढ़े दोनों आरोपी क्रेडिट कार्ड के दुरुपयोग से जितनी रकम खर्च करते थे, उसका आधा हिस्सा गोपनीय ऑनलाइन तरीकों से शोजी को भेजा करते थे. आरोपी उन वेबसाइट को चुनते थे, जहां खरीदारी के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) की आवश्यकता नहीं होती थी. इससे संबंधित धारक को भुगतान के बाद ही पता चलता था कि उसके क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग किया गया है. शुरूआती जांच के मुताबिक दोनों आरोपियों ने अब तक 17 क्रेडिट कार्ड की डीटेल खरीदकर करीब 20 लाख रुपये की अवैध खरीदारी की है. इस गिरोह में जबलपुर के युवक गौरव सिंह की भी भूमिका सामने आयी है, उसकी तलाश की जा रही है.

(इनपुट भाषा से)

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