इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में अगर वर्तमान में किसी का टेंपो सबसे ज्यादा हाई है, तो वह कोई और नहीं, बल्कि नए सुपर किड वैभव सूर्यवंशी (Vaibahv Sooryavanshi) हैं. शुक्रवार को गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में सूर्यवंशी (78 रन, 26 गेंद, 8 चौके, 7 छक्के) के बल्ले से हेजलवुड और भुवनेश्वर कुमार जैसे दिग्गज बॉलरों के खिलाफ जैसी सुनानी निकली, उसने पूरे क्रिकेट जगत को मंत्रमुग्ध कर दिया. आम से लेकर खास तक, गलियों से लेकर कार्पोरेट हाउस तक उनकी बातें हो रही हैं, वैभव से जुड़ी कहानियां सामने आ रही हैं. अब पिछले साल उनसे जुड़ा एक भावुक किस्सा सामने आया है. दरअसल हुआ यह कि वैभव के सिर पर गेंद लग गई थी. और एहतियात के तौर पर NRI स्कैन के लिए उन्हें अस्पताल लेकर जाया गया था. रिपोर्ट ठीक आने पर उनका पहला सवाल डॉक्टर से यही था-'सर कल से क्रिकेट खेल सकते हैं?' यह खुलासा वैभव के गांव ताजपुर से ठीक अगले गांव रामपुर महेशपुर से से आने वाले और पिछले पांच साल से वैभव के लिए बॉल थ्रोअर की भूमिका निभा रहे उनके रिश्ते के भाई आदित्य ठाकुर ने किया.
ठाकुर ने बताया कि पिछले साल आईपीएल से पहले यह हादसा हुआ था. जब हम नेट कर रहे थे, तो गेंद उसके हेलमेट पर लगी और वह नीचे गिर गिर गया. उसके पिता नेट के पीछे खड़े देख रहे थे, लेकिन वह बिल्कुल भी नहीं घबराए और न ही तेजी से अंदर नेट की और दौड़े. लेकिन मैं डर गया और वैभव की ओर दौड़ा. लेकिन थोड़ी देर बाद वैभव खुद ही खड़ा हो गया और बिल्कुल भी नहीं घबराया.' उन्होंने बताया, 'सुरक्षा के लिहाज से हम उसे MRI के लिए पटना ले गए. सब ठीक आने के बाद उसका डॉक्टर से यही सवाल था-'सर कल से क्रिकेट खेल सकते हैं?'
आदित्य ने कहा, 'जब भी वह बैटिंग करने उतरता है, तो गांव में दीवाली सा माहौल हो जाता है. जिस दिन भी वह तूफानी बल्लेबाजी करता है, तो गांव में पटाखे फूटने की आवाजा आती रहती है. वह जैसे शॉट खेलते है, मुझे उससे बिल्कुल भी हैरानी नहीं होती. मैं पिछले 5 साल उनके साथ काम किया है और यह केवल शुरुआत भर है.'
वहीं, राजस्थान रॉयल्स के हेड ऑफ क्रिकेट जुबिन भरुचा ने कहा 'वैभव की बैकलिफ्ट असाधारण है. जब आप बल्ला उठाते है, तो यह सामान्य तौर पर आपके दाएं कंधे से आगे नहीं जाती, लेकिन वैभव का बल्ला न केवल दाएं कंधे, बल्कि उसके सिर से आगे जाती है, जो कि बहुत ही कम देखने को मिलता है.' आदित्य ने कहा, 'वास्तव में अगर आप 150 किमी/घंटा की रफ्तार से यॉर्कर फेंकते हैं, तो तकनीकी तौर पर उसे उस पर चूकना चाहिए. वजह यह है कि बल्ले को सीथे सिर के सामने लाना और फिर पीछे जाकर इसे नीचे रखना बहुत ही मुश्किल काम है, लेकिन वैभव इसमें सफल रहता है. उनमें यह नैसर्गिक बात है'
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