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न पारसी, न मुंबइया! टाटा ट्रस्‍ट में फिर बवाल! 2 ट्रस्‍टी की कुर्सी पर मिस्‍त्री ने उठाए सवाल, 5 प्‍वाइंट में समझें पूरा हाल

Tata Trust Row: मिस्त्री का कहना है कि श्रीनिवासन और विजय सिंह न तो पारसी हैं और न ही मुंबई के स्थायी निवासी. इसलिए, उनका चयन शुरू से ही गलत था और उनकी नियुक्ति 'शून्य' है.

न पारसी, न मुंबइया! टाटा ट्रस्‍ट में फिर बवाल! 2 ट्रस्‍टी की कुर्सी पर मिस्‍त्री ने उठाए सवाल, 5 प्‍वाइंट में समझें पूरा हाल
Tata Trust Row: मेहली मिस्‍त्री को बाई हीराबाई टाटा मेमोरिय‍ल ट्रस्‍ट में दो सदस्‍यों पर आपत्ति है

दिग्‍गज औद्योगिक घराने टाटा (Tata) से जुड़े एक ट्रस्‍ट में एक बार फिर 'बवाल' सामने आ रहा है. टाटा ट्रस्‍ट की छतरी के नीचे चल रहे एक एलाइड ट्रस्‍ट में सदस्‍यों की नियुक्ति का मामला चैरिटी कमिश्‍नर के पास पहुंच गया है. टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के करीबी रहे मेहली मिस्त्री ने एक ऐसा कानूनी मोर्चा खोल दिया है, जो सीधे तौर पर 'बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन' (BHJTNCI) के दो दिग्गज ट्रस्टियों की कुर्सी पर सवाल खड़ा करता है. मिस्‍त्री ने BHJTNCI के दो सदस्‍यों वेणु श्रीनिवासन (TVS मोटर के चेयरमैन एमेरिटस) और विजय सिंह (पूर्व IAS अधिकारी) की सदस्‍यता पर आपत्ति जताई है. इस संबंध में उन्‍होंने महाराष्‍ट्र चैरिटी कमिश्‍नर के पास शिकायत की गई. 

मेहली मिस्त्री एम पल्लोनजी ग्रुप के प्रमोटर हैं. वो ग्रुप, जिसने टाटा परिवार के साथ दशकों से साझेदारी निभाई है. कई टाटा कंपनियों के साथ उनके ग्रुप के कारोबारी संबंध भी हैं.

मेहली मिस्‍त्री की आपत्ति के पीछे 'पारसी विरासत' भी एक बड़ी वजह है. फिलहाल, टाटा साम्राज्य के गलियारों से निकलकर आ रही इस खबर की कॉरपोरेट जगत में खूब चर्चा हो रही है. इस पूरे वाकये को हम 5 प्‍वाइंट में समझने की कोशिश करेंगे. उससे पहले ट्रस्‍ट के बारे में समझ लेते हैं. 

टाटा ट्रस्‍ट्स का एलाइड ट्रस्‍ट है BHJTNCI

सरल भाषा में समझें तो 'टाटा ट्रस्ट्स' एक छतरी (Umbrella) की तरह है, जिसके नीचे कई अलग-अलग ट्रस्ट काम करते हैं. बाई हीराबाई ट्रस्ट इसी छतरी के नीचे आने वाला एक सहयोगी ट्रस्ट (Allied Trust) है. 

  • टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts): ये मुख्य रूप से दो बड़े ट्रस्टों, 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट', 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' और उनके सहयोगी ट्रस्टों का एक समूह है. 
  • बाई हीराबाई ट्रस्ट (BHJTNCI): ये सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) से जुड़ा हुआ एक 'एलाइड ट्रस्ट' है. इसकी स्थापना 1923 में सर रतन टाटा की वसीयत के अनुसार की गई थी. 

अब 5 प्‍वाइंट में समझ लेते हैं विवाद क्‍या है.... 

1. विवाद की जड़ में 103 साल पुराना डीड

मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास एक आपत्ति दर्ज कराई है. उनका दावा है कि वेणु श्रीनिवासन (TVS मोटर के चेयरमैन एमेरिटस) और विजय सिंह (पूर्व IAS अधिकारी) इस ट्रस्ट के ट्रस्टी बनने की योग्यता ही नहीं रखते.

