
विराट कोहली ने इस पारी के जरिये अपनी मानसिक मजबूती का परिचय दिया था (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
किसी भी बल्लेबाज का जीवट तब लोगों को पता चलता है जब वह मुश्किल वक्त पर अपनी टीम के लिए बेहतरीन साहसिक पारी खेले. इस मामले में विराट कोहली का जवाब नहीं. वर्ष 2006 में विराट ने रणजी ट्रॉफी में अपनी पिता की मौत के तुरंत बाद साहसिक पारी खेली थी. अपनी इस पारी के सहारे विराट ने न केवल दिल्ली की टीम को हार से बचाया था बल्कि इस बात का भी दुनिया को अहसास कराया था कि वे किस मिट्टी के बने हुए हैं. 5 नवंबर को 29 वर्ष के होने वाले विराट ने इस पारी के जरिये बताया था कि टीम हित में व्यक्तिगत क्षति को भुलाते हुए पूरे समर्पण के साथ टीम के हित का ध्यान रखते हैं. विराट से पहले उनके आदर्श सचिन तेंदुलकर ने भी वर्ष 1999 के विश्वकप में पिता की मौत के बाद केन्या के खिलाफ शतकीय पारी खेलकर टीम इंडिया की जीत सुनिश्चित की थी. विराट की इस पारी के बाद ऋषभ पंत भी आईपीएल में पिता की मौत के तुरंत बाद दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए जुझारू पारी खेल चुके हैं.
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बात विराट की पारी की. यह दिसंबर 2006 की है, जब विराट ने रणजी क्रिकेट खेलना प्रारंभ किया ही थी.दिल्ली की ओर से उन्होंने कर्नाटक के खिलाफ पिता की मौत के बाद भी उन्होंने ऐसी पारी खेली कि हर कोई वाह-वाह कर उठा. इस पारी के बाद हर किसी के मन में विराट के प्रति सम्मान और बढ़ गया. इस पारी ने उन्हें ऐसे खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया जो टीम के हित में कुछ भी करने को तैयार रहता है. 90 रन की उस दमदार पारी के दौरान पूरे समय समय कोहली इस सच के साथ विकेट पर डटे हुए थे कि उनके पिता की उस दिन तड़के मौत हो चुकी है.
इस मैच में कर्नाटक ने पहली पारी में 446 रन का स्कोर पहले दिन खड़ा कर लिया था. दूसरे दिन दिल्ली की टीम कर्नाटक के स्कोर का पीछा करने उतरी तो उनके 5 विकेट जल्द ही आउट हो गए थे. इसके बाद 18 साल का एक युवा बल्लेबाज कोहली बल्लेबाजी करने आए. दूसरे दिन के खेल खत्म होने तक कोहली और पुनीत विष्ट ने पारी को संभला और स्कोर को 103 तक ले गए. खेल खत्म होने तक कोहली 40 रन बनाकर नाबाद थे. उसी रात कोहली को पता चला कि उनके पिता का ब्रेन हैमरेज के चलते देहांत हो गया है. दिल्ली की टीम की खातिर कोहली का बैटिंग करना जरूरी था.
वीडियो: सुनील गावस्कर ने इस अंदाज में की विराट कोहली की प्रशंसा
ऐसे समय में विराट ने टीम के हित को ध्यान में रखते हुए अपनी निजी क्षति को नजरअंदाज कर दिया. पिता की मौत के गम को अपने आप में भी जज्ब करते हुए उन्होंने 281 मिनट बैटिंग की और 238 गेंद का सामना करते हुए 90 रन की पारी खेली. जिस वक्त विराट आउट हुए उस समय दिल्ली टीम फॉलोआन बचाने से कुछ ही दूर रह गई थी. उनकी इस जीवट से भरपूर पारी के कारण दिल्ली की टीम मैच बचाने में सफल रही थी. 90 रन की पारी खेलने के बाद विराट पिता की अंत्येष्टि में चले गए. विराट की इस पारी ने उनके बड़े खिलाड़ी बनने की झलक दे दी थी. इस पारी में दिखाया था कि विराट मानसिक रूप से कितने मजबूत हैं. आज भी खेल के मैदान पर विराट का समर्पण भाव देखते ही बनता है. यही कारण है कि उनकी कप्तानी में टीम इंडिया लगातार सफलताएं हासिल कर रही है.
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बात विराट की पारी की. यह दिसंबर 2006 की है, जब विराट ने रणजी क्रिकेट खेलना प्रारंभ किया ही थी.दिल्ली की ओर से उन्होंने कर्नाटक के खिलाफ पिता की मौत के बाद भी उन्होंने ऐसी पारी खेली कि हर कोई वाह-वाह कर उठा. इस पारी के बाद हर किसी के मन में विराट के प्रति सम्मान और बढ़ गया. इस पारी ने उन्हें ऐसे खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया जो टीम के हित में कुछ भी करने को तैयार रहता है. 90 रन की उस दमदार पारी के दौरान पूरे समय समय कोहली इस सच के साथ विकेट पर डटे हुए थे कि उनके पिता की उस दिन तड़के मौत हो चुकी है.
इस मैच में कर्नाटक ने पहली पारी में 446 रन का स्कोर पहले दिन खड़ा कर लिया था. दूसरे दिन दिल्ली की टीम कर्नाटक के स्कोर का पीछा करने उतरी तो उनके 5 विकेट जल्द ही आउट हो गए थे. इसके बाद 18 साल का एक युवा बल्लेबाज कोहली बल्लेबाजी करने आए. दूसरे दिन के खेल खत्म होने तक कोहली और पुनीत विष्ट ने पारी को संभला और स्कोर को 103 तक ले गए. खेल खत्म होने तक कोहली 40 रन बनाकर नाबाद थे. उसी रात कोहली को पता चला कि उनके पिता का ब्रेन हैमरेज के चलते देहांत हो गया है. दिल्ली की टीम की खातिर कोहली का बैटिंग करना जरूरी था.
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ऐसे समय में विराट ने टीम के हित को ध्यान में रखते हुए अपनी निजी क्षति को नजरअंदाज कर दिया. पिता की मौत के गम को अपने आप में भी जज्ब करते हुए उन्होंने 281 मिनट बैटिंग की और 238 गेंद का सामना करते हुए 90 रन की पारी खेली. जिस वक्त विराट आउट हुए उस समय दिल्ली टीम फॉलोआन बचाने से कुछ ही दूर रह गई थी. उनकी इस जीवट से भरपूर पारी के कारण दिल्ली की टीम मैच बचाने में सफल रही थी. 90 रन की पारी खेलने के बाद विराट पिता की अंत्येष्टि में चले गए. विराट की इस पारी ने उनके बड़े खिलाड़ी बनने की झलक दे दी थी. इस पारी में दिखाया था कि विराट मानसिक रूप से कितने मजबूत हैं. आज भी खेल के मैदान पर विराट का समर्पण भाव देखते ही बनता है. यही कारण है कि उनकी कप्तानी में टीम इंडिया लगातार सफलताएं हासिल कर रही है.
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