विवाद की जड़ 103 साल पुरानी है. मिस्त्री ने 1923 के ट्रस्ट डीड (Trust Deed) का हवाला देते हुए एक बेहद सख्त तर्क दिया है. डीड की धारा 6 और 18 के मुताबिक, अगर कोई ट्रस्टी निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता, तो उसे कानूनन 'डीम्ड डेड' (Deemed Dead) यानी 'मृत मान लिया गया' समझा जाना चाहिए.

2. ट्रस्‍टी बनने के लिए क्या हैं वो शर्तें?

मिस्त्री की दलील है कि ट्रस्ट के नियमों के अनुसार ट्रस्टी बनने के लिए दो अनिवार्य शर्तें हैं:

  • पारसी जोरोस्ट्रियन (Parsi Zoroastrian) धर्म का होना.
  • मुंबई में स्थाई निवास (Permanent Residence) होना.

मिस्त्री का कहना है कि श्रीनिवासन और विजय सिंह न तो पारसी हैं और न ही मुंबई के स्थायी निवासी. इसलिए, उनका चयन शुरू से ही गलत था और उनकी नियुक्ति 'शून्य' है.

3. 'धोखाधड़ी और विश्वासघात' का आरोप

बात सिर्फ योग्यता तक ही सीमित नहीं रही. मिस्त्री ने इसे और गंभीर बनाते हुए कहा है कि इन पदों पर बने रहना भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2024 और महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात के समान है. उन्होंने चैरिटी कमिश्नर से मांग की है कि सभी ट्रस्टियों से हलफनामा (Affidavit) मांगा जाए, जिसमें वे अपनी योग्यता और धर्म की पुष्टि करें.

4. ट्रस्ट का मौजूदा स्‍ट्रक्‍चर 

'बाई हीराबाई ट्रस्ट' (BHJTNCI) 1923 से नवसारी (गुजरात) में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पारसी समुदाय की सेवा कर रहा है. वर्तमान में इसके बोर्ड में 6 दिग्गज शामिल हैं:

  • नोएल टाटा (अध्यक्ष)
  • वेणु श्रीनिवासन (उपाध्यक्ष- जिन पर आपत्ति है)
  • विजय सिंह (उपाध्यक्ष- जिन पर आपत्ति है)
  • जिमी एन टाटा
  • दारियस खंबाटा
  • जहांगीर एचसी जहांगीर

5. मिस्‍त्री बोले- अपनी बहाली नहीं, हितों की रक्षा चाहता हूं

अक्सर ऐसे विवादों में माना जाता है कि कोई व्यक्ति अपनी कुर्सी वापस पाने के लिए लड़ रहा है, लेकिन मेहली मिस्त्री ने इसे साफ कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा, 'मेरा मकसद अपनी बहाली नहीं है. मैं सिर्फ रतन टाटा की विरासत, ट्रस्ट के संस्थापक की वसीयत और पारसी समुदाय के हितों की रक्षा करना चाहता हूं.' 

बता दें कि नवंबर 2025 में मिस्त्री ने खुद बड़े ही गरिमापूर्ण तरीके से टाटा ट्रस्ट के पदों से इस्तीफा दे दिया था, ताकि कोई विवाद न बढ़े.

तो फिर अब आगे क्या होना है?

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्‍त्री, इस मामले में स्‍वत: संज्ञान लेने की उम्‍मीद कर रहे हैं. अगर चैरिटी कमिश्नर, मिस्त्री की 'सुओ मोटो' (स्वत: संज्ञान) जांच की मांग स्वीकार कर लेते हैं, तो टाटा ट्रस्ट के इन दिग्गजों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए दस्तावेजों और हलफनामों की कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा. ये देखना दिलचस्प होगा कि 1923 के नियम 2026 के इस कॉरपोरेट स्‍ट्रक्‍चर में क्या मोड़ लाते हैं. इस मामले में वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह या अन्‍य पक्ष से कोई प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है. 

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